GST कानून में कारोबारियों को बड़ी राहत देने की तैयारी है. जीएसटी अधिकारियों से गिरफ्तारी की ताकत वापस लेने का प्रस्ताव है. अगर इस पर सहमति बनती है तो किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए कोर्ट की मंजूरी जरूरी होगी. इसके साथ ही आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा भी 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की जा सकती है. जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर को होने वाली बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है.
इस बदलाव का सीधा असर कारोबारियों पर पड़ सकता है. अभी कुछ गंभीर मामलों में जीएसटी अधिकारी कमिश्नर स्तर के अधिकारी की मंजूरी के बाद गिरफ्तारी कर सकते हैं. इनमें टैक्स चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने या गलत तरीके से रिफंड हासिल करने जैसे मामले शामिल हैं. प्रस्ताव के तहत अधिकारियों की गिरफ्तारी की यह ताकत खत्म की जा सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होगा कि टैक्स चोरी करने वालों को कार्रवाई से छूट मिल जाएगी.
सरकार जीएसटी (Goods and Services Tax) व्यवस्था को आसान बनाने के लिए सुधारों के अगले चरण पर काम कर रही है. सितंबर 2025 में टैक्स दरों में बदलाव के बाद अब जोर नियमों को सरल बनाने, कारोबारियों की लागत घटाने और कार्रवाई को अपराध की गंभीरता के हिसाब से तय करने पर है. इसी कड़ी में गिरफ्तारी और आपराधिक मुकदमों से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है.
टैक्स वसूली और जुर्माने की कार्रवाई जारी रहेगी
प्रस्ताव के मुताबिक, गिरफ्तारी की ताकत हटने के बाद भी सरकार टैक्स की वसूली कर सकेगी. अगर किसी कारोबारी ने कम टैक्स जमा किया है या गलत तरीके से ITC का दावा किया है, तो उससे बकाया टैक्स, ब्याज और जुर्माना वसूला जा सकेगा. यानी छोटे टैक्स विवादों में सीधे आपराधिक कार्रवाई करने के बजाय आर्थिक दंड और टैक्स वसूली पर जोर दिया जाएगा.
हालांकि, जानबूझकर टैक्स चोरी करने या धोखाधड़ी के गंभीर मामलों में अदालत के जरिए मुकदमा चलाने का रास्ता खुला रहेगा. प्रस्ताव में आपराधिक मुकदमा शुरू करने की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने की बात है. इससे बड़े मामलों को ही आपराधिक कार्रवाई के दायरे में रखने की कोशिश होगी.
24 अपराधों में नरमी का प्रस्ताव
जीएसटी काउंसिल के सामने 24 अपराधों से जुड़े नियमों में नरमी लाने का प्रस्ताव भी है. इनमें से 9 अपराधों को पूरी तरह हटाने, जबकि 11 को मौजूदा रूप में बनाए रखने की बात कही गई है. न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने का भी प्रस्ताव है, ताकि अदालत हर मामले में जेल की सजा देने के लिए बाध्य न हो. मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा 3 साल से घटाकर 2 साल करने की बात भी शामिल है.
इसके अलावा, छोटे कारोबारियों की लेट फीस माफ करने और जुर्माने को तर्कसंगत बनाने पर भी विचार हो सकता है. कारोबारियों के लिए रजिस्ट्रेशन आसान करने, रिफंड जल्दी देने और इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया सरल बनाने जैसे प्रस्ताव भी पैकेज का हिस्सा हैं.
अब तकनीक से पकड़ में आएगी टैक्स चोरी
जीएसटी लागू होने के समय फर्जी बिल और टैक्स चोरी पकड़ना मुश्किल था. उस वक्त गिरफ्तारी की ताकत को ऐसे अपराधों पर रोक लगाने के एक तरीके के तौर पर देखा गया. अब जीएसटी सिस्टम में खरीदार और विक्रेता की ओर से दी गई जानकारी का मिलान किया जा सकता है. इससे फर्जी ITC की पहचान पहले ही होने की संभावना बढ़ी है.
इस प्रस्ताव के तहत गिरफ्तारी के बजाय तकनीक की मदद से टैक्स चोरी और दूसरी गड़बड़ियों का पता लगाने पर जोर दिया जाएगा. हालांकि, ये सभी बदलाव फिलहाल प्रस्तावित हैं. इन्हें लागू करने के लिए जीएसटी काउंसिल की मंजूरी और कानून में जरूरी बदलाव करने होंगे.
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