बिहार की राजनीति में समान नागरिक संहिता (UCC) और आरक्षण की समीक्षा को लेकर सत्ताधारी एनडीए (NDA) के भीतर से अलग-अलग सुर निकलकर सामने आ रहे हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बीजेपी शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने के बयानों के बीच, बिहार में सहयोगी दलों के मंत्रियों ने इस मुद्दे पर फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं.
'बिहार पंचायत आजतक' के मंच पर 'सबका साथ सबका विकास' सेशन में एनडीए कोटे के जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष सुमन, पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश और गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार पासवान ने आपनी बात बेबाकी रखी. इस दौरान यूसीसी पर तीनों ही दलों ने पत्ते नहीं खोले बल्कि आरक्षण के मुद्दे पर संतोष मांझी और संजय पासवान एक दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आए.
यूसीसी पर एनडीए के सहयोगी की कशमकश
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के सवाल पर एनडीए कोटे के तीनों मंत्रियों ने कहा कि बिहार में 5 दलों की गठबंधन सरकार है, इसलिए किसी भी फैसले से पहले सभी सहयोगियों के बीच समन्वय और सहमति होना बेहद जरूरी है.
डा. संतोष सुमन ने कहा कि बिहार में गठबंधन की सरकार है, इसीलिए समन्वय बनाकर ही कोई फैसला होगा. गृहमंत्री का हम सब सम्मान करते हैं, उनकी बातों से इत्तेफाक भी हम लोग रखते हैं, लेकिन बिहार के परिप्रेक्ष्य में अगर कहेंगे तो यहां की स्थिति अलग है. कोई चीज अगर लार्जर इंटरेस्ट या फिर बिहार के इंटरेस्ट में है तो हम उसे समर्थन करेंगे, लेकिन यूसीसी की बात अभी बहुत प्रीमैच्योर है. अभी इस तरह की बातें हम लोग (एनडीए) के बीच में नहीं हुई है और जब ऐसी कोई बात आएगी उसको लागू करने की बात आएगी तो उस पर विचार केंगे.
संतोष सुमन ने कहा कि उत्तराखंड या गुजरात का मॉडल सीधे बिहार पर लागू नहीं किया जा सकता. बिहार का अपना परिप्रेक्ष्य है. उन्होंने कह कि यूसीसी पर अभी कुछ भी कहना बहुत जल्दबाजी होगी. हमारे सामने अभी कोई प्रस्ताव या ड्राफ्ट नहीं आया है. जब ड्राफ्ट आएगा, तो हम उसका अध्ययन करेंगे और बिहार के लार्जर इंटेस्ट में जो जरूरी संशोधन या सुझाव होंगे, उन्हें रखेंगे.
वहीं, उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और सम्राट सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया कि संविधान सभी को समान दृष्टि से देखता है, लेकिन इसमें कुछ विशेष वर्गों या समुदायों के उत्थान के लिए अपवाद भी शामिल हैं. उन्होंने कहा,जब तक यूसीसी का लिखित प्रस्ताव सामने नहीं आता, तब तक उसका मूल्यांकन करना संभव नहीं है. यदि इसमें सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा जाएगा, तो इस पर विचार किया जा सकता है.,
एलजेपी कोटे से बिहार में मंत्री संजय कुमार पासवान ने कहा कहा कि उनकी पार्टी यूसीसी के सैद्धांतिक विरोध में नहीं है. उन्होंने वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने अल्पसंख्यक समाज से चर्चा के बाद अपना रुख तय किया था, उसी तरह यूसीसी का ड्राफ्ट आने पर समाज के विभिन्न वर्गों से बात करके ही फैसला लिया जाएगा. इससे पहले भी हमने वक्फ बिल पर भी सभी की राय लेकर ही समर्थन किया है.
'बटोगे तो कटोगे' नारे से तीनों ने बनाई दूरी
छोटी पार्टियों के वजूद और बीजेपी के साथ वैचारिक मतभेदों के सवाल पर मंत्रियों ने कहा कि एनडीए में कोई 'छोटा भाई या बड़ा भाई' नहीं है. सरकार 'कॉमन मिनिमम प्रोग्राम' के तहत चल रही है और सभी महत्वपूर्ण फैसलों में सहयोगियों को विश्वास में लिया जाता है.
