मिडिल ईस्ट में जंग थमने का नाम नहीं ले रही है, ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच हमले जारी हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बयान देने का सिलसिला भी रुक नहीं रहा. इस बीच मीडिया से बात करते हुए उन्होंने फिर एक बड़ा बयान दिया है. दरअसल, जब डोनाल्ड ट्रंप से पूछा गया कि क्या वो ईरान पर से तेल पाबंदियां हटाएंगे या वहां अपनी सेना भेजेंगे, तो उनका जवाब काफी चौंकाने वाला था. उन्होंने साफ कहा कि, 'मैं कहीं भी सेना तैनात नहीं कर रहा हूं. उन्होंने चुटकी लेते हुए ये भी कहा कि अगर मैं ऐसा कुछ कर भी रहा होता, तो किसी को बताता नहीं.' उनका कहना है कि लोग तो बस कयास लगाते रहते हैं, जबकि हकीकत कुछ और ही होती है.
बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपनी आर्थिक उपलब्धियों का ज़िक्र करने का कोई मौका नहीं छोड़ा. उन्होंने बड़े गर्व से बताया कि कैसे उनके रहते अमेरिकी शेयर बाजार ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. ट्रंप बोले, 'जब मैंने कहा था कि डॉव जोन्स 50,000 के पार जाएगा, तो लोगों ने कहा था कि ये चार साल में भी नहीं हो सकता, मेरे कार्यकाल में तो मुमकिन ही नहीं है. पर हमने ये करिश्मा सिर्फ एक साल में कर दिखाया.' इतना ही नहीं, उन्होंने एसएंडपी इंडेक्स के 7,000 के पार पहुंचने को भी एक बड़ी जीत बताया. उनके मुताबिक, लोग इसे डॉव जोन्स के रिकॉर्ड से भी ज्यादा असंभव मान रहे थे, लेकिन उनकी नीतियों ने इसे सच कर दिखाया. उनका कहना है कि जब देश की इकोनॉमी एकदम अच्छी थी और तेल के दाम भी काबू में थे, तभी उन्होंने ईरान के बिगड़ते हालात देख लिए थे और तय किया कि अब चुप नहीं बैठना है.
ईरान को ट्रंप की दो टूक
इतना ही नहीं ट्रंप ने बातों-बातों में ईरान के नेताओं को भी निशाने पर लिया और कहा कि उनका नेतृत्व अब खत्म हो चुका है. उनका मानना है कि ईरान पूरी दुनिया और खास तौर पर मिडिल ईस्ट के लिए एक बड़ा खतरा है और इस बात पर लगभग हर देश उनसे सहमत है. लेकिन यहां उन्होंने एक पेंच और फंसा दिया. दरअसल, उन्होंने कहा कि अमेरिका अकेला कब तक सबकी रक्षा करेगा? उन्होंने जापान का नाम लेते हुए कहा कि अब उसे खुद आगे आना चाहिए, क्योंकि उनके देश के तेल का 90% हिस्सा उसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है जिसकी रक्षा फिलहाल अमेरिका कर रहा है.
ट्रंप ने ब्रिटेन और नाटो को लेकर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि नाटो मदद तो करना चाहता है लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है. वहीं ब्रिटेन के विमानवाहक पोत भेजने की चर्चा पर उन्होंने कहा कि हमें उनकी जरूरत जंग से पहले थी, जंग जीतने के बाद नहीं. बातचीत के दौरान यह खुलासा भी हुआ कि इजरायली पीएम नेतन्याहू को तेल और ऊर्जा वाले इलाकों पर हमला न करने की सलाह दी गई थी. अब देखना यह होगा कि इस बयान के बाद ईरान और अन्य देशों का क्या रुख रहता है.