बिहार के गया जिले में कुछ सड़कें ऐसी हैं, जहां शाम ढलते ही लड़कियां अकेले निकलने से बचती हैं. वजह सड़कें नहीं, उन सड़कों के किनारे खड़े वो लड़के हैं, जो आने-जाने वाली लड़कियों पर फब्तियां कसते हैं, छेड़छाड़ करते हैं और उन्हें परेशान करते हैं. अब ऐसे मनचलों के लिए गया पुलिस ने एक नया इंतजाम किया है. नाम है- 'पुलिस दीदी'... मतलब अब उन इलाकों में सिर्फ पुलिस की गाड़ी नहीं दिखेगी, बल्कि स्कूटी और बाइक पर महिला पुलिसकर्मियों की टीम भी नजर आएगी.
अगर कोई मनचला महिलाओं या छात्राओं को परेशान करता मिला, तो पुलिस दीदी सिर्फ समझाएंगी नहीं, जरूरत पड़ी तो एक्शन भी लेंगी. 28 अगस्त को गया पुलिस लाइन में इस पहल की शुरुआत हुई. गया के एसएसपी सुशील कुमार ने हरी झंडी दिखाकर स्कूटी और बाइक सवार महिला पुलिसकर्मियों के दस्ते को रवाना किया. इसके साथ ही शहर के संवेदनशील इलाकों में महिला पुलिस की विशेष गश्त शुरू हो गई.
पुलिस ने शहर में कई ऐसे हॉटस्पॉट मार्क किए हैं, जहां महिलाओं और छात्राओं की आवाजाही ज्यादा है या जहां सुनसान होने की वजह से छेड़छाड़ का खतरा रहता है. अब इन जगहों पर पुलिस दीदी नियमित रूप से गश्त करेंगी.
गया पुलिस का प्लान सिर्फ सुनसान सड़कों तक सीमित नहीं है. स्कूल-कॉलेज. कोचिंग सेंटर. बाजार और महिलाओं की ज्यादा आवाजाही वाली जगहें. इन सभी जगहों पर महिला पुलिसकर्मियों की निगरानी रहेगी. यानी सुबह स्कूल जाती छात्राएं हों, दोपहर में कॉलेज से लौटती लड़कियां या शाम को कोचिंग से घर जाने वाली छात्राएं- पुलिस की कोशिश है कि रास्ते में उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो. खास तौर पर उन जगहों पर नजर रखी जाएगी, जहां कुछ लड़के अक्सर खड़े होकर लड़कियों को परेशान करते हैं.
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एसएसपी सुशील कुमार ने बताया कि बिहार सरकार की ओर से सभी जिलों में बाइक और स्कूटी उपलब्ध कराई गई हैं. इसी क्रम में गया जिले को 70 स्कूटी मिली हैं. इन स्कूटी की मदद से महिला पुलिसकर्मी शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से पहुंच सकेंगी.
इसका एक फायदा ये भी होगा कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी सिर्फ मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी. छोटी गलियों और उन जगहों तक भी पहुंचना आसान होगा, जहां पुलिस की सामान्य गश्त कम दिखाई देती है.
डायल 112 से भी जुड़ी रहेगी टीम
'पुलिस दीदी' की टीम को डायल 112 से भी जोड़ा गया है. मतलब अगर किसी इलाके में कोई घटना होती है या महिला पुलिस की जरूरत पड़ती है, तो टीम आपातकालीन सेवा के साथ संपर्क में रहकर तेजी से मौके तक पहुंच सकती है. गया में बड़ी संख्या में छात्राएं स्कूल, कॉलेज और कोचिंग के लिए रोज घर से निकलती हैं. इनमें कई ऐसी भी हैं, जिन्हें देर होने पर सुनसान रास्तों से गुजरना पड़ता है. ऐसे में रास्ते में महिला पुलिस की मौजूदगी उन्हें सुरक्षा का एहसास दे सकती है.
आमतौर पर पुलिस का नाम सुनते ही दिमाग में वर्दी, गाड़ी और कार्रवाई की तस्वीर आती है. लेकिन 'पुलिस दीदी' में पुलिस का एक दूसरा चेहरा सामने लाने की कोशिश है. ऐसा चेहरा, जिससे छात्राएं और महिलाएं जरूरत पड़ने पर आसानी से बात कर सकें. एक ऐसी पुलिस, जिसे देखकर कोई लड़की ये सोच सके कि अगर रास्ते में परेशानी हुई तो मदद के लिए कोई मौजूद है. गया पुलिस ने पहल शुरू कर दी है.
पंकज कुमार