तेज धूप और सूखी हवा मिट्टी की सतह को 120°F (49°C) से भी ज्यादा गर्म कर सकती है. इससे जड़ों की पानी सोखने की क्षमता कम हो जाती है और पौधे जल्दी मुरझाने लगते हैं. यही वजह है कि गर्मियों में गार्डन की देखभाल और भी जरूरी हो जाती है.
मल्चिंग: सबसे आसान और असरदार तरीका
मल्च यानी सूखी घास, पत्ते, लकड़ी के टुकड़े या कंपोस्ट की परत मिट्टी पर बिछाने से तापमान काफी हद तक नियंत्रित रहता है. मिट्टी से पानी का वाष्पीकरण कम होता है. तापमान 10–20°F तक कम हो सकता है और नमी लंबे समय तक बनी रहती है. मोटे तौर पर 2–4 इंच की मल्च परत गर्मी में सबसे बेहतर मानी जाती है.
पानी देने का सही समय और तरीका
गर्मी में पानी देने का तरीका गलत हो तो मिट्टी और जल्दी सूख जाती है. सुबह जल्दी (9 बजे से पहले) पानी दें. सतह पर हल्का पानी देने के बजाय गहराई तक सिंचाई करें. ड्रिप इरिगेशन या सोकर होज़ सबसे बेहतर हैं. इससे जड़ों तक नमी पहुंचती है और मिट्टी ज्यादा देर तक ठंडी रहती है.
छाया (Shade) का इस्तेमाल करें
सीधी धूप मिट्टी को तेजी से गर्म करती है. शेड क्लॉथ (shade cloth) लगाएं. बड़े पौधों की छाया का फायदा लें. बालकनी या गार्डन में दोपहर की सीधी धूप कम करें. छाया से मिट्टी का तापमान कई डिग्री तक घट सकता है और पौधे तनाव से बचते हैं.
मिट्टी को बार-बार न खोदें
गर्मियों में बार-बार मिट्टी को उलटने (tilling) से नमी तेजी से उड़ती है और मिट्टी गर्म हो जाती है इसलिए गर्म मौसम में मिट्टी को स्थिर रखना बेहतर होता है ताकि उसका प्राकृतिक माइक्रो-इकोसिस्टम बना रहे.
कंपोस्ट और अच्छी मिट्टी का इस्तेमाल
ऑर्गेनिक मैटर वाली मिट्टी ज्यादा पानी रोकती है और धीरे-धीरे छोड़ती है. कंपोस्ट मिलाने से मिट्टी स्पंज जैसी बनती है. गर्मी में नमी लंबे समय तक रहती है और जड़ों को ठंडा माहौल मिलता है.
पौधों की सही प्लेसमेंट
गर्मी सहने वाले पौधों को धूप वाली जगह और नाजुक पौधों को आंशिक छाया में रखें. पौधों को ग्रुप में लगाने से माइक्रो-क्लाइमेट बनता है. जिससे पौधे सुरक्षित रहते हैं.
आजतक एग्रीकल्चर डेस्क