हालांकि, उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चित रहे बटोगो तो कटोगो के नारे से सहयोगियों ने स्पष्ट दूरी बना ली. दीपक प्रकाश ने साफ तौर पर कहा, "हम इस प्रकार के नारे से इत्तेफाक नहीं रखते हैं. यदि किसी नारे का इस्तेमाल एक समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ खड़ा करने के लिए किया जाता है, तो हमारी पार्टी ऐसे विचारों का समर्थन नहीं करती.
आरक्षण और वर्गीकरण पर भी अलग-अलग राय
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) में उप-वर्गीकरण (और क्रीमी लेयर लागू करने के सवाल पर भी सहयोगियों के बीच वैचारिक भिन्नता दिखी. मंत्रियों ने माना कि अलग-अलग जनाधार और विचारधारा होने के कारण ही अलग पार्टियां हैं, लेकिन सरकार चलाने के लिए सभी एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर साथ आते हैं.
मंत्रियों का साफ कहना है कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और सभी वर्गों को समान अवसर मिलना चाहिए. फिलहाल, एनडीए के सहयोगी मंत्रियों के इस रुख से साफ है आरक्षण के मुद्दे पर एकमत नहीं है. हम के नेता और मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि हम आरक्षण को खत्म करने की बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन इतने समय के बाद भी समाज में बहुत बड़ा तबका है, जिसे आरक्षण का लाभ नहीं मिला. ऐसे में समीक्षा की बात कर रहे हैं और जिन्हें आरक्षण नहीं मिला, उन्हें कैसे दिया जाए, उस पर बात होनी चाहिए.
वहीं, संजय पासवान ने कहा कि आरक्षण की व्यवस्था आर्थिक आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक आधार पर दिया गया है. समाज में आज भी जाति व्यवस्था कायम है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मु और जीतनराम मांझी भी अगर किसी मंदिर में जाते हैं, तो उसे धुलवाया जाता है. ऐसे में आरक्षण की समीक्षा की बात नहीं होनी चाहिए.
अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) के वर्गीकरण और क्रीमी लेयर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कहा देश संविधान से चलता है. संविधान द्वारा दलितों, वंचितों और शोषितों को जो भी अधिकार दिए गए हैं, उनसे कोई समझौता नहीं किया जाएगा. हर नागरिक को समानता का अधिकार है और सरकार संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
बीजेपी के सहयोगी दल क्या संतुष्ट हैं?
छोटी पार्टियों को बड़ी पार्टियों से मिलने वाली चुनौती और पार्टी के विलय के पर दीपक प्रकाश ने कहा कि भारत की सामाजिक विविधताओं के कारण ही अलग-अलग विचारधाराओं की जरूरत पड़ती है. जब तक विचारधारा अलग है, तब तक विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता.
उन्होंने कहा कि मंत्रियों ने कहा कि हम मंत्री बनने या सौदेबाजी करने के लिए गठबंधन में नहीं आए हैं. बिहार के विकास और जनता के हित के लिए अगर कहीं समझौता करना पड़ता है, तो वह तालमेल (Coordination) का हिस्सा है. सरकार 'कॉमन मिनिमम प्रोग्राम' के तहत चल रही है. एनडीए में कोई बड़ा भाई या छोटा भाई नहीं है, सभी घटक दल समान रूप से सरकार का हिस्सा हैं और हर बड़े फैसले में सहयोगियों को पूरी तरह विश्वास में लिया जाता है.
नेतृत्व और मुख्यमंत्री के मुद्दे पर सहमति
बिहार में नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों पर सहयोगियों ने कहा कि एनडीए में सर्वसम्मति से फैसले लिए जाते हैं. पहले नीतीश कुमार जी को सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री माना गया था और अब एनडीए के सभी घटक दलों ने मिलकर आदरणीय सम्राट चौधरी जी के नेतृत्व को स्वीकार किया है. इसमें किसी भी पार्टी पर कोई फैसला थोपा नहीं गया है.
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