कॉलेज कैंपस के बाद पंजाब की गैंगवार और फिर वहां से निकलकर कनाडा और अमेरिका तक नेटवर्क बनाने वाले गोल्डी बराड़ का नाम अब FBI की मोस्ट वॉन्टेड टॉप टेन लिस्ट में शामिल हो गया. गोल्ड़ी बराड़ का सबसे बड़ा सपोर्ट कनेक्शन है गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई. आरोप है कि गोल्डी बराड़ ने विदेश में बैठकर लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क को फैलाया और मजबूत किया. उसने वसूली, धमकी, शूटिंग और ड्रग्स से जुड़े अपराधों के लिए एक इंटरनेशनल सिंडिकेट खड़ा कर दिया. चलिए सिलसिलेवार जानते हैं गोल्ड़ी की कहानी.
ऐसे हुई थी दोस्ती
गोल्डी बराड़ और लॉरेंस बिश्नोई की दोस्ती की शुरुआत चंडीगढ़ में कॉलेज के दिनों में हुई थी. उपलब्ध पुलिस डोजियर और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक दोनों की मुलाकात करीब 2010 के आसपास पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में हुई थी. उस समय गोल्डी बराड़ पंजाब यूनिवर्सिटी के इवनिंग सेशन में पढ़ रहा था, जबकि लॉरेंस भी छात्र राजनीति और खेल गतिविधियों से जुड़ा हुआ था. दोनों की नजदीकी धीरे-धीरे बढ़ी और वे एक-दूसरे को 'भाई' कहकर बुलाने लगे.
लॉरेंस बिश्नोई उस दौर में पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संगठन (SOPU) की छात्र राजनीति से जुड़ा हुआ था. रिपोर्टों के मुताबिक गोल्डी बराड़ भी इसी दौर में उसके संपर्क में आया और दोनों के बीच राजनीतिक गतिविधियों के दौरान नजदीकी बढ़ी. इसके बाद यह दोस्ती सिर्फ कॉलेज कैंपस तक सीमित नहीं रही. दोनों के साथियों का दायरा बढ़ता गया और धीरे-धीरे यह समूह आपराधिक गतिविधियों की तरफ बढ़ने लगा.
साल 2011 में लॉरेंस और उसके कुछ साथियों के एक आपराधिक मामले में जेल जाने की घटना को भी उनकी जिंदगी का अहम मोड़ माना जाता है. इस बात का जिक्र उस दौर के शुरुआती आपराधिक मामलों के संदर्भ में मिलता है. आगे चलकर लॉरेंस जेल में रहने के बावजूद अपने नेटवर्क से संपर्क बनाए रखने में कामयाब रहा. अमेरिकी अभियोग के मुताबिक बाद के वर्षों में जेल के भीतर से भी वह कथित तौर पर मोबाइल फोन और VoIP उपकरणों के जरिए अपने नेटवर्क को निर्देश देता रहा.
2017 में कनाडा पहुंचा गोल्डी
गोल्डी बराड़ के अपराधी नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय विस्तार में कनाडा की भूमिका बेहद अहम रही. पंजाब पुलिस के मुताबिक बराड़ 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा गया था. कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी यानी CBSA की एक गोपनीय रिपोर्ट के मुताबिक वह थॉम्पसन रिवर्स यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए कनाडा पहुंचा था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वहां पहुंचने के बाद उसने बिश्नोई संगठन को कनाडा में विस्तार देने में भूमिका निभाई.
कनाडा पहुंचने के बाद बराड़ को लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क के लिए उत्तरी अमेरिका में महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जाने लगा. अमेरिकी अभियोग में उसे उत्तरी अमेरिकी लीडर बताया गया है. वहीं रोहित गोदारा को यूरोप का क्षेत्रीय नेता बताया गया. अमेरिकी जांच के अनुसार गोल्डी बराड़ और गोदारा बिश्नोई की ओर से नेटवर्क के सदस्यों और सहयोगियों की गतिविधियों को निर्देशित करने में भूमिका निभाते थे.
