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आखिरी उम्मीद भी खत्म, होर्मुज खोलने के लिए UNSC में वोटिंग, रूस-चीन ने कर दिया VETO

होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप की डेडलाइन पूरी होने से पहले शांति की एक और उम्मीद भी खत्म हो गई है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ट्रंप की डेडलाइन से पहले होर्मुज खोलने के लिए बहरीन की ओर से लाए गए एक प्रस्ताव पर वोटिंग हुई, लेकिन रूस-चीन ने इस पर वोटी कर दिया.

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होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान ने जंग की शुरुआत से ही पाबंदियां लगा रखी हैं. (Photo- ITG)
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान ने जंग की शुरुआत से ही पाबंदियां लगा रखी हैं. (Photo- ITG)

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी बस कुछ ही घंटे में खत्म होने वाली है. अगर ईरान होर्मुज नहीं खोलता है तो ट्रंप ने इस सभ्यता को ही मिटा देने की धमकी दी है. इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रात को होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर वोटिंग हुई. लेकिन यहां भी निराशा हाथ लगी है. 

रूस और चीन ने इस प्रस्ताव पर वोटिंग कर दिया है. रूस और चीन इस प्रस्ताव के खिलाफ पहले से ही थी. ये दोनों ही देश होर्मुज को खोलने में किसी प्रकार के बल प्रयोग के खिलाफ हैं.

यह वोट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के लिए तय की गई 8 बजे (अमेरिकी) की समय सीमा से कुछ ही घंटे पहले हुई है.

बता दें कि ट्रंप ने ईरान से कहा है कि वह इस रणनीतिक जलमार्ग को खोल दे, वरना उसे अपने बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमलों का सामना करना पड़ेगा. दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल आमतौर पर इसी स्ट्रेट से होकर गुजरता है. युद्ध के दौरान इस स्ट्रेट पर ईरान की सख्ती के कारण ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं.

सुरक्षा परिषद में अहम वोटिंग, रूस चीन ने किया खेल

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बहरीन की ओर से सुरक्षा परिषद में लाए गए इस प्रस्ताव को चीन और रूस ने वीटो कर दिया. इसके पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि कोलंबिया और पाकिस्तान ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया. 

आज वीटो किए गए प्रस्ताव में "हॉर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल समुद्री मार्गों के उपयोग में रुचि रखने वाले देशों को प्रोत्साहित किया गया था कि वे परिस्थितियों के अनुरूप, रक्षात्मक प्रकृति की कोशिशें और समन्वय स्थापित करें ताकि हॉर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान दिया जा सके."

मंगलवार के इस प्रस्ताव का मसौदा बहरीन ने तैयार किया था. बहरीन सुरक्षा परिषद की बारी-बारी से मिलने वाली अध्यक्षता संभाल रहा है. और इसमें उसने खाड़ी सहयोग परिषद के सदस्य देशों तथा जॉर्डन के साथ समन्वय किया था. 

बहरीन के शुरुआती प्रस्ताव में देशों को 'सभी जरूरी उपायों' का इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया था. UN की भाषा में इसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल होती. ताकि होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही सुनिश्चित की जा सके और इसे बंद करने की कोशिशों को रोका जा सके. 

लेकिन 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद में रूस, चीन और फ्रांस जिन्हें वीटो का अधिकार प्राप्त है, ने होर्मुज में ताकत प्रयोग को मंजूरी देने का विरोध किया. इसके बाद इस प्रस्ताव में बदलाव किया गया और इसमें से आक्रामक कार्रवाई से जुड़े सभी संदर्भ हटा दिए गए. इसमें केवल "सभी जरूरी रक्षात्मक उपायों" के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी. पहले इस प्रस्ताव पर शनिवार को वोट होने की उम्मीद थी. 

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होर्मुज को खोलने से जुड़ा है प्रस्ताव

लेकिन इस प्रस्ताव को और भी कमजोर कर दिया गया.  इसमें सुरक्षा परिषद की मंजूरी से जुड़े सभी संदर्भ हटा दिए गए. सुरक्षा परिषद की मंजूरी  कार्रवाई के लिए एक आदेश जैसा होता है.  इसके प्रावधानों को केवल होर्मुज स्ट्रेट तक ही सीमित कर दिया गया. जबकि पिछले ड्राफ्ट में आस-पास के जलक्षेत्रों को भी शामिल किया गया था. 

बता दें कि  28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका और इज़रायल के हमलों के जवाब में ईरान ने 10 से ज़्यादा देशों में होटलों, हवाई अड्डों, रिहायशी इमारतों और दूसरे नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है. इन देशों में ईरान के खाड़ी पड़ोसी भी शामिल हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े तेल और प्राकृतिक गैस निर्यातकों में शामिल हैं.
 

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