भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में कोहराम मचा है. हर रोज करोड़ों डूब रहे हैं. गिरावट का सिलसिला पिछले करीब दो साल से चल रहा है. पिछले दो वर्षों से शेयर बाजार में पैसे लगाने वाले अधिकतर निवेशक अपनी पूंजी गंवाने के कगार पर खड़े हैं.
टेक्निकल तौर निफ्टी (Nifty) के लिए 22,800 अंक एक मजबूत सपोर्ट है, जहां इंडेक्स गिरकर पहुंच गया है. अब अगर यहां से बाजार और गिरता है तो फिर स्थिति बिगड़ सकती है. सोमवार को निफ्टी 300 से ज्यादा अंक गिरकर 22,807 पर पहुंच गया है. निफ्टी का यही लेवल मई-2024 में भी था. यानी करीब 28 महीने से बाजार एक दायरे में सिमटा है.
निफ्टी अपने ऑल टाइम हाई से करीब 15 फीसदी फिसल चुका है. निफ्टी इसी साल जनवरी में चढ़कर 26,373.20 अंक तक पहुंचा था, जहां से लुढ़कर अब 22800 तक पहुंच चुका है. वहीं सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा गिरकर 73000 से नीचे फिसल चुका है.
दरअसल, लगातार गिरावट से अब निवेशकों का धैर्य जवाब देने लगा है. इक्विटी मार्केट में पैसे लगाने वाले हर निवेशक परेशान हैं. चाहे वो डायरेक्ट स्टॉक्स में पैसे लगा रहे हैं, या म्यूचूअल फंड और ETF में. सबके मन सवाल है कि इस बाजार का क्या होगा?
एक रिपोर्ट में हिल गया भारतीय बाजार
वैसे तो कहा जा रहा है कि बाजार में गिरावट के वैश्विक कारण हैं. लेकिन सोमवार को भारतीय बाजार में गिरावट के सबसे बड़े कारण अपने देश की एक रिपोर्ट है. जिसने अचानक बाजार का माहौल खराब कर दिया है.
दरअसल महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की 358 में से 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है, जिससे राज्य का लगभग 74% हिस्सा प्रभावित क्षेत्र के दायरे में आ गया है. मानसून के दौरान 21 दिनों से अधिक बारिश न होने (ट्रिगर-1 मानदंड) और खरीफ फसलों के भारी नुकसान को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
महाराष्ट्र में सूखाग्रस्त घोषित होने से सोयाबीन की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसके अलावा राज्य में अरहर, मूंग, उड़द, गन्ना, प्याज, हरी मिर्च, टमाटर और कपास की पैदावार सबसे ज्यादा होती हैं. सूखे के दौरान हरा चारा और पानी की भारी किल्लत हो सकती है, जिससे मवेशियों के लिए चारा महंगा होने का डर है.
इससे पहले वैश्विक कारणों से बाजार पर दबाव था...
1. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज संकट
अमेरिका और ईरान के बीच जियोपॉलिटिकल तनाव काफी बढ़ गया है. अमेरिकी प्रशासन द्वारा ईरान के प्रस्तावों को खारिज करने और पश्चिम एशिया में जारी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन के बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय बाजार का मूड भी बिगड़ा है.
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज से तेल सप्लाई रुकने की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक तेजी आ गई है. कीमत बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल से आगे निकल गई है. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए क्रूड की बढ़ती कीमतें महंगाई और ट्रेड डेफिसिट की चिंता बढ़ा देती हैं.
3. FIIs की तेज बिकवाली
वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और यूएस बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार अपना पैसा निकालकर सुरक्षित एसेट्स में शिफ्ट कर रहे हैं.
4. यूएस फेड की ब्याज दरों और ग्लोबल मार्केट के संकेत
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और महंगाई को लेकर सख्त रुख के कारण ग्लोबल बाजारों में कमजोरी देखी जा रही है. इसके चलते बैंकिंग, ऑटो और स्मॉल/मिडकैप जैसे प्रमुख घरेलू सेक्टर्स में भारी बिकवाली देखने को मिली है, जिससे इंडिया VIX (वोलाटिलिटी इंडेक्स) में भी करीब 14 फीसदी का बड़ा उछाल आया है.
(नोट: शेयर बाजार में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें)
अमित कुमार दुबे