शेयर बाजार में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में राहत की मांग तेज हो गई है. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और शेयर बाजार में दबाव के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर निवेशकों की चिंता को स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि बाजार से जुड़े लोग अब अपनी चिंताएं खुलकर उठा रहे हैं और सरकार इन पर विचार करेगी. ऐसे में सवाल है कि क्या आने वाले समय में शेयर निवेशकों को LTCG टैक्स में राहत मिल सकती है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 2 नवंबर को मुंबई में एक बिजनेस न्यूजपेपर के कार्यक्रम में शिरकत कर रही थीं. इसी दौरान उनसे LTCG टैक्स को लेकर सवाल पूछे गए. उन्होंने सवालों का जवाब देते हुए टैक्स में कटौती का सीधा आश्वासन तो नहीं दिया, लेकिन ये संकेत जरूर दिए कि सरकार इन मांगों पर विचार कर रही है. सीतारमण ने कहा कि रिटेल निवेशकों और शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों की चिंताओं को वह समझती हैं. सीतारमण ने कहा, 'सभी संबंधित पक्ष अपनी चिंताएं अब ज्यादा जोर से उठा रहे हैं. मैं इन सभी बातों पर विचार करूंगी.' उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी एक पक्ष का समर्थन किए बिना निवेशकों की चिंता को समझ रही हैं.
वित्त मंत्री से पूछा गया कि क्या सरकार विदेशी निवेशकों को भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगाने के लिए विशेष रियायत दे सकती है. इस पर उन्होंने कहा कि अगर विदेशी निवेशकों को राहत देने की बात होती है, तो घरेलू निवेशकों के हितों को भी ध्यान में रखना होगा. उन्होंने सवाल किया, 'अगर आप डॉलर वाले निवेशकों की बात करते हैं, तो रुपये वाले यानी घरेलू निवेशकों का क्या होगा?' सरकार का स्टैंड है कि विदेशी निवेश आकर्षित करने के साथ देश के आम निवेशकों के हितों का भी ध्यान रखा जाए.
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क्या होता है LTCG टैक्स?
LTCG यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स का मतलब है किसी निवेश को लंबे समय तक रखने के बाद बेचने पर होने वाला मुनाफा. आसान भाषा में समझें तो अगर आपने कोई शेयर खरीदा और उसे एक साल से ज्यादा समय बाद ऊंची कीमत पर बेचकर मुनाफा कमाया, तो उस कमाई को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स कहा जाता है. मौजूदा नियमों के मुताबिक, लिस्टेड शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड में 12 महीने से ज्यादा समय तक निवेश रखने के बाद बेचने पर हुए मुनाफे पर 12.5% LTCG टैक्स लगता है. उदाहरण के लिए, अगर आपने शेयरों में निवेश किया और उन्हें 12 महीने से ज्यादा समय बाद बेचकर 2 लाख रुपये का मुनाफा कमाया, तो मौजूदा नियमों के तहत 1.25 लाख रुपये की सालाना छूट घटाने के बाद बचे 75,000 रुपये पर 12.5% LTCG टैक्स लगेगा. यानी टैक्स की रकम 9,375 रुपये होगी. यह गणना लागू शर्तों के अधीन है.
STCG टैक्स क्या होता है?
12 महीने या इससे कम समय तक रखे गए शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर होने वाले मुनाफे को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) कहते हैं. इस तरह की इनकम पर 20% STCG टैक्स लगता है. इसके लिए तय सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की शर्तें पूरी होनी चाहिए. उदाहरण के लिए, अगर आपने शेयरों में निवेश किया और उन्हें 12 महीने से कम समय में बेचकर 2 लाख रुपये का मुनाफा कमाया, तो मौजूदा नियमों के तहत पूरी रकम पर 20% STCG टैक्स लगेगा. यानी टैक्स की रकम 40,000 रुपये होगी. यह गणना लागू शर्तों के अधीन है.
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विदेशी निवेशक मांग रहे LTCG टैक्स में राहत
शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली के कारण LTCG टैक्स पर बहस तेज हुई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से रिकॉर्ड 31 अरब डॉलर के शेयर बेचे हैं. विदेशी निवेशकों का मानना है कि टैक्स का बोझ कम होने से भारतीय बाजार में निवेश करना ज्यादा आकर्षक हो सकता है. इसी वजह से LTCG टैक्स की समीक्षा की मांग उठ रही है. सीतारमण ने कहा कि 2023-24 में भी कैपिटल गेन्स टैक्स का ढांचा लगभग ऐसा ही था और उस समय भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह काफी मजबूत था. लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के साथ बाजार से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ी हैं.
सेबी ने भी की टैक्स में बदलाव की सिफारिश
इस बीच भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भी सरकार को टैक्स में बदलाव के कुछ सुझाव दिए हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, सेबी ने विदेशी इक्विटी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स खत्म करने की सिफारिश की है. इसके अलावा घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को एक स्कीम से दूसरी स्कीम में पैसा ट्रांसफर करने पर LTCG टैक्स से छूट देने का सुझाव भी दिया गया है. हालांकि, इसके लिए जरूरी शर्त यह है कि निवेशक ने अपनी मौजूदा स्कीम में पैसा एक साल से ज्यादा समय तक रखा हो. ये सुझाव बजट से पहले सरकार को भेजी गई सिफारिशों का हिस्सा हैं. इन पर फैसला लेना सरकार के अधिकार क्षेत्र में है. सेबी की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं.
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इक्विटी बाजार को भी सपोर्ट की जरूरत
वित्त मंत्री ने कहा कि देश की आर्थिक विकास दर 7% या उससे ज्यादा बनाए रखने के लिए पूंजी की जरूरत है. इसमें इक्विटी निवेश की अहम भूमिका है. सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को मजबूत बनाने पर काम किया है, लेकिन अब शेयर बाजार को भी जरूरी समर्थन देने की जरूरत है. सीतारमण के मुताबिक, सरकार निवेशकों की चिंताओं को समझ रही है और बाजार से जुड़े लोगों की मांगों पर ध्यान देगी. अगर आप शेयर बाजार में सीधे निवेश करते हैं या इक्विटी म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं, तो फिलहाल पुराने नियम ही लागू रहेंगे. अब नजर इस बात पर होगी कि सरकार बजट से पहले सेबी की सिफारिशों और निवेशकों की मांगों पर क्या फैसला लेती है.
आजतक बिजनेस डेस्क