गोकुल-वृंदावन से कुरुक्षेत्र तक श्रीकृष्ण की गाथा, जन्माष्टमी पर कमानी ऑडिटोरियम में विशेष मंचन

श्रीराम भारतीय कला केंद्र की नृत्य नाटिका 'कृष्णा' इस जन्माष्टमी पर 50 साल पूरे कर रही है. कमानी ऑडिटोरियम में यह प्रस्तुति जन्माष्टमी तक जारी रहेगी, जिसमें भगवान कृष्ण के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को मंच पर प्रदर्शित किया जा रहा है.

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जन्माष्टमी के मौके पर श्रीराम भारतीय कला केंद्र की ओर से नृत्य नाटिका श्रीकृष्णा का मंचन जन्माष्टमी के मौके पर श्रीराम भारतीय कला केंद्र की ओर से नृत्य नाटिका श्रीकृष्णा का मंचन

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:46 PM IST

नई दिल्ली के श्रीराम भारतीय कला केंद्र (SBKK) की प्रसिद्ध नृत्य नाटिका 'कृष्णा' इस जन्माष्टमी पर अपने प्रदर्शन के 50 साल पूरे कर रही है. इस खास मौके पर 'कृष्ण' का मंचन 29 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में किया जा रहा है. हर दिन शाम 6:30 बजे से शो हो रहे हैं और जन्माष्टमी के दिन 4 सितंबर को दोपहर 3 बजे भी विशेष शो रखा गया है.

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'कृष्णा' श्रीराम भारतीय कला केंद्र की सबसे चर्चित प्रस्तुतियों में शामिल है और हर साल जन्माष्टमी के अवसर पर इसका मंचन किया जाता है. इसकी मूल परिकल्पना सुमित्रा चरत राम ने 'कृष्ण अवतार' के रूप में की थी. मौजूदा प्रस्तुति का निर्देशन पद्मश्री शोभा दीपक सिंह, अध्यक्ष, श्रीराम भारतीय कला केंद्र ने किया है. कोरियोग्राफी शशिधरन नायर की है, जिसमें राज कुमार शर्मा ने सहयोग दिया है.

गोकुल से कुरुक्षेत्र तक दिखाई गई कृष्ण की यात्रा

नृत्य नाटिका में भगवान कृष्ण के जीवन को गोकुल और वृंदावन से लेकर कुरुक्षेत्र तक प्रस्तुत किया गया है. इसमें राधा-कृष्ण के संबंध, कंस वध और महाभारत में कृष्ण की भूमिका के साथ अर्जुन को दिए गए गीता के उपदेश को भी शामिल किया गया है. प्रस्तुति के जरिए संयम, क्षमा, कर्तव्य और नैतिक निर्णय जैसे विषयों को सामने लाने का प्रयास किया गया है.

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कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि पर कृष्ण और अर्जुन के संवाद के माध्यम से भगवद्गीता के संदेश को शांति और जिम्मेदारी से कर्म करने की सीख के रूप में पेश किया गया है.

50 साल की यात्रा पर शोभा दीपक सिंह ने कहा कि 'कृष्ण' ने पांच दशकों के दौरान हर पीढ़ी को उसी कथा को अपने समय के सवालों के जरिए देखने का अवसर दिया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा दर्शक भी इस प्रस्तुति में अपने जीवन से जुड़ी कोई बात खोज पाएंगे.

डिजिटल स्क्रीन के बजाय हस्तनिर्मित सेट

इस बार प्रस्तुति में LED स्क्रीन और डिजिटल बैकड्रॉप के बजाय हस्तनिर्मित सेट और लाइव स्टेज डिजाइन पर जोर दिया गया है. वाइस चेयरपर्सन गौरी कीलिंग के मार्गदर्शन में इन-हाउस तैयार किए गए कॉस्ट्यूम, आभूषण, विशेष सेट और लाइट डिजाइन प्रस्तुति का प्रमुख हिस्सा हैं.

SBKK के निदेशक जयंत कस्तुआर के मुताबिक, केंद्र की प्रस्तुतियां भारतीय परंपराओं में मजबूती से जुड़ी रही हैं. इनमें बॉलीवुड शैली के प्रदर्शन से अलग शास्त्रीय नृत्य, संगीत और पारंपरिक शिल्प के जरिए भव्यता पैदा करने पर जोर रहता है.

'कृष्ण' के संगीत में मुख्य रूप से भक्ति शैली की रचनाओं का इस्तेमाल किया गया है. इसके गीत बड़े पैमाने पर सूरदास के 'सूरसागर' से लिए गए हैं और मूल ब्रजभाषा में गाए जाते हैं. कथा में कृष्ण को ईश्वर के साथ-साथ ग्रामीण समुदायों के रक्षक और जननायक के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है. करीब 2 घंटे 20 मिनट की यह नृत्य नाटिका इंटरवल सहित प्रस्तुत की जा रही है. इसका मंचन श्रीराम भारतीय कला केंद्र की केंद्र डांस रिपर्टरी कर रही है.

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