गुजरात के गांधीनगर से कनाडा का PR दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है. कुडासन स्थित 'विन विन ओवरसीज़' के वीजा एजेंट पर एक ही परिवार के भाई-बहन से 97.50 लाख रुपये लेने का आरोप है. आरोप है कि एजेंट ने दोनों को कनाडा का PR दिलाने का भरोसा दिया था, लेकिन इसके बदले उन्हें केवल क्लोज्ड वर्क परमिट (Closed Work Permit) थमा दिया गया. हालात ऐसे बने कि कनाडा पहुंचे भाई-बहन को आखिरकार भारत लौटना पड़ा.
इस मामले में पीड़ित परिवार ने गांधीनगर के इन्फोसिटी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. परिवार का आरोप है कि एजेंट ने वीजा और उसके बाद तुरंत PR दिलाने का भरोसा देकर बड़ी रकम ली थी. बाद में जब PR की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी तो एजेंट लगातार टालमटोल करता रहा.
गांधीनगर के कुडासन निवासी सुनीलभाई अपने बेटे और भतीजी को कनाडा भेजना चाहते थे. इसी सिलसिले में करीब दो साल पहले उनकी मुलाकात अमेरिका में रहने वाले एक परिचित के माध्यम से रवि सोलंकी से हुई. रवि सोलंकी कुडासन के राधे स्क्वायर में ऑफिस चलाता था और खुद को विदेश भेजने का अनुभवी एजेंट बताता था. परिवार के मुताबिक, उसने दावा किया था कि वह अब तक 35 लोगों को विदेश भेज चुका है.
मार्च 2025 में रवि सोलंकी ने परिवार को कनाडा भेजने का प्रस्ताव दिया. उसने दावा किया कि तीन से चार महीने के भीतर कनाडा का वीजा मिल जाएगा और उसके तुरंत बाद PR की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी. इस पूरे काम के लिए 97.50 लाख रुपये में सौदा तय हुआ. परिवार ने एजेंट की बात पर भरोसा किया और वीजा प्रक्रिया आगे बढ़ाई.
वीजा प्रक्रिया के दौरान सुनीलभाई के बेटे और भतीजी की बायोमेट्रिक और मेडिकल प्रक्रिया पूरी कराई गई. इसके बाद परिवार ने एजेंट को 97.50 लाख रुपये नकद दे दिए. परिवार का आरोप है कि जुलाई 2025 में एजेंट ने कनाडा के मैनिटोबा स्थित एक कंपनी का Closed Work Permit उपलब्ध कराया. उस समय परिवार को भरोसा था कि यह कनाडा पहुंचने के बाद PR हासिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा है.
लेकिन कनाडा पहुंचने के बाद ही परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा. सुनीलभाई के बेटे को संबंधित कंपनी ने काम देने से इनकार कर दिया. बताया गया कि उसके पास Health Card नहीं था. जब परिवार ने इस बारे में रवि सोलंकी से संपर्क किया तो उसने कहा कि Health Card की प्रक्रिया चल रही है और जल्द समस्या दूर हो जाएगी.
अगस्त 2025 में सुनीलभाई की भतीजी भी कनाडा पहुंच गई. इस दौरान एजेंट परिवार को लगातार भरोसा देता रहा कि PR की फाइल पर काम चल रहा है. आरोप है कि PR फाइल को एक्टिव रखने के नाम पर वह हर 15 दिन में 1,500 कनाडाई डॉलर की रकम भी लेता रहा. जब भी परिवार कनाडा के PR के बारे में सवाल करता, एजेंट कुछ दिनों में काम पूरा होने की बात कहकर उन्हें आश्वस्त कर देता.
समय बीतता गया, लेकिन PR की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी. अप्रैल 2026 तक भी परिवार को कनाडा का PR नहीं मिला. इसके बाद सुनीलभाई की भतीजी को भी नौकरी से निकाल दिया गया. दोनों के सामने कनाडा में रहने और रोजगार का संकट खड़ा हो गया. परिवार ने इसके बाद दूसरे विकल्पों के जरिए नौकरी तलाशने की कोशिश शुरू की.
जब भाई-बहन ने दूसरी कंपनी में नौकरी के लिए संपर्क किया तो उन्हें अपने वीजा और वर्क परमिट की वास्तविक स्थिति के बारे में जानकारी मिली. तब पता चला कि उनके पास दो साल की अवधि वाला क्लोज्ड वर्क परमिट था. यानी यह ऐसा वर्क परमिट था जो किसी खास नियोक्ता से जुड़ा होता है और इसे सामान्य रूप से किसी भी कंपनी में नौकरी करने की खुली अनुमति के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
इस जानकारी के बाद परिवार का शक और गहरा गया. उन्होंने रवि सोलंकी से लगातार संपर्क करने की कोशिश की और कनाडा के PR तथा नौकरी से जुड़े सवाल पूछे. लेकिन आरोप है कि एजेंट ने मदद करने के बजाय गोलमोल जवाब देना शुरू कर दिया. इसके बाद परिवार को लगा कि उनके साथ शुरू से ही धोखाधड़ी की गई है.
परिवार ने जब पूरे मामले की पड़ताल शुरू की तो उन्हें एक और चौंकाने वाली जानकारी मिली. आरोप है कि रवि सोलंकी खुद अपने परिवार के साथ कनाडा जाने की तैयारी में था. परिवार को जब अपनी रकम और भविष्य दोनों खतरे में नजर आए तो उन्होंने पुलिस से शिकायत करने का फैसला किया. इसके बाद सुनीलभाई ने गांधीनगर के इन्फोसिटी पुलिस स्टेशन का रुख किया.
पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और अब पूरे मामले की जांच की जा रही है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने परिवार से कितनी रकम ली, क्लोज्ड वर्क परमिट किस प्रक्रिया से हासिल कराया गया और PR दिलाने के नाम पर किए गए दावों की वास्तविकता क्या थी. इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी एजेंट के जाल में फंसे हैं.
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 97.50 लाख रुपये लेने के बाद परिवार को कनाडा का PR क्यों नहीं मिला. पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें शुरुआत से PR का लालच दिया गया था, लेकिन बाद में केवल क्लोज्ड वर्क परमिट उपलब्ध कराया गया. इसके अलावा PR फाइल चालू रखने के नाम पर अतिरिक्त रकम भी ली जाती रही. फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल थे और रकम का इस्तेमाल कहां किया गया.
कनाडा भेजने और PR दिलाने के नाम पर हुई इस कथित धोखाधड़ी ने परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से बड़ा नुकसान पहुंचाया है. भाई-बहन को कनाडा में नौकरी और स्थायी भविष्य का सपना दिखाया गया था, लेकिन कुछ महीनों बाद उन्हें वापस भारत लौटना पड़ा. अब पीड़ित परिवार को पुलिस जांच से न्याय और अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद है.
ब्रिजेश दोशी