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PAK सेना के खिलाफ PoK में उबाल! 'जालिमों जवाब दो, खून का हिसाब दो' के नारों से गूंजी वादी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में एक बार फिर जनाक्रोश सड़कों पर है. महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ विरोध अब कथित दमन और हिंसा के आरोपों के कारण और उग्र हो गया है. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर कार्रवाई, शहजैब हबीब की हत्या और प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के आरोपों ने लोगों में गुस्सा बढ़ा दिया है.

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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शटडाउन के दौरान सरकार और सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग. (Photo: X)
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में शटडाउन के दौरान सरकार और सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग. (Photo: X)

पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) ​आसिम मुनीर की सेना की बर्बरता को लेकर एक बार फिर चर्चा में है. पिछले कुछ समय से यहां लगातार राजनीतिक अस्थिरता, विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा संबंधी घटनाएं हो रही हैं. क्षेत्र के कई हिस्सों में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लोगों का असंतोष खुलकर सामने आया है, जहां महंगाई, बेरोजगारी, बिजली संकट और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं. 

पाकिस्तानी सेना की बर्बरता के बावजूद पीओके के लोग बिना डरे अपनी आवाज उठा रहे हैं. पीओके के पुंछ जिले की थोरार सब-डिवीजन से सामने आए ताजा वीडियो में प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते नजर आए. यह प्रदर्शन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के बैनर तले आयोजित किया गया. प्रदर्शन के दौरान लोगों ने 'जालिमों जवाब दो, खून का हिसाब दो' और 'जब तक जनता तंग रहेगी, जंग रहेगी, जंग रहेगी' जैसे नारे लगाए. 

प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति को लेकर नाराजगी जताते हुए जवाबदेही और न्याय की मांग की. लोगों का कहना था कि उनकी समस्याओं और शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. हाल के महीनों में पीओके के विभिन्न इलाकों में ऐसे कई विरोध प्रदर्शन और जन आंदोलन देखने को मिले हैं. थोरार में हुआ यह ताजा प्रदर्शन भी उसी सिलसिले की एक और कड़ी माना जा रहा है, जिसमें स्थानीय लोग अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं.

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यह भी पढ़ें: टुकड़े-टुकड़े पाकिस्तान... सिर्फ PoK ही नहीं, वजीरिस्तान से बलोचिस्तान तक झेल रहे मुनीर आर्मी का जुल्म

पीओके में हालात तब बिगड़े, जब पाकिस्तानी सेना ने आर्थिक सुधारों की मांग कर रहे शांतिपूर्ण संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को निशाना बनाया और उसे आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित कर दिया. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटीके कार्यकारी सदस्य शहजैब हबीब की हत्या के बाद हालात बिगड़ गए और पूरे क्षेत्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. इस जन आक्रोश को दबाने के लिए पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने जनरल डायर की तरह पीओके में जलियांवाला बाग की बर्बरता दोहरा दी.

एक खुफिया डोजियर में 5 जून से 9 जून के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर की गई व्यवस्थित हिंसा का विवरण सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, बारमंग ब्रिज पर हुई गोलीबारी वह घटना थी, जिसने पूरे क्षेत्र में फैले विरोध और संकट को जन्म दिया. पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने शांति पूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, जिनमें 27 लोगों की मौत हो गई और 70 से ज्यादा घायल हो गए. 

मरने वालों में बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं. आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या 11 बताई गई है, लेकिन डोजियर में दावा किया गया है कि हिंसा में 19 बच्चों और सात गर्भवती महिलाओं समेत कहीं अधिक लोग मारे गए. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने पीओके में हालात को नियंत्रित करने के लिए 14,000 अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं. डोजियर में यह भी आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में इंटरनेट और कम्युनिकेशन नेटवर्क सस्पेंड कर दिया गया है.

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