कनाडा में नेटवर्क का मॉडल कथित तौर पर सिर्फ पुराने गैंग सदस्यों पर निर्भर नहीं था. 2025 में तैयार CBSA की रणनीतिक गाइड में कहा गया कि संगठन ने स्टूडेंट वीजा और वर्क परमिट के जरिए कनाडा पहुंचे युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल किया. रिपोर्ट के मुताबिक इन लोगों का इस्तेमाल कथित तौर पर धमकी, वसूली, गोलीबारी और आगजनी जैसी गतिविधियों में किया जाता था. यानी स्थानीय स्तर पर मौजूद लोगों को इस्तेमाल करके नेटवर्क को जमीन पर सक्रिय रखा गया.
कैसे बना ट्रांसनेशनल सिंडिकेट?
अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ था. भारत में मौजूद नेतृत्व और विदेशों में मौजूद क्षेत्रीय नेताओं के बीच संपर्क के जरिए कथित तौर पर वसूली, धमकी, हत्या, ड्रग तस्करी और दूसरे अपराध संचालित किए जाते थे. पीड़ितों से WhatsApp और दूसरे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन के जरिए संपर्क किया जाता था. भुगतान नहीं करने पर हिंसा और हमले की धमकी देने के आरोप भी अमेरिकी अभियोग में दर्ज हैं.
अमेरिका के मुताबिक इस नेटवर्क ने भारत, अमेरिका और कनाडा समेत कई देशों में भारतीय मूल के लोगों और कारोबारी समुदाय को निशाना बनाया. अमेरिकी अभियोग में कहा गया है कि दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में लॉस एंजिल्स और थाउज़ेंड ओक्स के लोगों से कथित तौर पर 5 मिलियन डॉलर की मांग की गई. जांच में यह भी सामने आया कि नेटवर्क ने अपनी गतिविधियों के लिए ड्रग तस्करी का सहारा लिया. नवंबर 2024 में करीब 49 किलोग्राम कोकीन की एक खेप को अमेरिका से कनाडा भेजे जाने का आरोप है.
अमेरिकी अभियोग के मुताबिक मार्च 2024 से जुलाई 2025 के बीच लॉस एंजिल्स इलाके में इस नेटवर्क ने दूसरे ड्रग गिरोहों से करीब 520 किलोग्राम कोकीन चुराई. इसके अलावा हत्या, गोलीबारी, अपहरण, वसूली और हथियारों से जुड़े अपराधों के आरोप भी जांच में सामने आए. हालांकि इन सभी आरोपों का अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है और अमेरिकी न्याय विभाग ने साफ किया है कि अभियोग अपने आप में अपराध साबित होने का प्रमाण नहीं है.
कैसे FBI के रडार पर आया गोल्डी बराड़?
गोल्डी बराड़ के खिलाफ अमेरिका में कार्रवाई अचानक नहीं हुई. पहले भारत और कनाडा में उसके नेटवर्क को लेकर जांच चल रही थी, जबकि बाद में अमेरिकी एजेंसियों ने भी इसके अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पड़ताल शुरू की. जुलाई 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग ने ऑपरेशन हार्ड बॉल के तहत भारत से जुड़े तीन अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध समूह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का खुलासा किया. इसमें 37 लोगों के खिलाफ तीन अलग-अलग अभियोग खोले गए और 24 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई.
इसी जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग को लेकर अमेरिकी एजेंसियों ने कई गंभीर आरोप लगाए. अमेरिकी अभियोग में लॉरेंस बिश्नोई को भारत की जेल में रहते हुए एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क चलाने वाला बताया गया. गोल्डी बराड़ को उसका भरोसेमंद लेफ्टिनेंट और उत्तरी अमेरिकी नेता बताया गया. इसके बाद जुलाई 2026 में FBI ने बराड़ के बारे में सूचना देने पर 50 हजार डॉलर के इनाम की घोषणा की. यही वो दौर था, जब गोल्ड़ी बराड़ अमेरिकी जांच एजेंसियों के लिए सीधे तौर पर वांछित आरोपी बन गया.
