एक टैप में पेमेंट, शॉपिंग और AI... एक्सपर्ट ने बताया कितनी सेफ है Gen Z की डिजिटल पहचान?

जेन जी पूरी दुनिया को अपने फोन में लेकर चलते हैं. किसी को पेमेंट करना हो, किसी से बात करना हो, अपने दिल की बात कहनी हो या फिर कोई सॉल्यूशन निकालना हो. लेकिन सिर्फ वन टैप वाली ये लाइफस्टाइल कितनी सेफ है, एक्सपर्ट ने इसपर अपनी राय रखी है.

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Gen Z का लाइफस्टाइल पूरी तरह से मोबाइल पर शिफ्ट हो चुका है. (AI Generated Image) Gen Z का लाइफस्टाइल पूरी तरह से मोबाइल पर शिफ्ट हो चुका है. (AI Generated Image)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:36 AM IST

जेन ज़ी के लिए दुनिया अब एक टैप दूर है. सुबह फोन पर सोशल मीडिया देखने से लेकर दोस्तों को पैसे भेजने, ऑनलाइन खरीदारी करने और एआई टूल से काम आसान बनाने तक, हर काम कुछ सेकेंड में हो जाता है. डिजिटल प्लेटफॉर्म ने जिंदगी आसान बनाई है, लेकिन लोगों को अपनी निजी जानकारी साझा करने का आदी भी बना दिया है.

ऐसे में सवाल उठता है कि फोन नंबर, ईमेल, बैंकिंग जानकारी, लोकेशन और दूसरी निजी जानकारियों से बनी डिजिटल पहचान कितनी सुरक्षित है. सुविधा के इस दौर में साइबर ठगी और पहचान की चोरी का खतरा बढ़ रहा है. इससे बचाव की जिम्मेदारी जानकारी जुटाने वाली कंपनियों के साथ यूजर्स की भी है.

एक क्लिक की सुविधा, लेकिन खतरे कई
किसी नए ऐप पर अकाउंट बनाने या ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए यूजर्स को अक्सर अपना मोबाइल नंबर, ईमेल, नाम, पता और दूसरी निजी जानकारियां देनी पड़ती हैं. कई लोग बिना शर्तें पढ़े ही सहमत होने वाले विकल्प पर क्लिक कर देते हैं. अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक जैसी जानकारी साझा करने से उनकी डिजिटल पहचान का बड़ा हिस्सा कई कंपनियों और सेवाओं तक पहुंच जाता है.

यही जानकारी साइबर अपराधियों के निशाने पर आ सकती है. फिशिंग लिंक, फर्जी वेबसाइट, नकली कस्टमर केयर नंबर, ओटीपी फ्रॉड और सोशल मीडिया अकाउंट हैक करने जैसे तरीकों से लोगों को निशाना बनाया जाता है. कई मामलों में अपराधी किसी व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी अकाउंट बनाते हैं या उसके नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी की कोशिश करते हैं.

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एआई ने बढ़ाई साइबर ठगी की चुनौती
साइबर अपराध का तरीका भी बदल रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने डिजिटल सेवाओं को बेहतर बनाया है, लेकिन इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी के नए और जटिल तरीकों में भी होने लगा है. डीपफेक वीडियो, नकली आवाज, फर्जी डिजिटल पहचान और पहचान से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर जैसी तकनीकों ने असली और नकली के बीच अंतर करना मुश्किल बना दिया है.

अब किसी परिचित की आवाज में फोन करके पैसे मांगना या किसी व्यक्ति के चेहरे का इस्तेमाल कर नकली वीडियो तैयार करना पहले के मुकाबले आसान हो गया है. ऐसे में डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिए सिर्फ पासवर्ड या ओटीपी पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है.

सिर्फ यूजर नहीं, कंपनियों की भी जिम्मेदारी
लेक्सिस नेक्सिस रिस्क सॉल्यूशंस के निदेशक, वित्तीय अपराध, रोहित मित्तल के मुताबिक, डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता सुविधा चाहते हैं. इसके लिए वे अपनी निजी जानकारी साझा करने से भी नहीं हिचकते. ऐसे में इस जानकारी को जुटाने और संभालने वाले सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है.

रोहित मित्तल कहते हैं, "आज के डिजिटल उपभोक्ता सुविधा की अपेक्षा रखते हैं और सेवाओं तक शीघ्र पहुंचने के लिए अपनी व्यक्तिगत जानकारी और पहचान संबंधी विवरण साझा करने के लिए तैयार रहते हैं. ऐसे में, इस जानकारी को एकत्र और प्रबंधित करने वाले सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी है कि वे इसे सुरक्षित रखें और उपभोक्ताओं के विश्वास से कोई समझौता न होने दें".

उनके मुताबिक, धोखेबाज डीपफेक, कृत्रिम पहचान और पहचान से जुड़े दस्तावेजों में हेरफेर जैसी जटिल धोखाधड़ी के लिए जनरेटिव एआई का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं. इसलिए कंपनियों को सिर्फ किसी एक जानकारी या पहचान जांचने के एक तरीके पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.

डिजिटल सुरक्षा के लिए क्या जरूरी है
एक्सपर्ट के मुताबिक, किसी यूजर की पहचान और धोखाधड़ी के जोखिम को समझने के लिए उसकी पूरी डिजिटल गतिविधि से जुड़े अलग-अलग संकेतों का आकलन जरूरी है. इसमें लेन-देन का संदर्भ, डिजिटल पहचान से जुड़ी जानकारी, डिवाइस की जानकारी और यूजर का व्यवहार शामिल है.

यह जांच सिर्फ अकाउंट बनाते समय नहीं, बल्कि लॉग-इन, पेमेंट और अकाउंट की जानकारी अपडेट करने जैसे हर चरण में होनी चाहिए. संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर अतिरिक्त जांच की जा सकती है. वहीं, वास्तविक ग्राहकों को बार-बार गैरजरूरी प्रक्रियाओं से गुजरने से बचाया जा सकता है.

डिजिटल सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ कंपनियों की नहीं है. यूजर्स को भी मजबूत पासवर्ड रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाने, अनजान लिंक से बचने और ऐप्स को गैरजरूरी अनुमति नहीं देने जैसी सावधानियां बरतनी होंगी.

डिजिटल दुनिया में तेज और आसान सेवाएं जरूरी हैं, लेकिन उनके साथ सुरक्षा भी उतनी ही अहम है. जेन ज़ी के लिए चुनौती सिर्फ नई तकनीक अपनाने की नहीं, बल्कि अपनी डिजिटल पहचान सुरक्षित रखते हुए उसका समझदारी से इस्तेमाल करने की भी है.

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