टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल लिमिटेड के लिए जून 2026 में समाप्त पहली तिमाही यानी Q1 FY27 में तस्वीर मिली-जुली रही. कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 9.3% बढ़कर ₹95,799 करोड़ हो गया. हालांकि, बिक्री में बढ़त के बावजूद कंपनी के मुनाफे और मार्जिन पर दबाव साफ नजर आया. पहली तिमाही में प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) घटकर ₹859 करोड़ रह गया, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह ₹2,597 करोड़ था.
कंपनी के प्रदर्शन पर जगुआर लैंड रोवर (JLR) के कमजोर वॉल्यूम और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों का असर पड़ा. पहली तिमाही के दौरान JLR का होलसेल वॉल्यूम सालाना आधार पर 9.2% घटा. कंपनी के मुताबिक, एक अहम कंपोनेंट सप्लायर के यहां आग लगने, मिडिल ईस्ट कॉन्फ्लिक्ट और Jaguar के प्लान्ड विंड-डाउन जैसी वजहों से JLR के प्रदर्शन पर दबाव आया.
EBITDA और मार्जिन में गिरावट
कम वॉल्यूम के साथ ऊंचे वेरिएबल मार्केटिंग खर्च (VMEs) ने भी कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित किया. हालांकि, फेवरबल स्ट्रक्चरल कॉस्ट से कुछ राहत मिली, लेकिन यह दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हो सका. Q1 FY27 में कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 6.43% घटकर ₹7,128 करोड़ रह गया. EBITDA मार्जिन भी 130 बेसिस पॉइंट की गिरावट के साथ 7.4% पर आ गया. एक साल पहले की समान तिमाही में EBITDA मार्जिन 8.7% था. कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) ₹1,606 करोड़ रहा. इसके बाद टैक्स के बाद मुनाफा ₹859 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹2,597 करोड़ के मुकाबले काफी कम है.
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घरेलू कारोबार ने संभाली तस्वीर
जगुआर लैंड रोवर (JLR) के कारोबार में जहां कमजोरी देखने को मिली, वहीं टाटा माटर्स ने घरेलू पैसेंजर व्हीकल बिजनेस ने मजबूत प्रदर्शन किया. कंपनी के मुताबिक, घरेलू कारोबार का रेवेन्यू सालाना आधार पर 65% बढ़ा. हाल की नई लॉन्चिंग और ग्राहकों की मजबूत मांग से घरेलू वॉल्यूम में भी तेज वृद्धि हुई. हालांकि, ऊंची कमोडिटी लागत और फॉरेक्स से जुड़े असर ने मार्जिन में सुधार की रफ्तार को सीमित किया.
EV सेगमेंट में रिकॉर्ड ग्रोथ
टाटा मोटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शैलेश चंद्रा ने कहा कि Q1 FY27 कंपनी के पैसेंजर व्हीकल कारोबार के लिए मजबूत शुरुआत रही. उनके मुताबिक, हाल की लॉन्चिंग की सफलता और मजबूत ग्राहक मांग के चलते वॉल्यूम में सालाना आधार पर 46% की बढ़ोतरी हुई, जो इंडस्ट्री की ग्रोथ से बेहतर रही. इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया. तिमाही के दौरान EV वॉल्यूम 34,000 यूनिट से ऊपर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इसमें सालाना आधार पर 112% की ग्रोथ दर्ज की गई. इससे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में Tata Motors की स्थिति और मजबूत होने का संकेत मिलता है.
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निवेशकों के लिए क्या संकेत?
टाटा मोटर्स के पहली तिमाही के नतीजों में निवेशकों के लिए पॉजिटिव और निगेटिव दोनों संकेत हैं. घरेलू कारोबार की तेज ग्रोथ, नई कारों की मांग और EV सेगमेंट का मजबूत प्रदर्शन कंपनी के लिए सकारात्मक हैं. दूसरी ओर, JLR की सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें, कम वॉल्यूम, ऊंचे मार्केटिंग खर्च और कमजोर मार्जिन चिंता का विषय बने हुए हैं. अब देखना होगा कि JLR की मौजूदा सप्लाई संबंधी परेशानियां कितनी जल्दी दूर होती हैं और क्या कम वॉल्यूम का असर आने वाली तिमाहियों में कम होता है. साथ ही, घरेलू कारोबार और EV बिक्री की मौजूदा रफ्तार कंपनी की कुल प्रॉफिटेबिलिटी को कितना सहारा देती है, यह भी अहम होगा.
आजतक बिजनेस डेस्क