ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को इस हफ्ते अपना पूरा विदेशी दौरा रद्द करना पड़ा, और वजह काफी चौंकाने वाली रही. जिन देशों के ऊपर से उनका विमान गुजरने वाला था, उन्होंने अचानक एयरस्पेस क्लियरेंस देने से मना कर दिया. इसके पीछे अमेरिका ने सीधे तौर पर चीन पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है.
ताइवान के मुताबिक, सेशेल्स, मॉरीशस और मेडागास्कर ने पहले अनुमति दी थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया. इन देशों के एयरस्पेस से गुजरकर राष्ट्रपति को एस्वातिनी जाना था, जो ताइवान के कुछ गिने-चुने सहयोगियों में शामिल है.
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अमेरिका के विदेश विभाग ने इस पूरे मामले को गंभीर बताया है. उनका कहना है कि इंटरनेशनल एयरस्पेस का इस्तेमाल सिर्फ सुरक्षा के लिए होना चाहिए, ना कि किसी देश के राजनीतिक दबाव के लिए. अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह साफ तौर पर चीन की कोशिश है कि ताइवान को दुनिया में अलग-थलग किया जाए और उसके नेताओं की आवाजाही रोकी जाए.
चीन पर अफ्रीकी देशों पर दबाव बनाने का आरोप
ताइवान के सुरक्षा अधिकारियों ने भी दावा किया कि चीन ने इन अफ्रीकी देशों पर आर्थिक दबाव डाला. इसमें कर्ज माफी रोकने और दूसरे आर्थिक नुकसान की धमकी तक शामिल थी. हालांकि, चीन ने इन आरोपों से इनकार किया है, लेकिन साथ ही इन देशों के फैसले की तारीफ भी की है और "वन चाइना पॉलिसी" का हवाला दिया है.
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यूरोप-ब्रिटेन ने भी चीन की आलोचना की
इस मामले पर यूरोप और ब्रिटेन ने भी चिंता जताई है. यूरोपीय यूनियन का कहना है कि एयरस्पेस से जुड़े फैसले पारदर्शी होने चाहिए और उन्हें किसी राजनीतिक मकसद के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. वहीं ब्रिटेन की प्रतिनिधि ने भी कहा कि ऐसे फैसलों में सुरक्षा और स्थिरता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
दरअसल, चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को अलग देश मानता है. इसी वजह से चीन अक्सर दूसरे देशों पर दबाव बनाता है कि वे ताइवान से दूरी बनाकर रखें. हालांकि, यह पहली बार है जब एयरस्पेस न मिलने की वजह से ताइवान के राष्ट्रपति को पूरा दौरा ही रद्द करना पड़ा है.