एन चंद्रशेखरन ने बुधवार को टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, वह 20 फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने तक इस पद पर बने रहेंगे. उन्होंने बोर्ड से जल्द से जल्द अपने उत्तराधिकारी का चयन करने को कहा है, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारु तरीके से पूरी हो सके. यह फैसला कई महीनों से चल रही अटकलों के बाद आया है.
चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट और बोर्ड के स्तर पर सहमति नहीं बन पाई थी. चंद्रशेखरन के मुताबिक, 'सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट' और 'सर रतन टाटा ट्रस्ट' ने उनके अगले पांच साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी. दोनों ट्रस्ट के पास मिलकर टाटा संस की 51.54% हिस्सेदारी है, इसलिए कंपनी के एडमिनिस्ट्रेशन और लीडरशिप में इन दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है.
एन चंद्रशेखरन ने बताया कि दोनों ट्रस्ट ने उनके कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी. इसके बाद यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस के बोर्ड के सामने रखा गया. हालांकि, एक बोर्ड सदस्य के समर्थन नहीं देने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका.
छह महीने बाद भी नहीं निकला रास्ता
चंद्रशेखरन ने बिना किसी बोर्ड सदस्य का नाम लिए कहा कि प्रस्ताव पर सर्वसम्मति नहीं बनने के बाद उन्होंने अपना फैसला टाल दिया था. उन्होंने कहा कि उस बोर्ड बैठक को करीब छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका.
उनके मुताबिक, टाटा संस इस समय कई रणनीतिक परियोजनाओं के महत्वपूर्ण चरण में है. ऐसे में कर्मचारियों, निवेशकों, कारोबार साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए कंपनी के नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है. इसी वजह से उन्होंने खुद को दोबारा चेयरमैन पद के लिए पेश नहीं करने का फैसला किया.
नोएल टाटा के साथ मतभेद की रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट्स में इस गतिरोध को चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मतभेदों से भी जोड़ा गया है. रतन टाटा के निधन के बाद 2024 में नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन बने थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मतभेद थे. नोएल टाटा कथित तौर पर टाटा संस की लिस्टिंग नहीं होने का आश्वासन चाहते थे, जबकि चंद्रशेखरन इस मुद्दे पर सहमत नहीं थे.
बोर्ड में प्रतिनिधित्व और कंपनी की भविष्य की रणनीति को लेकर भी दोनों के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं. नोएल टाटा ने कथित तौर पर पांच साल की रणनीतिक योजना, शापूरजी पलोनजी ग्रुप को टाटा संस की लिस्टिंग के बिना एग्जिट देने के विकल्प और लिस्टिंग को लेकर चंद्रशेखरन का रुख स्पष्ट करने जैसे मुद्दे उठाए थे.
बोर्ड का काम पूरी तरह प्रभावित नहीं हुआ
मतभेदों के बावजूद टाटा संस का बोर्ड पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुआ. मई में हुई बोर्ड बैठक को जानकारों ने रचनात्मक बताया था. इस बैठक में नोएल टाटा ने एअर इंडिया और बिगबास्केट जैसे कारोबारों पर ध्यान दिया, जबकि चंद्रशेखरन ने ग्रुप की अन्य कंपनियों की समीक्षा की.
टाटा ग्रुप से 40 वर्षों से जुड़े हैं चंद्रशेखरन
एन चंद्रशेखरन 1987 में टाटा ग्रुप से जुड़े थे. उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में अपना करियर आगे बढ़ाया और 2009 में कंपनी के CEO बने. 2017 में साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद रतन टाटा ने अंतरिम चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली थी. इसके बाद चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया. उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया. सेमीकंडक्टर और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी ग्रुप ने बड़े निवेश किए हैं. टाटा की वेबसाइट के मुताबिक, ग्रुप में 31 कंपनियां हैं, जो 100 से अधिक देशों में कारोबार करती हैं.
कार्यकाल में कई चुनौतियां भी आईं
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप को कई बड़ी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा. इनमें एअर इंडिया से जुड़ी घातक विमान दुर्घटना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ने से IT कारोबार पर पड़ा दबाव और जगुआर लैंड रोवर को प्रभावित करने वाला साइबरअटैक शामिल हैं. अपने बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि उन्होंने टाटा ग्रुप में अपने प्रोफेशनल करियर के 40 साल पूरे किए हैं और इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने का अवसर उनके लिए बेहद संतोषजनक रहा है.
अब अगला चेयरमैन कौन?
चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की तारीख अब तय है, इसलिए टाटा संस के बोर्ड के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता नए चेयरमैन का चयन करना होगी. टाटा ट्रस्ट के मेजॉरिटी होल्डिंग वाली टाटा संस, टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसके तहत TCS, टाटा मोटर्स और एअर इंडिया समेत कई बड़े कारोबार आते हैं. अब देखना होगा कि टाटा ट्रस्ट का बोर्ड चंद्रशेखरन का उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया कब शुरू करता है और किस नाम पर सहमति बनती है. 20 फरवरी 2027 तक नया नेतृत्व तय करना टाटा संस के लिए अहम होगा, ताकि चंद्रशेखरन के कार्यकाल के बाद ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन बिना किसी बड़े व्यवधान के हो सके.
आजतक बिजनेस डेस्क