अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर से भले ही मिडिल ईस्ट में तनाव कम हुआ है, लेकिन लंबे समय तक चले US-Iran War ने वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) को ऊर्जा संकट के भंवर में फंसाया है और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने गहरी चिंता जताई है. आईएमएफ चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने अलर्ट करते हुए कहा है कि ऊर्जा संकट अभी टला नहीं है और इससे राजकोषीय दबाव लगातार बढ़ता हुआ नजर आ रहा है. उन्होंने कच्चे तेल की कीमतों पर बात की, तो वहीं दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में बढ़ते निवेश को ग्रोथ इंजन बताया.
कुछ देशों की स्थिति चिंताजनक
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की एमडी क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने ईरान युद्ध के चलते पैदा हुए ऊर्जा संकट का सामना बेहतर तरीके से किया है, लेकिन कुछ देशों में बिगड़ती वित्तीय स्थितियां चिंताजनक हैं, जो 19 साल के हाई पर पहुंची बॉन्ड यील्ड से स्पष्ट है. IMF Chief जॉर्जीवा ने अगले सप्ताह उत्तरी कैरोलिना के ऐशविले में होने वाली Group Of 20 के फाइनेंस लीडर्स की बैठक से पहले ये बयान दिया है.
वैश्विक विकास में ये चुनौतियां
जॉर्जीवा ने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक के लिए जोखिम अप्रैल की तुलना में अधिक संतुलित हैं, लेकिन बढ़ते राजकोषीय दबावों और केंद्रीय बैंकों को महंगाई कंट्रोल करने के लिए सख्त मौद्रिक नीति बनाए रखने के चलते बने हुए हैं. अमेरिका-ईरान में युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से पैदा हुए ऊर्जा संकट को हमारी आशंकाओं से बेहतर ढंग से संभाला गया है, लेकन वैश्विक विकास अब कर्ज के उच्च स्तर, अनियंत्रित महंगाई और ट्रेड टेंशन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है.
एनर्जी संकट के बीच AI से विकास को बढ़ावा
IMF चीफ ने कहा कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश से कंपनियों की आय और उपभोक्ता खर्च मजबूत बने हुए हैं, वहीं अन्य देश डेटा सेंटर निर्माण और एआई हार्डवेयर आपूर्ति को लगातार बढ़ा रहे हैं. एआई और डेटा केंद्रों पर खर्च से विकास को बढ़ावा मिल रहा है. उन्होंने कहा, AI के साथ जो एक अमेरिकी घटना के रूप में शुरू हुआ था, वह अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक विकास इंजन बन रहा है, जिसमें अन्य देश डेटा केंद्रों और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण को बढ़ा रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय निकाय ने वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर अपनी समीक्षा में कोई नया पूर्वानुमान शामिल नहीं किया, जिसे जुलाई में 2026 के लिए घटाकर सुस्त 3% किया था. इसके साथ ही मिडिल ईस्ट युद्ध, व्यापार तनाव और संभावित एआई अनिश्चितता से होने वाले नकारात्मक जोखिमों की चेतावनी दी थी. इस अनुमान को अक्टूबर के मध्य में बैंकॉक में होने वाला IMF-World Bank Meet में अपडेट किया जाएगा.
कच्चा तेल और महंगाई का जोखिम
जॉर्जीवा ने नीति निर्माताओं को सबकुछ सामान्य होने की धारणा से बाहर निकलने के लिए अलर्ट किया, उन्होंने कहा कि बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड तेल की कीमतें जून के मध्य से 80-90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बनी हुई हैं. यानी ऊर्जा संकट अभी खत्म नहीं हुआ है. आईएमएफ चीफ ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी महंगाई को बढ़ा सकती है, जिससे केंद्रीय बैंकों को प्रतिबंधात्मक नीति अपनानी पड़ेगी, जिसका असर कर्ज चुकाने की लागत और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि सभी देशों को अपनी वित्तीय समस्याओं से निपटना होगा. उन्हें अपने कर्ज और घाटे को एक स्थायी मार्ग पर सुनिश्चित करने के लिए विश्वसनीय योजनाएं तैयार करनी होंगी और अमल में लाना होगा. क्रिस्टालीना जॉर्जीवा ने कहा कि लगातार महंगाई के जोखिमों के बीच केंद्रीय बैंकों को मूल्य स्थिरता पर पूरी तरह से फोकस करना होगा, जबकि सख्त मौद्रिक नीति विकास को धीमा कर देगी.
आजतक बिजनेस डेस्क