E20 फ्यूल को लेकर इस वक्त खूब शोर मचा हुआ है. खासकर वे लोग ज्यादा परेशान हैं, जो पुरानी गाड़ियां इस्तेमाल कर रहे हैं. अप्रैल 2023 से पहले बनी देश में ज्यादातर गाड़ियां (कार और बाइक) E10 कंप्लायंट थी. सरकार ने बुधवार को बताया है कि बीएस 3 पर काम करने वाली गाड़ियों में कुछ रबर पार्ट्स और गैसकेट जैसे चीजों को बदलना पड़ सकता है.
बीएस-3 यानी वो गाड़ियां जो 1 अप्रैल 2005 के बाद और 2016 से पहले मैन्युफैक्चर हुई हैं. इन गाड़ियों में ई20 फ्यूल का इस्तेमाल करने की वजह से कुछ पार्ट्स को बदलना पड़ सकता है. ये जानकारी सरकार ने दी है.
राज्यसभा में दिए गए लिखित जवाब में रोड ट्रांसपोर्ट और हाईवे मिनिस्टर नितिन गडकरी ने बताया कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से गाड़ी के माइलेज पर पड़ने वाले असर को लेकर, ऑटोमोबाइल कंपनियों और टेस्टिंग एजेंसियों ने साफ किया है कि माइलेज सिर्फ फ्यूल पर नहीं बल्कि कई वजहों से भी प्रभावित होता है.
उन्होंने बताया कि ई20 फ्यूल के प्रभाव को लेकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम देहरादून, SIAM (सोसाइटी ऑफ ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्र्स) और एआरएआई (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोशिएशन ऑफ इंडिया) ने एक स्टडी की है.
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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस स्टडी में कार या टू-व्हीलर इंजन में ई20 फ्यूल के लिए किसी बदलाव की जरूरत सामने नहीं आई है. नितिन गडकरी के मुताबिक, इस स्टडी में पुरानी गाड़ियों की परफॉर्मेंस पर कोई खास प्रभाव नहीं दिखा है. ना ही इनमें ई20 की वजह से कोई असामान्य टूट-फूट देखी गई.
उन्होंने बताया कि व्हीकल की ड्राइविंग में, स्टार्ट होने में, मेटल कम्पैटिबिलिटी और प्लास्टिक कम्पैटिबिलिटी जैसे पैरामीटर्स में कोई समस्या नहीं पाई गई. गडकरी ने बताया, 'सिर्फ बीएस-3 व्हीकल्स की टेस्टिंग में कुछ रबर पार्ट्स और गैसकेट्स को बदलने की जरूरत पड़ेगी, जिसे रूटिन सर्विसिंग में आसानी से मैनेज किया जा सकता है.'
ई20 पेट्रोल के रोलआउट के बाद से ही लोग इसका विरोध कर रहे हैं. देश में विपक्ष से लेकर कई कंज्यूमर्स तक इस पर शिकायत कर रहे हैं. खासकर सोशल मीडिया पर लोग ई20 फ्यूल के खिलाफ काफी बोल और लिख रहे हैं. ई20 फ्यूल में 80 परसेंट पेट्रोल में 20 परसेंट इथेनॉल का ब्लेंड होता है.
आजतक ऑटोमोबाइल डेस्क