एक खेत, 6 तरीके की कमाई... ये मॉडल खोल देगा किसानों की किस्मत

गया में दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय ने दो एकड़ जमीन पर एकीकृत खेती का मॉडल तैयार किया है, जहां गाय, बकरी, मुर्गी, बतख, मछली, फल और सब्जियां साथ में शामिल हैं. यह तरीका किसान को एक फसल पर निर्भरता घटाकर कमाई के कई रास्ते बनाने में मदद दिखाता है.

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दो एकड़ का इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग मॉडल एक खेत से आय के कई स्रोत बनाने में सहायक हो सकता है. (File Photo) दो एकड़ का इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग मॉडल एक खेत से आय के कई स्रोत बनाने में सहायक हो सकता है. (File Photo)

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:31 PM IST

खेती से होने वाली कमाई हर बार एक जैसी नहीं रहती. कभी फसल का भाव गिर जाता है, तो कभी मौसम की मार से उत्पादन कम हो जाता है. ऐसे में किसान के लिए जरूरी है कि वह कमाई के दूसरे रास्ते भी तैयार करे. बिहार के गया जिले में स्थित दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय ने इसी सोच पर दो एकड़ जमीन में खेती और पशुपालन का एक मॉडल तैयार किया है.

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इस मॉडल में एक ही जगह पर गाय, बकरी, मुर्गी, बतख और मछली पालन किया जा रहा है. इसके साथ फल और सब्जियां भी उगाई जा रही हैं. इसका मकसद उपलब्ध जमीन और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है, ताकि किसान को कमाई के लिए सिर्फ एक फसल पर निर्भर न रहना पड़े.

दो एकड़ जमीन वाले किसान भी अपनी जरूरत और उपलब्ध संसाधनों के हिसाब से इस तरह की खेती शुरू कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि जमीन कितनी है, पानी की सुविधा कैसी है और पशुओं के लिए चारे का इंतजाम हो सकता है या नहीं. अगर चारे और जमीन की पर्याप्त व्यवस्था है, तो किसान 6 से 8 दुधारू पशुओं के साथ डेयरी शुरू करने पर विचार कर सकता है.

एक काम से निकली चीज दूसरे काम आएगी

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इस खेती मॉडल की खास बात यह है कि इसमें एक काम से निकलने वाली चीज का इस्तेमाल दूसरे काम में किया जा सकता है. इससे खर्च कम करने में मदद मिल सकती है. उदाहरण के लिए, खेत में फसल कटने के बाद बचा अवशेष पशुओं के चारे के काम आ सकता है. गाय और दूसरे पशुओं के गोबर से जैविक खाद बनाई जा सकती है. इस खाद का इस्तेमाल खेत में किया जा सकता है.

वहीं, तालाब के पानी का इस्तेमाल फसलों की सिंचाई के लिए किया जा सकता है. खेत में उगाया गया चारा भी पशुओं को खिलाया जा सकता है. इस तरह खेती, पशुपालन और मछली पालन एक-दूसरे से जुड़कर काम करते हैं. किसान को बाहर से चारा, खाद और दूसरी चीजें खरीदने पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल सकती है.

एक फसल का भाव गिरा तो दूसरे काम आएंगे

किसान की कमाई काफी हद तक फसल के बाजार भाव पर निर्भर करती है. अगर किसी मौसम में अनाज का भाव कम मिल रहा है, तो किसान को नुकसान हो सकता है. लेकिन खेती के साथ दूसरे काम जुड़े हों, तो कमाई के विकल्प बढ़ जाते हैं. मसलन, किसान दूध, अंडे, मछली, फल और सब्जियां बेचकर भी पैसा कमा सकता है. गोबर से बनी जैविक खाद का इस्तेमाल खेत में किया जा सकता है. जरूरत और बाजार के हिसाब से इसे बेचकर भी कमाई का रास्ता बनाया जा सकता है. इससे किसी एक फसल के खराब होने या उसका भाव गिरने पर किसान की पूरी कमाई पर असर पड़ने का खतरा कम हो सकता है.

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तालाब में मछली-बतख पालन, किनारे सब्जियां

अगर किसान के पास तालाब है, तो वह उसमें मछली पालन के साथ बतख पालन भी कर सकता है. तालाब के आसपास की जमीन पर सब्जियां उगाई जा सकती हैं और फलदार पौधे लगाए जा सकते हैं. इससे तालाब और उसके आसपास की जमीन का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है. किसान को मछली, बतख और सब्जियों से अलग-अलग समय पर कमाई का मौका मिल सकता है. हालांकि, इसके लिए तालाब की स्थिति, पानी की गुणवत्ता और पालन के सही तरीके का ध्यान रखना जरूरी है.

खाली जगह पर लगाएं फलदार पौधे

खेत की मेड़ और खाली पड़ी जगह का इस्तेमाल फलदार पौधे लगाने के लिए किया जा सकता है. यहां आम, अमरूद, नींबू, पपीता, केला और सहजन जैसे पौधे लगाए जा सकते हैं. इन पौधों से समय के साथ फल मिलने लगते हैं, जिन्हें किसान बाजार में बेच सकता है. इससे खेत की उस जगह से भी कमाई का मौका बनता है, जिसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर खेती के लिए नहीं हो पाता. इसके अलावा, किसान छोटे स्तर पर मुर्गी पालन भी शुरू कर सकता है. इससे अंडे और मांस के जरिए अतिरिक्त आमदनी हो सकती है. मुर्गियों के अपशिष्ट को सही तरीके से खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है.

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किसान कैसे शुरू करें ये मॉडल?

एकीकृत खेती शुरू करने के लिए जरूरी नहीं कि किसान सभी काम एक साथ शुरू करे. वह अपनी जमीन, बजट, पानी और बाजार की सुविधा देखकर शुरुआत कर सकता है. उदाहरण के लिए, पहले डेयरी के साथ सब्जियों की खेती शुरू की जा सकती है. बाद में संसाधन और अनुभव बढ़ने पर मुर्गी पालन, बकरी पालन या मछली पालन को जोड़ा जा सकता है. किसान को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पशुओं के लिए चारा, देखभाल, टीकाकरण, साफ पानी और बाजार की व्यवस्था पहले से हो. मछली या बतख पालन शुरू करने से पहले तालाब की उपयुक्तता की जांच करना भी जरूरी है.

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