स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर आई बड़ी खबर... कच्चे तेल का दाम $80 प्रति बैरल के नीचे फिसला

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 4.5 फीसदी गिरकर 79.96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया और 80 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया. गिरावट की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से खुलने की संभावना बढ़ी है.

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अमेरिका-ईरान वार्ता में सकारात्मक संकेत और होर्मुज में आवाजाही बहाल होने की उम्मीदों से ब्रेंट क्रूड $80 प्रति बैरल से नीचे गिरा. (File Photo) अमेरिका-ईरान वार्ता में सकारात्मक संकेत और होर्मुज में आवाजाही बहाल होने की उम्मीदों से ब्रेंट क्रूड $80 प्रति बैरल से नीचे गिरा. (File Photo)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:48 AM IST

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली. ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.5 फीसदी की गिरावट के साथ 79.96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया और 80 डॉलर के अहम स्तर से नीचे फिसल गया. बाजार में यह नरमी अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की बढ़ती उम्मीदों के बाद आई है. बाजार का रुख उस वक्त बदला जब अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर समझौते का ऐलान 'आज या कल' हो सकता है.

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है. ऐसे में इस मार्ग के सामान्य होने की उम्मीद से बाजार में राहत का माहौल बना. सिर्फ अमेरिका ही नहीं, कतर की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिले हैं. कतर के अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के लिए एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क तैयार किया गया है. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी के मुताबिक, कतर, ओमान और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

हालांकि, बाजार की दिशा को लेकर अभी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है. इंवेस्टमेंट बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का मानना है कि निकट भविष्य में ब्रेंट क्रूड 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर सकता है. बैंक के अनुसार, बाजार को अभी किसी निर्णायक संकेत का इंतजार है. यदि नया अमेरिका-ईरान परमाणु समझौता होता है तो तस्वीर बदल सकती है, वहीं क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की स्थिति में भी तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है.

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मध्य पूर्व से तेल सप्लाई को लेकर चिंता बरकरार

गोल्डमैन सैक्स ने ब्रेंट क्रूड की फेयर वैल्यू करीब 80 डॉलर प्रति बैरल आंकी है. बैंक का कहना है कि मौजूदा कीमतों में जियोपॉलिटिकल जोखिम का असर सीमित दिखाई दे रहा है, लेकिन मध्य पूर्व से तेल सप्लाई को लेकर चिंता अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. बैंक के मुताबिक, हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित समुद्री आवाजाही पर बातचीत में प्रगति हुई. इन घटनाक्रमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला.

खाड़ी क्षेत्र से वैश्विक तेल निर्यात में 44% गिरावट

हालांकि दूसरी ओर सप्लाई से जुड़े जोखिम अभी भी बने हुए हैं. गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में वैश्विक विजिबल ऑयल इन्वेंट्री में औसतन 6.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन की गिरावट दर्ज की गई है. इसकी मुख्य वजह खाड़ी क्षेत्र और रेड सी से कच्चे तेल की कम सप्लाई, रूस के घटते निर्यात और एशिया में मजबूत आयात मांग रही है. बैंक ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात अब संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर के मुकाबले केवल 36 फीसदी रह गया है, जबकि जुलाई की शुरुआत में यह करीब 80 फीसदी था. रेड सी में टैंकरों की आवाजाही भी कमजोर बनी हुई है.

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तनाव दोबारा बढ़ने पर $90 तक पहुंचेगी कीमत

हूती हमलों, समुद्री सुरक्षा संबंधी जोखिमों और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण रूस के कच्चे तेल का निर्यात भी प्रभावित हुआ है. फिलहाल तेल बाजार दो विपरीत संकेतों के बीच फंसा हुआ है. एक ओर अमेरिका-ईरान वार्ता से बाजार का सेंटिमेंट बेहतर हुआ है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक सप्लाई में बनी तंगी कीमतों को सहारा दे रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक तेल सप्लाई के ताजा आंकड़ों पर नजर रहेगी. यदि अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की औपचारिक पुष्टि होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में और नरमी दिख सकती है. यदि तनाव दोबारा बढ़ता है या सप्लाई बाधित रहती है तो ब्रेंट क्रूड फिर 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में लौट सकता है.

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