फूड इंफ्लेशन से बिगड़ रहा किचन का बजट... शहरों से ज्यादा असर गावों में, जानें क्या-क्या हुआ महंगा

त्योहारों के बीच आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार बढ़ गई है. सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले 23 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. खाने-पीने की चीजों की महंगाई 7.74 फीसदी रही. प्याज, अदरक, लहसुन और नींबू के दाम में तेज बढ़ोतरी ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. गांवों में महंगाई का दबाव शहरों से ज्यादा है.

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सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले 23 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. (File Photo: ITG) सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले 23 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. (File Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 13 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:14 AM IST

त्योहारों का मौसम है. घर में खरीदारी करनी है, मेहमानों के लिए पकवान बनाने हैं और बाजार से राशन से लेकर सब्जियां तक लानी हैं. लेकिन इस बार त्योहारों की तैयारियों के बीच महंगाई ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है. सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 4.83 फीसदी थी. यह पिछले 23 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च का दबाव बढ़ रहा है.

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आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता खाने-पीने की चीजों की महंगाई है. सितंबर में खाद्य महंगाई दर 7.74 फीसदी रही. यानी रोजमर्रा के खाने-पीने के सामान की कीमतों में पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई. जब रसोई का खर्च बढ़ता है, तो इसका असर परिवार के दूसरे खर्चों पर भी पड़ता है. ऐसे में गरीबों और आम लोगों के लिए त्योहारों के दौरान खरीदारी और घर का बजट संभालना मुश्किल हो सकता है.

प्याज से लेकर अदरक-लहसुन तक महंगे

महंगाई के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात कुछ रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है. प्याज की महंगाई दर सितंबर में 108.09 फीसदी रही, जबकि अगस्त में यह 48.78 फीसदी थी. इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जिनके रोज के खाने में प्याज का इस्तेमाल होता है. अदरक की महंगाई दर 62.85 फीसदी दर्ज की गई. वहीं, लहसुन की महंगाई बढ़कर 54.62 फीसदी हो गई, जो अगस्त में 43.60 फीसदी थी.

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नींबू की कीमतों में भी सालाना आधार पर 36.41 फीसदी की महंगाई दर्ज की गई. इन चीजों के महंगे होने का असर केवल एक-दो सामान खरीदने तक सीमित नहीं रहता. सब्जी, दाल और दूसरी घरेलू तैयारियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री महंगी होने से महीने का कुल राशन बजट बढ़ सकता है. त्योहारों के दौरान जब घरों में पकवान बनते हैं और खरीदारी बढ़ती है, तब इस तरह की महंगाई ज्यादा महसूस होती है.

आलू और टमाटर के दाम में दिखी नरमी

दूसरी ओर, कुछ चीजों की कीमतों में राहत भी मिली है. सितंबर में आलू की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 11.50 फीसदी कम रहीं. टमाटर की कीमतों में भी 8.62 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. यानी इन दोनों सब्जियों को खरीदने वालों को कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, प्याज, अदरक, लहसुन और नींबू जैसी चीजों के महंगे होने से यह राहत हर परिवार के लिए एक जैसी नहीं होगी. घर का वास्तविक खर्च इस बात पर निर्भर करेगा कि परिवार किन चीजों की कितनी खरीदारी करता है.

गांवों में महंगाई का ज्यादा असर

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ग्रामीण इलाकों की खुदरा महंगाई दर 6.08 फीसदी रही. अगस्त में यह 5.24 फीसदी थी. वहीं, शहरी इलाकों में खुदरा महंगाई अगस्त के 4.31 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 4.88 फीसदी हो गई. खाने-पीने की चीजों के मामले में भी गांवों में महंगाई ज्यादा रही. ग्रामीण खाद्य महंगाई दर 8.06 फीसदी दर्ज की गई, जबकि शहरी इलाकों में यह 7.18 फीसदी रही.

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इसका मतलब है कि महंगाई का दबाव गांव और शहर, दोनों जगह बढ़ा है, लेकिन ग्रामीण परिवारों को ज्यादा दबाव का सामना करना पड़ रहा है. कमाई के मुकाबले खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने से बचत के लिए कम पैसा बच सकता है. इसके अलावा, सितंबर में घर से जुड़ी महंगाई दर अगस्त के 2.61 फीसदी से बढ़कर 2.74 फीसदी हो गई. कपड़े और जूते-चप्पलों की महंगाई भी 3.56 फीसदी से बढ़कर 3.93 फीसदी पर पहुंच गई. यानी खर्च का दबाव केवल रसोई तक सीमित नहीं है.

आखिर क्यों बढ़ रही है महंगाई?

महंगाई बढ़ने के पीछे खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी अहम वजह है. इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची वैश्विक कीमतें और रुपये की कमजोरी भी चिंता बढ़ा रही हैं. कच्चा तेल महंगा होने से ईंधन और माल ढुलाई की लागत पर दबाव पड़ सकता है. इससे सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च बढ़ने पर कीमतों पर भी असर पड़ सकता है. खाने-पीने की चीजों की कीमतें, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चा तेल और रुपये की कमजोरी निकट भविष्य में महंगाई का जोखिम बढ़ा सकते हैं. इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में कीमतों में तुरंत बड़ी राहत मिलने की गारंटी नहीं है. अगर सब्जियों और दूसरी जरूरी चीजों के दाम ऊंचे बने रहते हैं, तो त्योहारों के बाद भी घरों का बजट दबाव में रह सकता है.

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कब तक मिलेगी महंगाई से राहत?

आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि महंगाई कब कम होगी. फिलहाल इसका कोई निश्चित समय बताना मुश्किल है. राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें कितनी नीचे आती हैं और कच्चे तेल व रुपये की स्थिति कैसी रहती है. भारतीय रिजर्व बैंक के लिए भी बढ़ती महंगाई चिंता का विषय है. सितंबर में खुदरा महंगाई लगातार चौथे महीने बैंक के 4 फीसदी के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर रही. ऐसे माहौल में ब्याज दरों में राहत देने की गुंजाइश सीमित रह सकती है, जब तक कीमतों के दबाव में कमी के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते. अब अगला अहम संकेत अक्टूबर के महंगाई आंकड़ों से मिलेगा. सरकार के कार्यक्रम के मुताबिक, अक्टूबर 2026 के खुदरा महंगाई के आंकड़े 12 नवंबर को जारी किए जाने हैं. इन आंकड़ों से पता चलेगा कि सितंबर में बढ़ी महंगाई का दबाव आगे कम हुआ है या नहीं.

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