वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की कई बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों की बुकिंग में गिरावट दर्ज की गई है. इस दौरान DLF की बिक्री 94 फीसदी तक लुढ़क गई, जबकि प्रेस्टीज एस्टेट्स की बुकिंग में 46 फीसदी की कमी आई. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये गिरावट घरों की मांग कमजोर होने की वजह से नहीं, नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और मंजूरी में देरी की वजह से हुई है.
विश्लेषकों के मुताबिक, पहली तिमाही में लिस्टेड रियल एस्टेट डेवलपर्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है. नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत और अप्रूवल मिलने में देरी का असर बिक्री के आंकड़ों पर भी साफ नजर आया है. हालांकि जिन प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग हुई, उन्हें खरीदारों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. ऐसे में बाजार में मांग कमजोर होने के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं. जानकारों का मानना है कि ये सुस्ती मांग में गिरावट की नहीं प्रोजेक्ट लॉन्च के टाइमिंग में देरी की कहानी है.
गोदरेज सबसे आगे, DLF को सबसे बड़ा झटका
पहली तिमाही में अलग-अलग डेवलपर्स के प्रदर्शन को देखें तो गोदरेज प्रॉपर्टीज ने 8,651 करोड़ रुपये की बुकिंग दर्ज की, जो सालाना आधार पर 22 फीसदी ज्यादा है. वहीं लोढ़ा ने 4,629 करोड़ रुपये की बुकिंग हासिल की, जो पिछले साल के मुकाबले 4 फीसदी अधिक रही. प्रेस्टीज एस्टेट्स की बिक्री 46 फीसदी घटकर 6,579 करोड़ रुपये रह गई. जबकि ओबेरॉय रियल्टी की बुकिंग 35.9 फीसदी घटकर 1,049.88 करोड़ रुपये पर आ गई. उधर DLF को सबसे बड़ा झटका लगा है, क्योंकि कंपनी की बुकिंग 94.24 फीसदी गिरकर सिर्फ 657 करोड़ रुपये रह गई. विश्लेषकों के मुताबिक DLF में गिरावट की मुख्य वजह तिमाही के दौरान किसी बड़े नए प्रोजेक्ट का लॉन्च न होना रहा.
तिमाही आधार पर भी कमजोर रहे आंकड़े
रियल एस्टेट सेक्टर में आमतौर पर चौथी तिमाही में ज्यादा लॉन्चिंग और बिक्री होती है. इसी वजह से पहली तिमाही अपेक्षाकृत कमजोर रहती है. एनालिस्ट्स के मुताबिक टॉप डेवलपर्स की बुकिंग सालाना आधार पर 24 फीसदी और तिमाही आधार पर 26 फीसदी घटी है. हालांकि उनकी आय में करीब 13 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो मजबूत क्रियान्वयन और भुगतान अनुशासन को दर्शाती है.
लागत बढ़ी, लेकिन मार्जिन पर बड़ा दबाव नहीं
पश्चिम एशिया संकट के चलते अप्रैल और मई के दौरान एल्युमीनियम, कंक्रीट, टाइल्स, मार्बल और दूसरे ऊर्जा-आधारित निर्माण सामग्री की लागत पर दबाव देखने को मिला. हालांकि जून से सप्लाई सामान्य होने लगी और लागत का दबाव भी कम हुआ. जानकारों का कहना है कि डेवलपर्स की कमाई पर बुकिंग से ज्यादा असर प्रोजेक्ट डिलीवरी और प्रोजेक्ट मिक्स का पड़ता है. फिलहाल कंपनियों ने अपने प्रोजेक्ट मार्जिन पर किसी बड़े दबाव का संकेत नहीं दिया है.
खरीदारों के लिए क्या मतलब?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा आंकड़े रियल एस्टेट बाजार में मांग घटने की कहानी नहीं बताते. बिक्री में आई नरमी मुख्य रूप से नए प्रोजेक्ट्स की सीमित लॉन्चिंग और मंजूरी में देरी का नतीजा है. ऐसे में जिन शहरों में नए प्रोजेक्ट लॉन्च होंगे, वहां मांग मजबूत बने रहने की उम्मीद है.
आदित्य के. राणा