12 गाय, 2 बैल और 5 कुत्ते... नाना के 27 एकड़ फार्म हाउस पर क्‍या-क्‍या था?

मुंबई के चकाचौंध से दूर नाना पाटेकर अपने 27 एकड़ में फैले फार्म हाउस पर सादगी भरा जीवन व्‍यतीत करना पसंद करते थे. उनके फार्म हाउस पर गाय, बैल से लेकर कुत्ते तक पाले गए थे. नाना पाटेकर खुद फार्म हाउस पर छुट्टियों के दौरान खेती करना पसंद करते थे.

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नाना पाटेकर. (Photo: ITG) नाना पाटेकर. (Photo: ITG)

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 08 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:01 PM IST

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार की सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्‍हें सीने में दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उनके घर मेडिकल टीम को भेजा गया था. मेडिकल टीम ने उन्‍हें 45 मिनट तक सीपीआर दिया और फिर उन्‍हें अस्‍पताल ले जाया गया. जहां डॉक्‍टरों ने नाना पाटेकर को सुबह 5.20 बजे मृत घोषित कर दिया. 

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नाना पाटेकर अपने दमदार अभियन के लिए जाने जाते रहे. लेकिन पर्दे के पीछे वे बेहद सादगी भरा जीवन जीते थे. जहां फिल्मी दुनिया में बड़े सितारों के आलीशान घर और लग्जरी लाइफस्टाइल चर्चा में रहती है, वहीं नाना को शोर-शराबे और दिखावे वाला जीवन पसंद नहीं था. 

मुंबई में रहने के बावजूद उनका मन शहर से ज्‍यादा गांव की शांत जिंदगी में ज्‍यादा लगता था. पुणे के पास खडकवासला में उनका करीब 27 एकड में फैला फार्म हाउस था, जहां वह खेती करते और शांत जीवन व्‍यतीत करते थे. 

साधारण घर में रहते थे नाना 
नाना पाटेकर का जीवन उनकी फिल्‍मों की तरह ही अलग अंदाज वाला रहा. इतने बड़े अभिनेत होने के बावजूद उन्‍होंने मुंबई में भी बेहद साधारण तरीके से रहना पसंद किया. वह अंधेरी के लोखंडवाला इलाके में समर्थ नगर में स्थित एक साधारण वन बीएचके फ्लैट में रहते थे. 

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उनका महाराष्ट्र के रत्नागिरी में उनका पुश्तैनी गांव भी था, जबकि गोवा के डोना पाउला में भी उनका एक घर था. हालांकि इन तमाम जगहों के बीच अगर किसी जगह से उनका सबसे गहरा जुड़ाव था तो वह गांव और खेती थी. 

किस चीज की करते थे खेती
खडकवासला के पास स्थित नाना पाटेकर के फार्महाउस में कई तरह की चीजें उगाई जाती थीं. यहां की खूबसूरती और सादगी उनके व्‍यक्तित्‍व से मेल खाती थी. फार्महाउस में लकड़ी का फर्नीचर, मिट्टी से जुड़ी टेराकोटा फ्लोरिंग और लकड़ी की बीम वाली छत जैसे तत्व देखने को मिलते थे.

चारों तरफ हरियाली और प्राकृतिक माहौल इस जगह को मुंबई की चकाचौंध से बिल्कुल अलग बनाता था. नाना का खेती से लगाव केवल शौक तक नहीं था. वह अपने खेतों में चावल, गेहूं, बाजरा, प्याज और लहसुन जैसी फसलें उगाया करते थे. 

गाय-बैल और पशुपालन के शौकीन थे नाना 
एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि लॉकडाउन के दौरान उनके आसपास कई जानवर भी थे. उनके फार्महाउस में पांच कुत्ते, 12 गाय और दो बैल थे. जानवरों और खेती के बीच बिताया गया यह समय उनके लिए किसी छुट्टी से ज्यादा आनंदित करने वाला जीवन था. उनके फार्महाउस में सात कमरे और एक बड़ा हॉल भी था. लेकिन इन सुविधाओं के बावजूद यह जगह किसी आलीशान सेलिब्रिटी बंगले जैसी नहीं दिखाई देती थी. 

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नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे द्वारा शुरू की गई संस्था 'नाम फाउंडेशन' के जरिए आत्महत्या करने वाले पीड़ित किसान परिवारों और विधवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बकरियां, सिलाई मशीनें और आता चक्की बांटी जाती थीं. इससे कई परिवारों को आजीविका का जरिया मिला.

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