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क्यों मिडिल ईस्ट तक उड़ान भर रहे पाकिस्तान के फाइटर जेट्स, महावार्ता से पहले क्या डर सता रहा?

अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले पाकिस्तान ने मिडिल ईस्ट में फाइटर जेट, टैंकर और AWACS तैनात किए हैं. इसका उद्देश्य ईरानी प्रतिनिधिमंडल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. पाकिस्तान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को भी सक्रिय किया है और इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी की गई है. हालांकि, लेबनान में हमलों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे वार्ता पर असर पड़ सकता है.

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ईरानी मेहमानों को सुरक्षा कवच देंगे पाकिस्तान के जेएफ-17 थंडर (File Photo)
ईरानी मेहमानों को सुरक्षा कवच देंगे पाकिस्तान के जेएफ-17 थंडर (File Photo)

इस समय पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं. वजह है शनिवार को होने वाली एक ऐसी मीटिंग, जो मिडिल ईस्ट में चल रही जंग को रोक सकती है. अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली इस बड़ी शांति वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है. लेकिन इस महावार्ता से पहले पाकिस्तान कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता. यही वजह है कि पाकिस्तान ने अपने लड़ाकू विमानों को मिडिल ईस्ट की तरफ रवाना कर दिया है.

दरअसल, पाकिस्तान के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती है ईरान के मेहमानों को सही-सलामत इस्लामाबाद लेकर आना. भले ही दोनों देशों के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर पर सहमति बनी हो, लेकिन तनाव अब भी कम नहीं हुआ है. पाकिस्तान को डर सता रहा है कि कहीं इजरायल कोई ऐसी हिमाकत न कर दे जिससे ईरानी डेलिगेशन के जहाज को खतरा हो जाए. इसी खतरे को देखते हुए पाकिस्तान की वायुसेना ने अपना अब तक का सबसे बड़ा पीसटाइम ऑपरेशन शुरू किया है. इसमें सिर्फ फाइटर जेट्स ही नहीं, बल्कि ईंधन भरने वाले टैंकर और आसमान में नजर रखने वाले खास विमान (AWACS) भी शामिल हैं.

विशेषज्ञ इस पूरे घेरे को आयरन एस्कॉर्ट कह रहे हैं. इसका सीधा मतलब है कि पाकिस्तान अपनी पूरी ताकत लगा रहा है ताकि इस ऐतिहासिक मुलाकात में कोई बाधा न आए. आपको बता दें कि 8 अप्रैल को पाकिस्तान और चीन की मदद से ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रुका था, जिसमें करीब 2,000 लोग मारे गए थे. अब पाकिस्तान की कोशिश है कि इस लड़ाई को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए.

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यह भी पढ़ें: रेड जोन सील, ट्रैफिक डायवर्ट, एग्जाम कैंसिल... ईरान सीजफायर वार्ता के लिए इस्लामाबाद में कैसी है सुरक्षा तैयारी

Pakistan Iran war

इस्लामाबाद बना अभेद्य किला

पाकिस्तान इस वक्त बहुत दबाव में है क्योंकि उसकी अंतरराष्ट्रीय साख दांव पर लगी है. इस्लामाबाद के कई हिस्सों को पूरी तरह सील कर दिया गया है और देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया गया है. पाकिस्तानी मंत्री मोहसिन नकवी ने भी साफ कह दिया है कि विदेशी मेहमानों की सुरक्षा के लिए फूलप्रूफ प्लान तैयार है. अमेरिका की ओर से वहां के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद के लिए निकल चुके हैं, जबकि ईरान की तरफ से उनके विदेश मंत्री और बड़े नेता शामिल होने वाले हैं. अगर यह बातचीत सही से होती है, तो 1979 के बाद यह दोनों कट्टर दुश्मनों के बीच सबसे बड़ी आमने-सामने की मुलाकात होगी.

लेकिन मामला सिर्फ जमीन का नहीं, आसमान का है. युद्ध की वजह से ईरान की अपनी वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है. ऐसे में पाकिस्तान ने जिम्मेदारी ली है कि वह ईरानी डेलिगेशन के जहाज को सुरक्षा कवच देगा. फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि पाकिस्तान के जेएफ-17 थंडर और एफ-16 फाइटर जेट्स ईरान के बंदर अब्बास शहर के पास देखे गए हैं. ये जेट्स ईरानी डेलिगेशन के विमान के साथ-साथ उड़ेंगे और उसे सुरक्षित इस्लामाबाद लेकर आएंगे.

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Iran war Pakistan

इस सुरक्षा घेरे को और मजबूत बनाने के लिए पाकिस्तान ने हवा में ही ईंधन भरने वाले IL-78 टैंकर विमान भी भेजे हैं, ताकि लड़ाकू विमानों को बीच में उतरना न पड़े और वे लंबे समय तक आसमान में डटे रहें. सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि यूएई और सऊदी अरब के पास भी पाकिस्तानी विमानों की हलचल देखी गई है. यह दिखाता है कि पाकिस्तान इस मीटिंग को लेकर कितना गंभीर है और उसने खाड़ी के देशों के साथ भी तालमेल बिठाया हुआ है.

हालांकि, आखिरी वक्त में कुछ अड़चनें भी सामने आ रही हैं. सबसे बड़ा पेच लेबनान को लेकर फंसा है. अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी टीम अभी तक इस्लामाबाद के लिए रवाना नहीं हुई है क्योंकि लेबनान में इजरायली हमलों ने अनिश्चितता पैदा कर दी है. ईरान और पाकिस्तान का कहना था कि युद्ध विराम समझौते में लेबनान पर हमले रोकना भी शामिल है, लेकिन इजरायल और अमेरिका इसे नहीं मान रहे. पिछले दो दिन में लेबनान में भीषण बमबारी हुई है, जिसमें 300 से ज्यादा लोग मारे गए हैं.

अब सारी बात इसी पर टिकी है कि क्या ईरान की टीम इस्लामाबाद के लिए उड़ान भरती है या नहीं. अगर वे आते हैं, तो पाकिस्तान की वायुसेना उन्हें आयरन एस्कॉर्ट के जरिए सुरक्षा देगी. पूरी दुनिया बस इसी इंतजार में है कि क्या शनिवार को शांति का कोई रास्ता निकलेगा, क्योंकि इन बातचीत के नतीजों पर ही मिडिल ईस्ट का भविष्य टिका हुआ है.

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