बिहार: सरकारी अस्पताल में बड़ी लापरवाही, बिजली कटी तो डॉक्टरों ने टॉर्च जलाकर किया ट्रीटमेंट- VIDEO

सासाराम सदर अस्पताल के मॉडल हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में बिजली गुल होने के बाद मरीजों का इलाज मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में करना पड़ा. घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की बिजली व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.

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बिजली कटने के बाद मोबाइल के टॉर्च से इलाज करते डॉक्टर. (Photo: Screengrabs) बिजली कटने के बाद मोबाइल के टॉर्च से इलाज करते डॉक्टर. (Photo: Screengrabs)

रंजन कुमार 

  • रोहतास,
  • 08 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 3:29 PM IST

बिहार के रोहतास जिले के सासाराम सदर अस्पताल के मॉडल हॉस्पिटल से स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने वाली तस्वीरें सामने आई हैं. जहां अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अचानक बिजली गुल होने के बाद मरीजों का इलाज मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में करना पड़ा. इस दौरान डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ भी मोबाइल की रोशनी का सहारा लेते नजर आए. घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

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दरअसल, सासाराम सदर अस्पताल में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए अलग ट्रांसफार्मर की व्यवस्था की गई है. इसके अलावा अस्पताल में जनरेटर समेत बिजली के वैकल्पिक इंतजाम भी मौजूद हैं. बावजूद इमरजेंसी वार्ड में अचानक बिजली चली गई. बिजली नहीं रहने के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.

इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान बिजली गुल होने के बाद डॉक्टरों ने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर मरीजों की जांच और इलाज किया. इसी दौरान किसी ने इसका वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया और मीडिया में वायरल हो रहा है. तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि अंधेरे में मोबाइल की रोशनी के सहारे मरीजों का इलाज किया जा रहा है.

डीएम ने बिजली व्यवस्था की जांच के लिए गठित की टीम
मामला सामने आने के बाद रोहतास डीएम दीपक कुमार मिश्रा ने घटना का संज्ञान लिया. डीएम ने बताया कि मीडिया में मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में मरीजों के इलाज का वीडियो वायरल होने के बाद मामले की जांच कराई गई. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि MCB डाउन होने के कारण करीब दो मिनट के लिए बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी.

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डीएम ने कहा कि घटना की वास्तविक वजह और अस्पताल की बिजली व्यवस्था की स्थिति की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है. जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. हालांकि, इमरजेंसी वार्ड में महज कुछ मिनट की बिजली कटौती के दौरान भी मरीजों को मोबाइल की रोशनी में इलाज कराने की नौबत आने से अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं.

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