इनकम टैक्स विभाग ने करीब ₹8,500 करोड़ के ऐसे जमीन और प्रॉपर्टी सौदों की पहचान की है, जिनमें कथित तौर पर लेनदेन की जानकारी नहीं दी गई, संपत्ति की कीमत कम बताई गई या बेनामी स्वामित्व का शक है. मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, विभाग अब इन सौदों की गहन जांच कर रहा है.
इन लेनदेन में बड़े पैमाने पर जमीन की खरीद, कृषि भूमि, फार्महाउस और अन्य महंगी संपत्तियां शामिल हैं. विभाग की नजर वित्त वर्ष 2024-25 में पूरे हुए उन सौदों पर भी है, जिन्हें वित्त वर्ष 2025-26 के रिटर्न में रिपोर्ट किया गया है. इसके अलावा मौजूदा फाइलिंग साइकिल में सामने आ रहे लेनदेन की भी जांच की जा रही है.
पहचाने गए करीब ₹8,500 करोड़ के लेनदेन में से लगभग ₹2,000 करोड़ के सौदों में बेनामी व्यवस्था का संदेह है. अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जिस व्यक्ति के नाम पर संपत्ति खरीदी या दर्ज की गई है, क्या उसी व्यक्ति ने वास्तव में इसके लिए पैसा भी लगाया है और संपत्ति का वास्तविक लाभार्थी भी वही है.
Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक विभाग पहले मौजूदा और पिछले वित्त वर्ष के मामलों से शुरुआत करेगा और इसके बाद पुराने वर्षों के लेनदेन की भी जांच की जाएगी. कई मामलों में लेनदेन में इस्तेमाल किए गए PAN के पीछे इतनी आय नहीं दिखी, जिससे उस संपत्ति की खरीद को सही ठहराया जा सके.
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इनकम टैक्स विभाग ने अपने फील्ड अधिकारियों को जमीन और प्रॉपर्टी की खरीद, बिक्री और ट्रांसफर में इस्तेमाल किए गए PAN का मिलान संबंधित व्यक्ति के इनकम टैक्स रिटर्न में इस्तेमाल PAN से करने को कहा है, इसके साथ ही अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि टैक्स रिटर्न में बताई गई निवेश राशि और खरीदी गई संपत्ति की वास्तविक कीमत के बीच कोई बड़ा अंतर तो नहीं है.
यह जांच खासतौर पर संदिग्ध बेनामी लेनदेन के मामलों में महत्वपूर्ण है, किसी संपत्ति को कागजों पर किसी व्यक्ति के नाम पर दर्ज किया जा सकता है, जबकि उसके लिए पैसा किसी दूसरे व्यक्ति ने दिया हो, ऐसी स्थिति में असली लाभार्थी तत्काल स्वामित्व रिकॉर्ड में नजर नहीं आता.
संपत्ति की कीमत कम बताने पर भी नजर
विभाग सिर्फ बेनामी संपत्तियों पर ही ध्यान नहीं दे रहा है. प्रॉपर्टी की कीमत कम दिखाने और वास्तविक भुगतान से कम रकम रिकॉर्ड में दर्ज करने वाले मामलों की भी जांच की जा रही है. प्रॉपर्टी सौदों में छिपाए गए नकद भुगतान भी विभाग के रडार पर हैं. अधिकारियों का कहना है कि जब लेनदेन की कीमत, PAN और टैक्स रिटर्न से जुड़ी जानकारी को एक साथ देखा जाता है, तो यह पता लगाना आसान हो जाता है कि पैसे का ट्रेल और संपत्ति का मालिकाना हक आपस में मेल खा रहे हैं या नहीं. ऐसे मामलों में विभाग की ओर से कई ई-मेल के जरिए टैक्सपेयर्स को सूचना भी भेजी गई है.
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सर्च और सर्वे से आगे बढ़ रहा टैक्स विभाग
यह पूरी कवायद इनकम टैक्स विभाग की एनफोर्समेंट रणनीति में बदलाव को भी दिखाती है. अब विभाग सिर्फ सर्च और सर्वे पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग लेनदेन से मिले डेटा का इस्तेमाल करके संदिग्ध मामलों की पहचान कर रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले डेटा को एक साथ जोड़ने और पिछले दो वर्षों में बैंकों तथा डाकघरों समेत रिपोर्टिंग संस्थाओं की ओर से बढ़ी जानकारी साझा करने से टैक्स चोरी पर कार्रवाई करना आसान हुआ है.
क्या है NUDGE कैंपेन?
इनकम टैक्स विभाग पहले से ही NUDGE कैंपेन चला रहा है. इसके तहत टैक्सपेयर्स को उनके रिटर्न और विभाग के पास उपलब्ध जानकारी के बीच किसी खास गड़बड़ी या अंतर के बारे में अलर्ट किया जाता है. उन्हें अपना रिटर्न सुधारने और जरूरी जानकारी घोषित करने का मौका दिया जाता है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने हाल में इसी मॉडल का इस्तेमाल विदेशों में छिपाई गई संपत्तियों और आय का पता लगाने के लिए किया था.
CBDT के मुताबिक, इस अभियान के पहले चरण के बाद 24,678 टैक्सपेयर्स ने अपने रिटर्न संशोधित किए, इसके परिणामस्वरूप ₹29,208 करोड़ की विदेशी संपत्तियां और ₹1,089.88 करोड़ की विदेशी आय घोषित की गई. अब जमीन और प्रॉपर्टी के बड़े सौदों पर बढ़ती निगरानी से साफ है कि इनकम टैक्स विभाग डेटा मिलान के जरिए टैक्स चोरी और बेनामी लेनदेन पर शिकंजा कसने की तैयारी में है.
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