ललिता जूलरी मार्ट (Lalithaa Jewellery Mart) का IPO ₹190-201 प्रति शेयर के प्राइस बैंड के साथ बाजार में आ गया है. अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹11,250 करोड़ बैठता है. इस IPO के साथ कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर किरण कुमार की कहानी भी चर्चा में है. कभी आर्थिक तंगी के कारण 5वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले किरण कुमार ने करीब 12 साल की उम्र में जूलरी बिजनेस में कदम रखा था. आज उनका कारोबार 61 स्टोर तक पहुंच चुका है.
किरण कुमार का जन्म आंध्र प्रदेश के नेल्लोर में एक बड़े परिवार में हुआ. वह अपने माता-पिता की 8वीं संतान थे. उनके पिता जूलरी की दुकान पर अकाउंटेंट के तौर पर काम करते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करना आसान नहीं था. आर्थिक परेशानियों के चलते कुमार ने 5वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी. करीब 12 साल की उम्र में उन्होंने जूलरी ट्रेड में काम करना शुरू कर दिया. यहीं से उन्होंने इस कारोबार की बारीकियां सीखीं और आगे चलकर होलसेल से रिटेल तक का सफर तय किया.
मां की चूड़ियों से मिली कारोबार की पहली पूंजी
किरण कुमार के कारोबार की शुरुआत का किस्सा बेहद दिलचस्प है. उन्होंने देखा कि नेल्लोर की जूलरी बड़े बाजारों, खासकर चेन्नई और हैदराबाद तक पहुंच रही थी. कुमार चाहते थे कि वह बिचौलियों के बजाय सीधे बड़े बाजारों में जूलरी बेचें. लेकिन उनके पास इसके लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी.
ऐसे समय में उनकी मां ने उन्हें चार सोने की चूड़ियां दीं. इन चूड़ियों का वजन करीब 48 ग्राम था. कुमार ने इसी सोने से छह बालियां बनवाईं और उन्हें बेचने के लिए चेन्नई पहुंच गए. चेन्नई के टी नगर स्थित ललिता जूलरी में उनकी मुलाकात स्टोर बंद होने के समय मालिक एमएस कंदास्वामी पिल्लई से हुई. किरण कुमार की जूलरी देखने के बाद उन्हें शुरुआती तौर पर 100 ग्राम का ऑर्डर मिला, जो बाद में बढ़कर 200 ग्राम हो गया.
सरकारी बसों से सफर, फिर बढ़ता गया कारोबार
पहला ऑर्डर मिलने के बाद कुमार ने ललिता जूलरी समेत आंध्र प्रदेश के अन्य होलसेल कारोबारियों को जूलरी की सप्लाई शुरू कर दी. वह नेल्लोर और चेन्नई के बीच अक्सर सरकारी बसों से सफर करते थे. धीरे-धीरे उनका होलसेल कारोबार बढ़ने लगा. उन्होंने बड़े शोरूम्स के अलावा कनाडा, लंदन, सिंगापुर और दुबई जैसे देशों में रहने वाले ग्राहकों तक भी जूलरी सप्लाई करना शुरू किया.
1999 में कुमार के जीवन में आया एक अहम मोड़
किरण कुमार के कारोबार में सबसे बड़ा मोड़ 24 फरवरी 1999 को आया. उस समय एमएस कंदास्वामी पिल्लई आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहे थे. किरण कुमार ने मौजूदा ललिता जूलरी का कारोबार अपने हाथों में लिया और उसकी देनदारियों को सुलझाने में मदद की. कुमार कई मौकों पर स्पष्ट कर चुके हैं कि वह ललिता जूलरी के संस्थापक नहीं थे. उन्होंने मौजूदा कारोबार को खरीदा था. बाद में ब्रांड के नाम में एक अतिरिक्त 'a' जोड़कर Lalithaa Jewellery नाम से कारोबार को आगे बढ़ाया. यहीं से उनका सफर होलसेल से रिटेल जूलरी कारोबार की ओर मुड़ गया.
कीमत और कम मेकिंग चार्ज को बनाया फोकस
रिटेल कारोबार में किरण कुमार ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कीमत और आसान प्राइसिंग पर जोर दिया. कंपनी ने कम एडिशनल चार्ज और पारदर्शी कीमत को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया. उन्होंने BIS-हॉलमार्क वाले सोने को बढ़ावा दिया और ग्राहकों से दूसरे जूलरी शोरूम्स के एस्टिमेट लाकर कीमत की तुलना करने के लिए भी कहा. इस रणनीति से कंपनी ने धीरे-धीरे दक्षिण भारत के जूलरी बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की.
ललिता जूलरी के दुनियाभर के 51 शहरों में स्टोर
किरण कुमार के नेतृत्व में कारोबार एक शोरूम से बढ़कर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और पुडुचेरी तक फैल गया. कंपनी के स्टोर की संख्या बढ़कर 61 हो चुकी है और इसका नेटवर्क 51 शहरों तक पहुंच चुका है. कंपनी के पास तमिलनाडु में मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी भी हैं, जिससे इसके रिटेल कारोबार के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी जुड़ती है. अब किरण कुमार की यह कारोबारी यात्रा शेयर बाजार के दरवाजे तक पहुंच गई है. ललिता जूलरी मार्ट के IPO का प्राइस बैंड ₹190 से ₹201 प्रति शेयर तय किया गया है. अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का अनुमानित वैल्यूएशन करीब ₹11,250 करोड़ है. (इनपुट: पवन कुमार नाहर)
आजतक बिजनेस डेस्क