अप्रैल-मई का समय भारत में जायद (ग्रीष्मकालीन) का मौसम होता है. इस दौरान रबी फसलों (गेहूं, सरसों आदि) की कटाई के बाद खेत खाली हो जाते हैं. ऐसे में खरीफ (मॉनसून) फसलों की बुवाई से पहले छोटी अवधि की फसलें उगाई जा सकती हैं. इस मौसम में खेती के लिए सिंचाई की अच्छी व्यवस्था जरूरी है. इन महीनों में मुख्य रूप से गर्मी सहन करने वाली सब्जियों और फलों की खेती की जा सकती है, जिसकी फसल 45-90 दिनों में तैयार होती है और बाजार में अच्छी मांग रहती है.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अप्रैल-मई में सिंचाई की अच्छी व्यवस्था वाले इलाकों में भिंडी, लौकी, करेला, तोरई, तरबूज और खरबूजा जैसी फसलें लगाना फायदेमंद है. ये फसलें कम लागत में तैयार हो जाती हैं. आइए जानते हैं अप्रैल-मई में कौन-कौन सी सब्जियां लगाई जा सकती हैं.
भिंडी (Okra): अप्रैल के पहले सप्ताह से बुवाई शुरू करें. यह 40-50 दिनों में तैयार हो जाती है. सीजन में 3-4 बार कटाई हो सकती है. अच्छी किस्में जैसे अर्का अभय या पल्लवी बढ़िया ऑप्शन है. बाजार में भिंडी की अच्छी मांग रहती है.
लौकी (Bottle Gourd): अप्रैल-मई में बोई जा सकती है. 50-60 दिनों में फल आने शुरू हो जाते हैं. बाजार में 20-30 रुपये किलो तक बिक सकती है. लौकी कम पानी और कम खर्च में अच्छी पैदावार देती है.
करेला (Bitter Gourd): अप्रैल में बुवाई की जा सकती है. यह गर्मी की मांग वाली सब्जी है. करेले की बेल को कम पानी की जरूरत होती है.
तोरई/गिलकी (Ridge Gourd/Sponge Gourd): अप्रैल में तोरई की बुवाई के लिए पूसा चिकनी जैसी किस्में चुनी जा सकती हैं.
बैंगन (Brinjal): अप्रैल में पौधों की रोपाई करें. कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है.
इसके अलावा खीरा, हरी मिर्च, हरा धनिया और कद्दू की खेती भी की जा सकती है.
फलों की खेती
फलों की खेती की बात करें तो तरबूज (Watermelon) और खरबूजा (Muskmelon) जायद की सबसे लोकप्रिय फसल हैं. मार्च-अप्रैल में बुवाई करके जून तक फसल तैयार हो सकती है. अच्छी सिंचाई और ड्रिप सिस्टम से 60-65 दिनों में फसल तैयार हो सकती है.
फल-सब्जियों की खेती के लिए जरूरी टिप्स