'राफेल मामले की तरह यहां भी मांगनी पड़ेगी माफी', अब आईडीबीआई बैंक मामले पर भिड़े राहुल और निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस मामले में भी राफेल विवाद की तरह माफी मांगनी पड़ेगी.

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आईडीबीआई बैंक की बिक्री पर राहुल गांधी के आरोपों पर निर्मला सीतारमण का पलटवार. आईडीबीआई बैंक की बिक्री पर राहुल गांधी के आरोपों पर निर्मला सीतारमण का पलटवार.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:37 PM IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आईडीबीआई बैंक की प्रस्तावित बिक्री को लेकर राहुल गांधी के बयान पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को इस मामले में भी माफी मांगनी पड़ेगी, जैसे उन्हें राफेल विवाद को लेकर माफी मांगनी पड़ी थी. सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, 'राफेल को लेकर आपके झूठ नाकाम रहे और सामने आ गए. आपको माफी मांगनी पड़ी. ऐसा ही यहां भी होगा.'

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राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक की बिक्री को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि आईडीबीआई बैंक की स्थापना कांग्रेस सरकार के समय देश के औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए की गई थी.

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के समय बैंक बनाए जाते थे, जबकि मोदी सरकार के समय संस्थानों को बेचा जा रहा है. उन्होंने कहा था, 'मैं आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं.' राहुल गांधी का यह बयान केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से आईडीबीआई बैंक में 60.72 फीसदी हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने की मंजूरी दिए जाने के बाद आया था.

सीतारमण ने कांग्रेस के समय की बैंकिंग व्यवस्था पर उठाए सवाल

राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के शासनकाल की बैंकिंग व्यवस्था पर कई सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के समय बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपनी संपत्ति की तरह इस्तेमाल किया जाता था और कर्मचारियों पर सही नियमों का पालन किए बिना कर्ज मंजूर करने का दबाव बनाया जाता था.

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सीतारमण ने 1957 से जुड़े कई मामलों का जिक्र किया. उन्होंने कारोबारी हरिदास मुंधड़ा को एलआईसी से पैसे दिए जाने के मामले का उल्लेख किया और आरोप लगाया कि इसमें कांग्रेस नेताओं का प्रभाव था. उन्होंने 1976 में एसबीआई के चेयरमैन आरके तलवार को हटाए जाने का भी जिक्र किया. सीतारमण के मुताबिक, तलवार ने एक कंपनी के लिए कर्ज की शर्तों में ढील देने से इनकार किया था, जिसके बाद इंदिरा गांधी सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई की.

वित्त मंत्री ने संजय गांधी पर भी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से मारुति को कर्ज देने के मामले में दबाव बनाने का आरोप लगाया. उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय वित्त राज्य मंत्री रहे बी. जनार्दन पूजारी का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि उन्होंने 1980 के दशक में बैंक कर्मचारियों पर कर्ज जारी करने के लिए दबाव बनाया.

इसके अलावा सीतारमण ने पूर्व यूपीए मंत्री पवन कुमार बंसल का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि बंसल ने अपने परिवार से जुड़े कारोबारों को केनरा बैंक से कर्ज दिलाने के लिए दबाव बनाया था.

आईडीबीआई बैंक को लेकर भी कांग्रेस पर आरोप

आईडीबीआई बैंक का जिक्र करते हुए सीतारमण ने कहा कि बैंक को कांग्रेस नेताओं के करीबी बड़े कारोबारी समूहों को कर्ज देने के लिए मजबूर किया गया था. उन्होंने वीडियोकॉन, विनसम, एबीजी शिपयार्ड और किंगफिशर का नाम लिया. सीतारमण के मुताबिक, इन कंपनियों को दिए गए कर्ज बाद में खराब कर्ज में बदल गए और इससे बैंक को भारी नुकसान हुआ.

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वित्त मंत्री ने कहा कि एनडीए सरकार ने पेशेवर प्रबंधन, बेहतर कर्ज व्यवस्था और 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की पूंजी डालकर बैंक को फिर से मजबूत करने का काम किया. उन्होंने कहा कि आईडीबीआई बैंक अब विकास के अगले चरण के लिए तैयार है.

सीतारमण ने सरकार के फैसले का किया बचाव

सीतारमण ने कहा कि आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन में सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और सरकार इस मामले में अपना पक्ष पहले ही साफ कर चुकी है. उन्होंने फरवरी 2024 में जारी 'भारतीय अर्थव्यवस्था पर श्वेत पत्र' का भी जिक्र किया. सीतारमण ने कहा कि इसमें कांग्रेस शासन के दौरान हुए घोटालों और आर्थिक कुप्रबंधन का विवरण दिया गया था.

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के समय बैंकिंग व्यवस्था में प्रभावशाली लोगों को फायदा मिलता था, जबकि आम लोगों के लिए नियम सख्त थे. सीतारमण ने कहा कि मोदी सरकार में यह व्यवस्था बदली है. वित्त मंत्री ने कहा, 'कांग्रेस के समय की बैंकिंग व्यवस्था ताकतवर लोगों के लिए फोनबुक और आम नागरिकों के लिए नियमों की किताब थी.' उन्होंने दावा किया कि अब 'कनेक्शन और सेटिंग' वाली बैंकिंग व्यवस्था खत्म हो चुकी है और आम लोगों को कर्ज तक आसान पहुंच मिल रही है. साथ ही बैंक कर्मचारियों पर प्रभावशाली लोगों के फोन के आधार पर कर्ज मंजूर करने का दबाव भी नहीं है.
 

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