उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट में जलती चिता में शव के साथ वहशी हरकत वाला वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपी अघोरी काली उर्फ नंद गिरी को गिरफ्तार कर लिया था. अब पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि वो अघोरी काली पहले लड़का हुआ करता था. लेकिन उसने अपना जेंडर चेंज करा लिया था. उसकी वहशी हरकत के खिलाफ अघोरी अखाड़े के पीठाधीश्वर और राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़ेश्वरी अघोरी बाबा विष्णुनाथ ने एफआईआर दर्ज कराई थी.
अघोरी बाबा विष्णुनाथ ने काली उर्फ नंद गिरी काली के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि काली सनातन और अघोर परंपरा के नाम पर पाखंड फैला रही थी. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. पुलिस जांच पड़ताल के दौरान अघोरी काली की पहचान को लेकर भी कई बातें सामने आने का दावा किया गया है.
बाबा विष्णुनाथ के मुताबिक, काली का कथित असली नाम अल्लूरी श्रीनिवास है और वह पहले पुरुष थी. उनका कहना है कि बाद में उसने जेंडर चेंज करवाया और किन्नर अघोरी के तौर पर अपनी पहचान बनाई. सोशल मीडिया पर वह काली उर्फ काली नंद गिरी के नाम से सक्रिय थी और खुद को श्मशानवासी बताती थी. हालांकि, जेंडर चेंज से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि मेडिकल जांच के बाद ही हो सकेगी.
बाबा विष्णुनाथ ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि अघोरी काली का संबंध तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में किए गए कई अपराधों से रहा है. उन्होंने दावा किया कि उनके पास काली से जुड़े फोटो और वीडियो भी मौजूद हैं. उनका कहना है कि उन्होंने ही पुलिस में शिकायत दी थी और जांच के लिए काली से संबंधित कई दस्तावेज पुलिस को सौंपे हैं. हालांकि इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है और अभी पुलिस की ओर से इन सभी दावों की पुष्टि नहीं की गई है.
अघोरी काली पर एक युवती से शादी और तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर कथित तौर पर 10 लाख रुपये ठगने का भी आरोप लगाया गया है. शिकायत से जुड़े दावों के मुताबिक, युवती के साथ काली की तस्वीरें और वीडियो वर्ष 2025 में सामने आए थे. आरोप है कि इसी दौरान शादी और तंत्र विद्या से जुड़ी बातों के नाम पर पैसे लिए गए. पुलिस अब इन आरोपों और इससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है.
अघोरी काली उस समय चर्चा में आई जब उसने पिछले सप्ताह इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया था. वीडियो में वह उज्जैन के चक्रतीर्थ श्मशान घाट में जलती चिता के पास दिखाई दी. बाद में शव के साथ कथित अमानवीय हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद संत समाज में नाराजगी देखने को मिली. संतों ने इसे हिंदू धर्म और सनातन परंपरा का अपमान बताते हुए कार्रवाई की मांग की है.
विवाद बढ़ने के बाद अघोरी काली ने कथित तौर पर एक और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया. जिसमें आलोचना करने वालों को लेकर आपत्तिजनक और धमकी भरी बात कही गई थी. इसके बाद उज्जैन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया. जीवाजीगंज थाना पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की और पूछताछ के दौरान उसके बारे में कई जानकारियां जुटाई गईं. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
गिरफ्तारी के बाद अघोरी काली को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस की जांच अभी जारी है और अधिकारियों ने जांच में सामने आई सभी जानकारियों का विस्तृत खुलासा नहीं किया है. वहीं, काली की कथित पहचान और जेंडर चेंज से जुड़े दावों को लेकर मेडिकल जांच की बात सामने आई है. ऐसे में इन दावों की पुष्टि आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी.
अघोरी काली के जेंडर को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. बाबा विष्णुनाथ का कहना है कि काली पहले पुरुष था और बाद में उसने जेंडर चेंज कराया. हालांकि किसी व्यक्ति की जेंडर पहचान या मेडिकल स्थिति के बारे में केवल सोशल मीडिया दावों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. इस मामले में वास्तविक स्थिति मेडिकल जांच और संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से ही साफ होगी.
काली अघोरी सोशल मीडिया पर रील और वीडियो के जरिए भी सक्रिय बताई जाती है. उसके वीडियो और यूट्यूब कंटेंट को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा होती रही है. वायरल वीडियो के बाद उसकी पहचान और गतिविधियां अचानक सुर्खियों में आ गईं. अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि श्मशान से जुड़े वीडियो किस उद्देश्य से बनाए गए और उन्हें सोशल मीडिया पर किस तरह प्रसारित किया गया.
फिलहाल, अघोरी काली के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस की जांच जारी है. उस पर शव के साथ कथित अमानवीय हरकत, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो और अन्य आरोपों को लेकर कार्रवाई की गई है. वहीं, तेलंगाना-आंध्र प्रदेश में अपराध, 10 लाख रुपये की कथित ठगी और उसकी पहचान से जुड़े दावों की भी जांच की जा रही है. पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है.
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