इथेनॉल... इस वक्त इथेनॉल चर्चा में बना हुआ है और वजह हर किसी से इसका जुड़ा होना है. अगर आप आज कार या बाइक में पेट्रोल भरवा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि इसमें इथेनॉल भी आ रहा है. इथेनॉल को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के कंटेंट मिल जाएंगे.
कोई इसे पेट्रोल से अलग करने का तरीका बता रहा है, तो कोई इसकी वजह से गाड़ियों को होने वाले नुकसान की जानकारी दे रहा है. लेकिन एक कार या बाइक के बारे में उसे मैन्युफैक्चर्र से बेहतर कौन बता सकता है. साथ ही उस वाहन को बनाने वाला क्या कहता है इससे कंज्यूमर्स पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा.
इथेनॉल को लेकर एक्सपर्ट्स के एक पैनल ने सोशल मीडिया पर चल रहे तमाम दावों का जवाब दिया है. इस पैनल में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) की पूर्व सीएमडी वर्किता शुक्ला, बजाज ऑटो सर्किल के प्रमुख मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वॉयस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर) प्रसाद कृष्णण और दूसरे लोग शामिल हैं.
मास मार्केट में यानी ज्यादातर लोगों को जो पेट्रोल इस वक्त मिल रहा है, उसमें 20 फीसदी इथेनॉल है. यानी E20 पेट्रोल हर जगह अभी भारत में मिल रहा है. सरकार ने E85 यानी 85 परसेंट इथेनॉल वाला पेट्रोल भी लॉन्च किया है, लेकिन सीमित जगहों पर ही मिल रहा है और सभी लोगों तक फिलहाल नहीं पहुंचा है.
इथेनॉल को लेकर लोगों का सबसे बड़ा डर उनकी पुरानी गाड़ियों से जुड़ा हुआ है. 2023 के बाद आने वाले सभी गाड़ियां E20 कंप्लायंट हैं. हालांकि, फिर भी लोगों के मन में इस फ्यूल को लेकर कई तरह के सवाल हैं, जिसके जवाब में देश की कई बड़ी कंपनियों ने अपना पक्ष रखा है.
वर्तिका शुक्ला (पूर्व CMD, EIL) ने इस मुद्दे पर कहा कि भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग रातोंरात नहीं हुई है. E20 ब्लेंडिंग का टार्गेट दिसंबर 2025 में ही पूरा कर लिया गया था. इसे लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने बड़े स्तर पर टेस्ट किए थे. ई20 फ्यूल का मुख्य उद्देश्य कार्बन एमिशन को कम करना है.
उन्होंने बताया कि कनाडा और पैराग्वे जैसे कई देशों में पहले से E20 फ्यूल इस्तेमाल हो रहा है. E20 भारत के BS-VI (भारत स्टेज 6) नॉर्म्स के अनुरूप है.
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड और एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट अफेयर्स और गवर्नेंस) विक्रम गुलाटी ने बताया कि इथेनॉल एक बेहतरीन फ्यूल है. 1900 के शुरुआती दौर में बनी कई कारें इथेनॉल बेस्ड थीं. फॉर्मूला-1 रेसिंग में भी इथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है.
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'इथेनॉल के इस्तेमाल से कार्बन एमिशन में बड़ी कमी आती है. 2023 के बाद भारत में बेचे गए सभी व्हीकल E20 कम्प्लायंट हैं. 2023 से पहले के वाहन भी बिना किसी बड़ी समस्या के E20 पर चल सकते हैं. स्टडी से पता चलता है कि E20 फ्यूल इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 4 से 5 परसेंट की मामूली कमी आ सकती है.'
विक्रम गुलाटी ने ये भी बताया कि E85 केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल के लिए है. फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल में किसी भी रेशियो में इथेनॉल ब्लेंड फ्यूल का इस्तेमाल किया जा सकता है. E85 की कीमत कम होती है और इससे अतिरिक्त इथेनॉल की खपत बढ़ेगी. उन्होंने बताया कि फ्यूल की वजह से गाड़ियों में दिक्कत आने की जो शिकायतें सामने आई हैं, उनमें ज्यादातर मामलों में मिलावटी फ्यूल पाया गया है.
वहीं मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने बताया कि भारत में 2023 से E20 फ्यूल वाले वाहनों को अनिवार्य किया गया है. सबसे बड़ा सवाल उन गाड़ियों को लेकर है, जो 2023 से पहले बनाए और बेचे गए हैं. इसी मुद्दे पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया गया. E20 को लेकर हमें कोई चिंता वाली बात नहीं मिली.
राहुल भारती ने बताया कि अगर E10 के लिए बनी कारों में E20 फ्यूल इस्तेमाल किया जाता है, तो हमें कोई गंभीर समस्या नहीं मिली है. मारुति ने खुद इस पर टेस्ट किए हैं और चिंता की कोई वजह नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि हमने 2.8 करोड़ कारों की सर्विसिंग की है, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ व्हीकल तीन साल से अधिक पुराने थे. यानी ये E10 वाहन थे, इन वाहनों में भी E20 के कारण कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई है.
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हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर आशुतोष वर्मा ने बताया कि हम लोगों की सभी आशंकाओं को दूर करने आए हैं. E20 फ्यूल पर चलने वाले वाहनों में सामान्य ईंधन की तुलना में किसी अतिरिक्त नुकसान के प्रमाण नहीं मिले हैं.
हुंडई इंडिया के प्रतिनिधि पुनीत आनंद ने बताया कि फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स फ्यूचर की टेक्नोलॉजी हैं. इनमें कंज्यूमर्स पेट्रोल पंप पर उपलब्ध किसी भी इथेनॉल ब्लेंड वाले फ्यूल का इस्तेमाल कर सकेंगे. इस फ्यूल से जंग लगने को लेकर पहले ही व्यापक परीक्षण किए गए हैं. सभी वाहन निर्माताओं ने अपने वाहनों का परीक्षण ARAI में कराया है. हम हमेशा अपने ग्राहकों के लिए मौजूद हैं.
इस पूरे मामले को असर आसान भाषा में कहा जाए, तो इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंड खासकर E20 फ्यूल के फिलहाल वाहनों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हो रहा है और ना ही जांच में ऐसी कोई चिंता करने वाली बात मिली है. जहां तक सवाल माइलेज का है, तो वो जरूर 4 से 5 परसेंट तक कम हुआ है. मगर माइलेज में ये गिरावट मामूली है.
वहीं अगर इथेनॉल वाले फ्यूल की वजह से जंग लगने की बात की जाए, तो कंपनियों का कहना है कि फिलहाल ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है. कुछ गाड़ियों के खराब होने की जो शिकायत आई भी हैं, तो उसमें E20 नहीं बल्कि मिलावटी पेट्रोल इस्तेमाल किया गया था, जिसकी वजह से दिक्कत हुई है.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क