मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों के साथ-साथ छोटे देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है. इसी कड़ी में श्रीलंका सरकार ने रविवार को ईंधन की कीमतों में करीब 25% तक बढ़ोतरी कर दी. एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी और 1 मार्च के बाद तीसरी बढ़ोतरी है. यह फैसला अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद लिया गया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है.
खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है. नई बढ़ोतरी के बाद श्रीलंका में ऑटो डीजल की कीमत 303 रुपये से बढ़कर 382 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि सुपर डीजल 353 से बढ़कर 443 रुपये हो गया. पेट्रोल 92 ऑक्टेन 317 से 398 रुपये और 95 ऑक्टेन 365 से 455 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है. केरोसिन की कीमत में भी 30% से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
2022 के आर्थिक संकट जैसे हालात
इस बढ़ोतरी के बाद श्रीलंका में ईंधन कीमतें फिर 2022 के आर्थिक संकट के स्तर के करीब पहुंच गई हैं, जब देश को आजादी के बाद पहली बार डिफॉल्ट घोषित करना पड़ा था. उस समय भारी जनआंदोलन के बीच तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को इस्तीफा देना पड़ा था. श्रीलंका में ईंधन महंगा होने से सार्वजनिक परिवहन पर भी बड़ा असर पड़ा है. निजी बस ऑपरेटरों ने चेतावनी दी है कि अगर किराया नहीं बढ़ाया गया तो 90 प्रतिशत बसें सड़कों से हट सकती हैं.
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उन्होंने कम से कम 15 प्रतिशत किराया बढ़ाने की मांग की है और ऐसा नहीं होने पर देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी दी है. उधर, नेशनल ट्रांसपोर्ट कमीशन के अनुसार डीजल की नई कीमतों के आधार पर बस किराए में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि तय है, जिस पर जल्द कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है. ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी से श्रीलंका में महंगाई 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. श्रीलंका की सरकार ने कहा है कि वह अब भी डीजल और पेट्रोल पर सब्सिडी दे रही है और जनता से ईंधन और बिजली का इस्तेमाल सोच-समझकर करने और जमाखोरी से बचने की अपील की है.
1 लीटर पेट्रोल पर 119 रुपये टैक्स
डेली मिरर अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, एनटीसी के महानिदेशक निलान मिरांडा ने एक बयान में कहा कि संशोधित बस किराए को फार्मूले के अनुसार लागू करने के लिए सोमवार को कैबिनेट की मंजूरी मिलने वाली है. श्रीलंका के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस में प्राइवेट कंपनियों का दबदबा है, जिनका मार्केट शेयर 65-75 प्रतिशत है. वहीं सरकार की हिस्सेदारी लगभग 25-35 प्रतिशत है. विपक्ष ने ईंधन की कीमतें बढ़ाने के लिए सरकार की आलोचना की है. देश में पेट्रोल के प्रत्येक लीटर पर 119 श्रीलंकाई रुपये टैक्स लगता है, जबकि डीजल प्रति लीटर पर 93 श्रीलंकाई रुपये का टैक्स है. विपक्ष का कहना है कि जनता को राहत देने के लिए इन करों को समाप्त किया जाना चाहिए.