Food Crisis: अब क्या करेगा Pakistan... एक चौथाई लोग रोटी-चावल को मोहताज, सरकारी आंकड़ों ने खोली पोल

Pakistan Crisis: पाकिस्तान में खाने-पीने की चीजें लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं. देश में हालात यहां तक बदतर हो चुके हैं कि एक चौथाई परिवार भूख से जूझ रहे हैं.

Advertisement
आर्थिक संकट से जूझते पाकिस्तान का बुरा हाल. (Photo: Reuters) आर्थिक संकट से जूझते पाकिस्तान का बुरा हाल. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:05 AM IST

पाकिस्तान का हाल बेहाल है, लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझते देश की जनता बदहाल है और खाने-पीने की चीजों तक के लिए मोहताज नजर आ रही है. पाकिस्तान सरकार के आंकड़े खुद शहबाज शरीफ सरकार की पोल खोल रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, Pakistan Food Crisis लगातार बढ़ता जा रहा है. लोग दूध, रोटी, चावल, मीट समेत अन्य खाद्य पदार्थों के लिए भी मोहताज हैं. पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स द्वारा जारी डेटा को देखकर पाकिस्तान में बढ़ती खाद्य असुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है. 

Advertisement

PAK में खाने-पीने के पड़े लाले 
पाकिस्तान टुडे की एक रिपोर्ट में पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (PBS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए पड़ोसी मुल्क की बदहाल की पोल खोली गई है. इसमें कहा गया है कि ज्यादातर फूड कैटेगरी में पाकिस्तानी परिवार कम भोजन कर रहे हैं. देश में खाद्य असुरक्षा लगातार बढ़ रही है, क्योंकि पौष्टिक आहार तक आम लोगों की पहुंच कम होती जा रही है.

हालात यहां तक खराब हो चुकी है कि खाद्य असुरक्षा बढ़ने के साथ-साथ परिवार अपने भोजन की मात्रा और विविधता में कटौती करने को मजबूर हैं. PBS के आंकड़ों के मुताबिक, बीते छह सालों में पाकिस्तानी परिवारों ने लगभग सभी प्रमुख खाद्य श्रेणियों में कम उपभोग किया है. यह गिरावट ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखने को मिली है. पाकिस्तानी परिवार गेहूं, चावल, मीट, दूध और चाय जैसी खाने-पीने की चीजों का सेवन तक कम कर रहे हैं.

Advertisement

भूख से जूझ रहे एक चौथाई पाकिस्तानी 
रिपोर्ट की मानें, तो पाकिस्तान में मध्यम से गंभीर रूप से खाद्य असुरक्षित परिवारों की हिस्सेदारी साल 2019 के 15.92% से बढ़कर 2025 में 24.35% हो गई. इस दौरान गंभीर खाद्य असुरक्षा भी दोगुनी से अधिक हो गई और ये 2.37% परिवारों से बढ़कर 5.04% पर पहुंच गई. इसका मतलब साफ है कि अब एक चौथाई से अधिक पाकिस्तानी परिवार किसी न किसी स्तर पर भूख और कुपोषण का सामना कर रहे हैं.

पाकिस्तानी परिवार अब कम मात्रा में चावल बना रहे हैं, छोटी रोटियां पका रहे हैं, मीट कम खा रहे हैं और बच्चों को दिए जाने वाले दूध की मात्रा में भी कटौती कर रहे हैं. यही नहीं चाय की खपत में भी कमी दर्ज की गई है. व्यापक स्तर पर देखें, तो ज्यादा फूड कैटेगरी में उपभोग में कमी आई है. जैसे-जैसे भोजन महंगा होता जा रहा है, परिवारों को अपनी खरीद की मात्रा के बारे में सोचने को मजबूर होना पड़ रहा है. 

PAK के लिए बिग वार्निंग
पाकिस्तान टुडे की रिपोर्ट पाकिस्तान के खराब हालातों के बारे में खुलासा करने के साथ ही चेतावनी भी दी है कि उपभोग किए जाने वाले भोजन की मात्रा और गुणवत्ता में लगातार कमी से आने वाली पीढ़ियां प्रभावित हो सकती हैं. इससे संभावित रूप से खराब स्वास्थ्य और पोषण संबंधी परिणाम देखने को मिल सकते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि खाद्य पदार्थों का आयात अब देश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है.

Advertisement

PAK की अर्थव्यवस्था की पहचान कृषि प्रधान इकोनॉमी के रूप में होने के बाद भी देश में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता में गिरावट आई है. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान कम से कम 2021 से खाद्य पदार्थों का शुद्ध आयातक बना हुआ है. ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति बदतर है, तो शहरों पर भी दबाव बढ़ रहा है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »