दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हथियारों की तस्करी के आरोप में यूपी के मेरठ से वसीम उर्फ हाजी वसीम को गिरफ्तार किया है. उसके साथ माजिद नाम का एक शख्स भी पकड़ा गया है. इल्जाम है कि वसीम ही वो शख्स है जिसने साल 2020 के दिल्ली दंगे के दौरान पुलिस वाले पर पिस्टल तानने वाले शाहरुख पठान को हथियार सप्लाई किया था. इस मामले में आरोपी का कनाडा में रहने वाले गैंगस्टर गोपी लाहोरिया का कनेक्शन भी सामने आया है.
स्पेशल सीपी (क्राइम) एचजीएस धालीवाल के मुताबिक, आरोपियों के तार कनाडा में बैठे गैंगस्टर दविंदर पाल सिंह उर्फ गोपी लाहोरिया से जुड़े हैं. पुलिस का दावा है कि गोपी लाहोरिया के निर्देश पर वसीम और माजिद ने बंबीहा-कपिल सांगवान उर्फ नंदू सिंडिकेट के शूटरों को हथियार उपलब्ध कराए थे. इस मामले की जांच अब हथियार सप्लाई के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने के लिए आगे बढ़ाई जा रही है.
अब सवाल ये है कि पुलिस आरोपियों तक कैसे पहुंची? तो ये भी जान लीजिए. दरअसल, द्वारका के छावला इलाके के दीनपुर गांव में उमेद सिंह को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी. 16 अगस्त को दो शूटर उमेद सिंह के घर में घुसे और उस पर फायरिंग करने के बाद मौके से फरार हो गए. हालांकि, हमले में उमेद की जान बच गई. वारदात के बाद क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच शुरू की.
19 अगस्त को पुलिस ने पंजाब के रहने वाले दो शूटरों हरमनजीत सिंह और हरदीप सिंह उर्फ बिल्ला को गिरफ्तार किया. पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि इस हत्या की सुपारी कनाडा बेस्ड गैंगस्टर गोपी लाहोरिया ने दी थी. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को हथियार उपलब्ध कराने वाले सप्लायरों के बारे में अहम जानकारी मिली.
पुलिस के मुताबिक, उमेद सिंह को निशाना बनाने के पीछे पुरानी रंजिश की एक कड़ी भी है. कपिल सांगवान उर्फ नंदू के जीजा सुनील उर्फ डॉक्टर की साल 2015 में हत्या हुई थी. इस मामले में उमेद सिंह का भाई सूरजभान उर्फ बल्लू पहलवान चश्मदीद गवाह बताया गया था. पुलिस को आशंका है कि इसी मामले में कोर्ट के सामने गवाही को लेकर गैंग को डर था.
जांच के अनुसार, गवाही से मुकरने की आशंका के चलते जनवरी 2024 में सूरजभान उर्फ बल्लू पहलवान की भी हत्या करवा दी गई थी. इसके बाद अब उमेद सिंह को भी रास्ते से हटाने की सुपारी दिए जाने का आरोप है. इस तरह पुरानी हत्या, गवाह और बदले की कार्रवाई की कड़ियां इस मामले में एक-दूसरे से जुड़ती नजर आ रही हैं.
इस केस में पुलिस ने लुधियाना निवासी हरप्रीत सिंह को भी गिरफ्तार किया है. जांच में उसका नाम हत्या की साजिश से जुड़ने की बात सामने आई है. क्राइम ब्रांच अब सभी आरोपियों की भूमिका और उनके आपसी संपर्कों की पड़ताल कर रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विदेश में बैठे गैंगस्टरों के निर्देश दिल्ली और पंजाब में मौजूद अपराधियों तक किस माध्यम से पहुंच रहे थे.
क्राइम ब्रांच में केस ट्रांसफर होने के बाद जांच आगे बढ़ी. इसी दौरान पुलिस को पता चला कि यमुनापार के छेनू पहलवान गिरोह से जुड़े हथियार सप्लायर वसीम और माजिद ने शूटरों को पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराए थे. पुलिस के मुताबिक, रविवार रात एक मुठभेड़ के बाद आरोपी वसीम को काबू कर लिया गया. पुलिस ने उसके पास से एक पिस्टल और वारदात में इस्तेमाल की जा रही कार बरामद की.
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, माजिद उर्फ अरमान के खिलाफ करीब 50 मामले दर्ज हैं, जबकि वसीम के खिलाफ 10 केस बताए गए हैं. दोनों के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए क्राइम ब्रांच अब उनके पुराने मामलों की भी जानकारी जुटा रही है. पुलिस को शक है कि हथियार सप्लाई का यह नेटवर्क केवल एक वारदात तक सीमित नहीं है.
जांच के दौरान क्राइम ब्रांच को वसीम के हथियार सप्लाई नेटवर्क से जुड़े कुछ पुराने मामलों की जानकारी भी मिली. पुलिस के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान 24 फरवरी 2020 को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन और मौजपुर चौक के बीच 66 फुटा रोड पर हुई हिंसा में शाहरुख पठान ने जिस पिस्टल को पुलिसकर्मी दीपक दहिया पर ताना था, वह कथित तौर पर वसीम ने ही बेची थी.
इस मामले की जांच में अब पुलिस वसीम के पुराने हथियार कारोबार की भी कड़ियां जोड़ रही है. इसके अलावा सीलमपुर में 27 जनवरी 2026 को हुए तारिक हसन हत्याकांड में आरोपी आबिर उर्फ साबिर उर्फ पोपा का भी दावा सामने आया था कि उसने वसीम से पिस्टल खरीदी थी. इन दावों की कड़ियों को जोड़कर पुलिस हथियारों की सप्लाई और इस्तेमाल का रिकॉर्ड खंगाल रही है.
क्राइम ब्रांच की जांच का सबसे अहम हिस्सा अब यही है कि छेनू पहलवान गिरोह से जुड़े वसीम के तार बंबीहा-कपिल सांगवान उर्फ नंदू सिंडिकेट के कनाडा बेस्ड गैंगस्टरों तक कैसे पहुंचे. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि विदेश में बैठे गैंगस्टर हथियारों की डिमांड कैसे भेजते थे और दिल्ली-पंजाब में मौजूद सप्लायरों तक वह ऑर्डर किस माध्यम से पहुंचता था.
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