गुरुग्राम का ऑफिस मार्केट अब एक नए दौर में कदम रख रहा है, जहां सिर्फ इमारतों की संख्या ही नहीं बल्कि उनकी बेहतरीन क्वालिटी भी मायने रख रही है. शहर में कुल बने हुए ऑफिसों का दायरा 10 करोड़ स्क्वायर फीट को पार कर चुका है, इसमें पर्यावरण के अनुकूल बड़े संस्थानों के मालिकाना हक वाले और टॉप-क्वालिटी ऑफिस स्पेस की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ रही है. यही वजह है कि गुरुग्राम देश के सबसे पसंदीदा और प्रमुख बिजनेस हब के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहा है.
सीबीआरई (CBRE) रिसर्च की नई रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम 1980 के दशक की शुरुआत में एक औद्योगिक सैटेलाइट टाउन से विकसित होकर आज भारत के सबसे बड़े व्यावसायिक और आवासीय केंद्रों में से एक बन गया है. आज, यहां डीएलएफ साइबर सिटी, गोल्फ कोर्स रोड, एमजी रोड और एक्सटेंडेड गोल्फ कोर्स रोड जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में फॉर्च्यून 500 कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और आईटी/आईटीईएस फर्मों का एक बड़ा केंद्र है.
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बड़ी कंपनियां कर रही हैं निवेश
2021 से 2026 की पहली तिमाही के बीच, शहर में लगभग 2.1 करोड़ (21 मिलियन) वर्ग फीट नई ऑफिस आपूर्ति जुड़ी, जबकि इसी अवधि के दौरान लगभग 4 करोड़ (40 मिलियन) वर्ग फीट जगह लीज पर ली गई. बहुराष्ट्रीय कंपनियों की निरंतर मांग को रेखांकित करते हुए, केवल अंतरराष्ट्रीय किरायेदारों की ही इस लीजिंग गतिविधि में लगभग 1.7 करोड़ (1.7 million) वर्ग फीट की हिस्सेदारी रही.
यह रिपोर्ट गुरुग्राम के व्यावसायिक परिदृश्य को आकार देने वाले नए रुझानों की ओर इशारा करती है. बड़ी कंपनियां तेजी से कैंपस-शैली की ऑफिस परियोजनाएं विकसित कर रही हैं, जिसमें अमेरिकन एक्सप्रेस और इंटरग्लोब एविएशन जैसी कंपनियां बड़े कॉर्पोरेट कैंपस स्थापित कर रही हैं. वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विदेशी विश्वविद्यालय ग्रेड-ए टेक्नोलॉजी पार्कों के भीतर अपने कैंपस स्थापित कर रहे हैं.
एक अन्य उभरता हुआ रुझान डेवलपमेंट मैनेजमेंट एग्रीमेंट (DMA) मॉडल को अपनाना है, जो डेवलपर्स को भूमि का स्वामित्व हस्तांतरित किए बिना संस्थागत-गुणवत्ता वाली ऑफिस परियोजनाएं बनाने की अनुमति देता है. HQ 27 और पायनियर वन जैसी ऑफिस परियोजनाओं को इसी मॉडल के माध्यम से तैयार किया गया है, जो बदलती निवेश और विकास रणनीतियों को दर्शाता है.
हरियाणा के विकास पथ पर टिप्पणी करते हुए, CBRE के अध्यक्ष एवं सीईओ (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका) अंशुमन मैगजीन ने कहा "हरियाणा की आर्थिक कहानी अपने पारंपरिक औद्योगिक आधार से आगे बढ़कर विनिर्माण, सेवाओं, निर्यात और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के साथ गहरे एकीकरण द्वारा संचालित एक व्यापक विकास इंजन बन गई है. 2047 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने दृष्टिकोण के साथ, राज्य टिकाऊ विकास, प्रौद्योगिकी-संचालित विकास, सामाजिक समावेशन, पर्यावरणीय लचीलेपन और मजबूत शासन के माध्यम से इस आधार को और विस्तार देने का प्रयास कर रहा है."
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