तीन महीने की भीषण ऊर्जा किल्लत के बाद क्यूबा को आखिरकार राहत मिली है. रूस का एक तेल टैंकर 'अनातोली कोलोडकिन' एक लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर क्यूबा पहुंच गया है. रूसी परिवहन मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है और यह जहाज अभी मातान्जास बंदरगाह पर तेल उतारने की तैयारी में है.
पिछले तीन महीनों से क्यूबा में एक भी तेल का जहाज नहीं पहुंचा था. इसकी वजह थी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियां.
जनवरी में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद वेनेजुएला से क्यूबा को होने वाली तेल आपूर्ति बंद करवा दी. इतना ही नहीं ट्रम्प ने धमकी दी थी कि जो भी देश क्यूबा को तेल भेजेगा उस पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा. इस डर से क्यूबा को सबसे ज्यादा तेल देने वाले देश मेक्सिको ने भी अपनी आपूर्ति रोक दी.
नतीजा यह हुआ कि 10 करोड़ की आबादी वाले इस छोटे से कैरेबियाई देश में बिजली संकट गहरा गया. पूरे देश में लंबे-लंबे बिजली कटौती होने लगी. पेट्रोल की बिक्री पर सख्त राशनिंग लागू हो गई. सबसे दर्दनाक बात यह रही कि क्यूबा के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक इस ऊर्जा संकट का सबसे बुरा असर कैंसर के मरीजों पर पड़ा, खासकर बच्चों पर.
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ट्रम्प ने अचानक पलटी क्यों मारी?
रविवार को ट्रम्प ने अचानक अपना रुख बदल लिया और कहा कि उन्हें किसी भी देश के क्यूबा को तेल भेजने से कोई आपत्ति नहीं है. इसके तुरंत बाद रूसी जहाज क्यूबा के तट की तरफ बढ़ता दिखा.
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कानेल पहले ही कह चुके थे कि तीन महीने से कोई तेल टैंकर नहीं आया और देश गंभीर संकट में है. अब रूसी तेल के पहुंचने से क्यूबा को बिजली संकट से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.
इनपुट: रॉयटर्स