सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजार में जोरदार तेजी के बावजूद मंगलवार को भारतीय बाजार में गिरावट दर्ज की गई. कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंसेक्स 329.91 अंक यानी 0.44% गिरकर 74,529.08 के स्तर पर बंद हुआ. जबकि निफ्टी 50 करीब 85 अंक यानी 0.36% फिसलकर 23,329.00 पर आ गया.
दरअसल, मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत अच्छी रही थी. लेकिन धीरे-धीरे गिरावट बढ़ती गई और एक समय निफ्टी फिसलकर 23,285.75 तक पहुंच गई थी. निफ्टी की ओपनिंग 23,454.05 पर हुई थी, और कारोबार के दौरान 23,489 अंक तक का हाई लगाया.
ग्लोबल मार्केट से अच्छे संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार का अचानक मूड बदल जाने से निवेशक हैरान रह गए. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद 22 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखा गया. हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन आईटी, बैंकिंग और कंज्यूमर गुड्स शेयरों में बिकवाली के चलते बाजार लाल निशान पर बंद हुआ.
निवेशकों के 2 लाख करोड़ रुपये स्वाहा
निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स डे हाई से करीब 600 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 23300 के नीचे तक आ गया. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 गिरावट साथ बंद हुए, अधिकतर अहम सेक्टर के इंडेक्स मंगलवार को लाल रहे. ओवरऑल मंगलवार को बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक गिर गया. यानी निवेशकों के 2 लाख करोड़ रुपये डूब गए.
इस गिरावट के बीच भी कुछ शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई. जिसमें कोल इंडिया में करीब 3.2% की बढ़त, इंडिगो में 1.8% की तेजी, इटरनल में 1.8% की बढ़त और टाइटन के शेयरों में करीब 1 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई.
अगर टॉप लूजर्स की बात करें, तो फाइनेंशियल और कंज्यूमर शेयरों ने बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव बनाया. बजाज फिनसर्व में 1.4% की गिरावट, टाटा कंज्यूमर में 1.6% की गिरावट, ट्रेंट में 1.2% की गिरावट और बजाज फाइनेंस के शेयरों में 1.2% की देखने मिली.
बाजार में बड़ी गिरावट के कारण
आईटी (IT), बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और कैपिटल गुड्स सेक्टर में चौतरफा बिकवाली से इंडेक्स नीचे आया. लगातार चार सेशन में गिरावट से ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इसके बावजूद बाजार नहीं संभल पाया.
अगर बाजार में गिरावट की वजह देखें तो विदेशी निवेशकों की निकासी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर मार्केट सेंटीमेंट पर बना हुआ है. इसके अलावा महंगाई और इंपोर्ट-कॉस्ट से जुड़ी चिंताएं भी बनी हुई हैं.
(नोट: शेयर बाजार में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें)
आजतक बिजनेस डेस्क