'Salary Credited...', बहुत कम मैसेज ऐसे होते हैं जो इतनी खुशी देते हैं. कई युवा प्रोफेशनल्स के लिए, पहली सैलरी एक अहम पड़ाव होती है. एक ऐसा मौका जो आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़े होने का एहसास लेकर आता है. लेकिन युवाओं के लिए उनकी पहली सैलरी एक और सफर की शुरुआत भी हो सकती है... अपना फाइनेंशियल फ्यूचर सिक्योर करने के सफर की शुरुआत. अब आपके मन में सवाल उठ रहे होंगे कि पहला इन्वेस्टमेंट कहां करना सही होगा: बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (Bank FD), रिकरिंग डिपॉजिट (RD), सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) या कुछ और?
पहली सैलरी अक्सर युवाओं के लिए आर्थिक आजादी का पहला अनुभव होती है. ऐसे में शॉपिंग या लाइफस्टाइल पर पूरा पैसा खर्च करने के बजाय शुरुआत से ही बचत और निवेश की आदत बनाना लंबे समय में फायदेमंद हो सकता है. पहली सैलरी मिलते ही ₹500 या ₹1,000 की SIP शुरू करना निवेश की आदत बनाने का अच्छा तरीका हो सकता है. लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेश शुरू करने से पहले 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड तैयार करना प्राथमिकता होनी चाहिए. पहली इन्वेस्टमेंट के लिए कोई एक फॉर्मूला सभी पर लागू नहीं होता.
SalarySe के को-फाउंडर सौमीत नंदा कहते हैं, 'यह फैसला फाइनेंशियल गोल, कैश फ्लो, पैसे की जरूरत, इन्वेस्टमेंट टेन्योर और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए.' इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trackk के को-फाउंडर और सीईओ वेदांत गुप्ते के मुताबिक, 'इन्वेस्टमेंट का फैसला सिर्फ संभावित रिटर्न देखकर नहीं करना चाहिए. आपकी मौजूदा वित्तीय स्थिति, भविष्य के लक्ष्य, पैसे की जरूरत और मार्केट रिस्क लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. दोस्तों की सलाह या सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड के आधार पर फैसला लेने से बचना चाहिए.'
सबसे पहले बनाएं सेफ्टी नेट
अगर आपकी बचत अभी शून्य है, तो सीधे FD, RD या SIP में से किसी एक को चुनना जरूरी नहीं है. सबसे पहले एक लिक्विड इमरजेंसी फंड तैयार करना चाहिए. सौमीत नंदा के मुताबिक, कम से कम 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड रखना चाहिए. इसे कम जोखिम वाले और आसानी से निकाले जा सकने वाले विकल्पों में रखना बेहतर होता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इमरजेंसी फंड पूरी तरह तैयार होने तक इन्वेस्टमेंट टाल दिया जाए. ₹500 या ₹1,000 की छोटी SIP साथ में शुरू की जा सकती है, ताकि पैसे बचाने की आदत और अनुशासन बना रहे.
फिक्स्ड डिपॉजिट कब चुनें?
अगर आपके पास एकमुश्त रकम है और आप बिना मार्केट रिस्क के अपेक्षाकृत निश्चित रिटर्न चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) उपयोगी विकल्प हो सकता है. इमरजेंसी सेविंग या नजदीकी जरूरतों के लिए भी FD का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, FD चुनते समय सिर्फ ब्याज दर देखना पर्याप्त नहीं है. टैक्स और महंगाई को ध्यान में रखने के बाद वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है.
मंथली सेविंग्स के लिए RD
अगर आपके पास एकमुश्त रकम नहीं है, लेकिन हर महीने एक निश्चित राशि बचा सकते हैं, तो रिकरिंग डिपॉजिट (RD) एक विकल्प हो सकता है. Gera वेल्थ प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर पंकज कुमार गेरा के मुताबिक, लैपटॉप, व्हीकल या अगले कुछ महीनों में बनने वाले इमरजेंसी फंड जैसे छोटे लक्ष्यों के लिए RD उपयोगी हो सकती है. वेदांत गुप्ते भी RD को निश्चित रिटर्न वाला मंथली सेविंग्स विकल्प मानते हैं. कोर्स फीस, गैजेट या शादी जैसे छोटे और तय समय वाले लक्ष्यों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. वहीं, करीब 18 महीने से ज्यादा लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए SIP पर विचार किया जा सकता है.
लंबी अवधि के लिए SIP
अगर आपका लक्ष्य लंबे समय में वेल्थ क्रिएट करना है, तो SIP की भूमिका अलग हो जाती है. SIP के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता है और इसका रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए यह गारंटीड नहीं होता. हालांकि, लंबी अवधि में इक्विटी आधारित निवेश में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है. वेदांत गुप्ते के मुताबिक, केवल FD पर निर्भर रहने से महंगाई, टैक्स और लंबी अवधि में पैसा बढ़ाने की क्षमता के बीच समझौता करना पड़ सकता है.
पहले बचत... फिर खर्च
पहली नौकरी करने वाले युवा प्रोफेशनल्स के लिए सैलरी आते ही बचत या निवेश की रकम अलग कर देना एक आसान रणनीति हो सकती है. इसके लिए 50:30:20 नियम शुरुआती फ्रेमवर्क की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. इस फॉर्मूले में करीब 50 फीसदी रकम जरूरी खर्च, 30 फीसदी लाइफस्टाइल और 20 फीसदी बचत व निवेश के लिए रखी जाती है. हालांकि, पंकज कुमार गेरा के मुताबिक, कम जिम्मेदारियों वाले युवा 30 से 40 फीसदी तक आय निवेश के लिए अलग रखने का लक्ष्य बना सकते हैं. शुरुआत में ₹500 या ₹1,000 की SIP भी पर्याप्त हो सकती है. रकम छोटी होने के बावजूद यह नियमित निवेश और मार्केट के उतार-चढ़ाव के दौरान अनुशासन बनाए रखने की आदत विकसित कर सकती है.
पहली नौकरी में इन गलतियों से बचें
इन्वेस्टमेंट में सबसे बड़ी गलतियां हमेशा शेयर मार्केट के गिरने से नहीं होतीं. कई बार देर से शुरुआत करना, हर सैलरी बढ़ोतरी के साथ लाइफस्टाइल का खर्च बढ़ाना, इमरजेंसी फंड को नजरअंदाज करना और महंगे इंश्योरेंस-कम-इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स लेना ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है. पंकज कुमार गेरा के मुताबिक, कम उम्र में सबसे बड़ा जोखिम सिर्फ पैसा खोना नहीं, बल्कि उसे लंबे समय तक बढ़ने का मौका न देना है.
वहीं, सौमीत नंदा का सुझाव है कि शुरुआती निवेशकों को सिर्फ ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने के बजाय मजबूत वित्तीय आदतें बनाने पर ध्यान देना चाहिए. पहली सैलरी से निवेश की शुरुआत कितनी रकम से होती है, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना नियमित निवेश की आदत बनाना. समय के साथ आय बढ़ने पर SIP की रकम भी बढ़ाई जा सकती है. यही अनुशासन लंबे समय में वेल्थ क्रिएशन की मजबूत नींव बन सकता है.
आजतक बिजनेस डेस्क