FBI ने उठाया बड़ा कदम
28 सितंबर 2026 को FBI ने गोल्डी बराड़ यानी सतींदरजीत सिंह को अपनी मोस्ट वॉन्टेड टॉप टेन लिस्ट में शामिल कर दिया. FBI के मुताबिक वह इस लिस्ट में शामिल होने वाला 543वां व्यक्ति है. उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी देने पर इनाम अब 10 लाख डॉलर तक कर दिया गया है. FBI ने उसे हत्या, वसूली और ड्रग वितरण समेत कई संघीय अपराधों के मामलों में वांछित बताया है.
FBI के मुताबिक गोल्ड़ी बराड़ अमेरिका और कनाडा में रहने वाला लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कथित लीडर है. एजेंसी का आरोप है कि संगठन ने हत्या, गोलीबारी, अपहरण, वसूली और ड्रग तस्करी जैसी गतिविधियों के जरिए भारतीय और भारतीय मूल के समुदायों में डर का माहौल बनाया. FBI और अमेरिकी न्याय विभाग ने यह भी कहा है कि बराड़ और बिश्नोई के खिलाफ लगाए गए आरोप एक व्यापक, वर्षों से चल रही अंतरराष्ट्रीय जांच का हिस्सा हैं.
गौरतलब है कि FBI और अमेरिकी न्याय विभाग के दस्तावेजों में गोल्ड़ी बराड़ के खिलाफ आरोपों को मजह इल्जाम के तौर पर ही पेश किया गया है. इसलिए अमेरिकी अदालत में दोष सिद्ध होने तक इन्हें आरोप ही माना जाएगा. इसी तरह कनाडा और भारत से जुड़े अलग-अलग मामलों में भी आरोपों और अदालत के अंतिम फैसले के बीच अंतर रखना जरूरी है.
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या
जून 2023 में कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद गोल्डी बराड़ एक बार फिर चर्चा में आया था. उस समय वह भारत में वांटेड था और विदेश में रहकर अपने आपराधिक नेटवर्क को संचालित करने के आरोपों का सामना कर रहा था. इसी दौरान आज तक/इंडिया टुडे को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में गोल्डी बराड़ ने अपने खिलाफ लगे कई आरोपों और अपराध की दुनिया में अपने सफर को लेकर बात की थी. इस बातचीत में उसने सिद्धू मूसेवाला की हत्या को लेकर भी अपनी भूमिका और दावों पर खुलकर बात की थी.
आज तक/इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान गोल्डी बराड़ ने यह भी बताया था कि आखिर बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को उसके गैंग की तरफ से निशाना क्यों बनाया जा रहा है. उसने अपने क्रिमिनल नेटवर्क और सिंडिकेट के काम करने के तरीके को लेकर भी कई दावे किए थे. गोल्डी ने बताया था कि वह किस तरह अपराध की दुनिया में आया और कैसे धीरे-धीरे उसका नेटवर्क फैलता चला गया. इसके अलावा पाकिस्तान में मौजूद खालिस्तानी आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा के साथ अपने रिश्तों को लेकर भी उसने इंटरव्यू में अपना पक्ष रखा था.
इंटरव्यू में गोल्डी बराड़ ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से किसी भी तरह के संबंध होने के आरोपों से इनकार किया था. उसका दावा था कि उसका ISI से कोई लेना-देना नहीं है और अगर कभी उसका नाम सामने आएगा तो वह भारत के दुश्मनों को निशाना बनाने के संदर्भ में आएगा. हालांकि, ये सभी दावे गोल्डी बराड़ की ओर से दिए गए थे और इन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. उस समय वह भारत की जांच एजेंसियों के लिए वांटेड आरोपी था और उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामलों में जांच चल रही थी.
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