दुबई में ₹36 लाख सालाना की टैक्स-फ्री नौकरी का ऑफर ठुकराने वाले दिल्ली के कनन बहल की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है. बहल ने बताया कि सात साल पहले उन्होंने दुबई में ₹36 लाख सालाना की नौकरी का ऑफर ठुकराने का फैसला तब लिया था, जब भारत में उन्हें ₹12 लाख सालाना से ज्यादा का पैकेज नहीं मिल रहा था. इसके बावजूद उन्होंने विदेश में नौकरी करने के बजाय भारत में अपने परिवार के करीब रहने को प्राथमिकता दी. सात साल बाद उनका कहना है कि उन्हें इस फैसले पर जरा भी पछतावा नहीं है.
फिनग्रोथ मीडिया (Fingrowth Media) के फाउंडर कनन बहल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपने करियर का यह अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया कि दुबई का ऑफर उस समय 'द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया' (ICAI) कैंपस प्लेसमेंट्स में सबसे बड़ा ऑफर था. आर्थिक लिहाज से यह उनके लिए बेहद आकर्षक मौका था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया.
कितना बड़ा था दुबई का ऑफर?
कनन बहल ने अनुमान लगाया कि दुबई में ₹36 लाख सालाना की सैलरी वाली नौकरी में वह रहने और अन्य खर्चों के बाद वह हर साल करीब ₹20 लाख बचा सकते थे. यानी आर्थिक तौर पर यह ऑफर भारत में उपलब्ध उनके विकल्पों से काफी बेहतर था. बहल के मुताबिक, उस समय भारत में उन्हें ₹12 लाख सालाना से ज्यादा की नौकरी नहीं मिल रही थी. ऐसे में दुबई का ₹36 लाख का टैक्स-फ्री पैकेज उनके लिए कई गुना बड़ा अवसर था. फिर भी उन्होंने यह ऑफर ठुकराने का फैसला किया.
कनन बहल ने बताया कि उनके लिए सिर्फ सैलरी महत्वपूर्ण नहीं थी. परिवार के करीब रहना और अपनी संस्कृति से जुड़े रहना उनके लिए ज्यादा अहम था. उन्होंने कहा कि उन्होंने ज्यादा सैलरी के बावजूद भारत में रहने का फैसला किया क्योंकि वह अपने परिवार और संस्कृति के करीब रहना चाहते थे. उस समय भले ही यह फैसला आर्थिक रूप से आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को नौकरी के पैकेज से ऊपर रखा. अब सात साल बाद वह अपने इस फैसले को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं.
अपने फैसले पर कनन को पछतावा नहीं
कनन बहल ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें इस फैसले पर आज जरा भी पछतावा नहीं है. उनके मुताबिक, भारत में उन्होंने जो करियर बनाया, वह दुबई की उस नौकरी से भी ज्यादा कमाई वाला साबित हुआ. यानी जिस समय ₹36 लाख का टैक्स-फ्री पैकेज उनके सामने था और भारत में ₹12 लाख से ज्यादा की नौकरी नहीं मिल रही थी, उस समय लिया गया फैसला सात साल बाद उनके लिए आर्थिक और व्यक्तिगत दोनों लिहाज से सही साबित हुआ.
भारत परफेक्ट नहीं, हमें ही बनाना होगा
बहल ने अपनी पोस्ट में भारत को लेकर भी अपनी भावनाएं साझा कीं. उन्होंने लिखा कि भारत परफेक्ट नहीं है, लेकिन इसे बेहतर और परफेक्ट बनाने की जिम्मेदारी लोगों की है. उन्होंने अपने पूर्वजों का जिक्र करते हुए कहा कि 1947 में (देश के बंटवारे के समय) अपने घरों से निकाले गए उनके पूर्वजों को भारत ने शरण दी थी. इसी वजह से उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता जताई. पोस्ट का अंत उन्होंने 'स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं' और 'जय हिंद' के साथ किया.
सोशल मीडिया पर अलग-अलग रिएक्शन
कनन बहल की पोस्ट पर यूजर्स ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. कई लोगों ने उनके फैसले और भारत में करियर बनाने के उनके विकल्प की तारीफ की. एक यूजर ने लिखा कि उसे भारत के आगे बढ़ने पर कोई शक नहीं है और बहल जैसे युवा इसे संभव बनाने में योगदान देंगे। उसने उनके माता-पिता को भी बधाई दी. एक अन्य यूजर ने बहल की इस बात से सहमति जताई कि भारत परफेक्ट नहीं है, लेकिन इसे बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए. एक यूजर ने उन्हें दूसरों को प्रेरित करने की सलाह दी. हालांकि, सभी लोग उनके फैसले से सहमत नहीं थे. एक यूजर ने कहा कि उसकी सोच कनन बहल से पूरी तरह अलग है, लेकिन इस तरह की सोच और अपने फैसले पर कायम रहने के लिए बहल के प्रति उसके मन में सम्मान है.
एक यूजर ने अपनी कहानी भी साझा की
कनन बहल की पोस्ट पर एक यूजर ने अपनी पुरानी कहानी भी साझा की. उसने बताया कि करीब 19 साल पहले उसने दुबई में ₹60 लाख से ज्यादा सैलरी और इंसेंटिव वाली नौकरी का ऑफर ठुकराया था. उसके मुताबिक, अगर फैसला सही वजहों से लिया गया हो तो बाद में चीजें उम्मीद के मुताबिक न होने पर भी पछतावा नहीं करना चाहिए. कनन बहल की कहानी ऐसे प्रोफेशनल्स के लिए प्ररणा बन सकती है, जो करियर का फैसला लेते समय सैलरी, परिवार, संस्कृति और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं.
आजतक बिजनेस डेस्क