छुट्टा नहीं है, बदले में थमाते थे टॉफी... अब UPI की वजह से धंधा मंदा, संकट में कैंडी इंडस्ट्रीज!

कोरोना महामारी के दौरान यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ा और इसके साथ ही कैंडीज का कारोबार प्रभावित होना शुरू हो गया. क्रेड और डंजो में ग्रोथ लीडर साथ ही ग्रोथएक्स के संस्थापक अभिषेक पाटिल ने कहा कि यूपीआई के आने के बाद छुट्टे की गुंजाइश नहीं बची है.

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टॉफी की बिक्री में आई गिरावट. टॉफी की बिक्री में आई गिरावट.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2022,
  • अपडेटेड 2:26 PM IST

यूपीआई (UPI) ने हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल को बेहद आसान बना दिया है. दुकान पर सामान खरीदने के बाद अब छुट्टे (Chutta) पैसे लेने और देने दोनों का ही झंझट ही खत्म हो गया है. लेकिन क्या आपको याद है कि एक या दो रुपये छुट्टे नहीं होने पर दुकानदार आपके हाथों टॉफी थमा देता था. एक समय ऐसा था कि दुकानों पर एक-दो रुपये के छुट्टे का मतलब ही कैंडी हो गया था. लेकिन यूपीआई ने आकर छुट्टे और कैंडी की आदला-बदली के कारोबार प्रभावित किया है.  

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कोरोना महामारी का असर

कोरोना महामारी के दौरान यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ा और इसके साथ ही कैंडीज का कारोबार प्रभावित होना शुरू हो गया. क्रेड और डंजो में ग्रोथ लीडर साथ ही ग्रोथएक्स के संस्थापक अभिषेक पाटिल ने कहा कि यूपीआई के साथ छुट्टे की गुंजाइश नहीं बची है. पाटिल ने सोशल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन पर एक पोस्ट में यूपीआई और कैंडी के बिजनेस (Candy Business) को लेकर कुछ आंकड़ों के जरिए अपनी बात कही.

2020 में दर्ज की गई गिरावट

उन्होंने कहा कि साल 2010 में मोंडेलेज, नेस्ले, पार्ले, आईटीसी, मार्स सहित सभी बड़ी कैंडी बनाने वाली कंपनियों ने चौंका देने वाला मुनाफा दर्ज किया था. अब अगर 2020 की बात करें, तो इनमें से अधिकतर ब्रांड्स के टॉफियों की बिक्री में भारी गिरावट देखने को मिली है.

खत्म होने वाली है ये स्कीम

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कैंडी की बिक्री में आई गिरावट के एक नहीं कई कारण हैं. उनमें से एक छुट्टे के रूप में कैंडी का मिलना अब बंद हो जाना भी है. महामारी के अंत होने के साथ-साथ ये 'छुट्टे के रूप में कैंडी' वाली स्कीम भी खत्म होने की कगार पर पहुंच गई. पाटिल कहते हैं कि UPI के आने से पहले दुकानदार छुट्टे की जगह टॉफी थमा देते थे. इस तरह से भी टॉफी का कारोबार चलता था.

एक या दो रुपये के छुट्टे की जगह टॉफी देने के साथ शुरू हुआ ये चलन बाद के दिनों में बड़ी रकम में तब्दील हो गया था. लेकिन यूपीआई के आने के साथ ही यह सब बंद हो गया. लोग अपनी खरीदारी के हिसाब से ही ऑनलाइन पेमेंट करने लगे. इस वजह से टॉफी हर दिन टॉफी की बिक्री में गिरावट आ रही है.
 

 

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