लाहौर की कई सड़कों और चौक का नाम बदलने की घोषणा कर पाकिस्तान ने मुफ्त की खूब वाहवाही बटोरी. लेकिन पाकिस्तान की लाहौर सरकार ने अब कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेक दिए हैं. और अब लाहौर में कोई नाम नहीं बदला जाएगा. लाहौर प्रशासन ने कहा था कि लाहौर के इस्लामपुरा इलाका एक बार फिर 'कृष्ण नगर' बन गया है. इसी तरह बाबरी मस्जिद चौक का नाम बदलकर दोबारा 'जैन मंदिर चौक' कर दिया गया है. इसके अलावा सुन्नत नगर को 'संत नगर' और मुस्तफाबाद को फिर से 'धर्मपुरा' के नाम से जाना जाएगा.
लेकिन पाकिस्तान का ये सारा दावा खोखला निकला और इस तरह का कोई नाम नहीं बदला गया है.
एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने लाहौर की सड़कों और कई गलियों के मूल ऐतिहासिक नाम बहाल करने की अपनी योजना को टाल दिया है. ऐसा इसलिए किया गया ताकि कट्टरपंथी तत्वों की ओर से होने वाले विरोध से बचा जा सके.
लाहौर हेरिटेज एरियाज़ रिवाइवल (LAHR) ने अपनी हाल ही में हुई बैठक में लाहौर और उसके आस-पास की सड़कों और गलियों के मूल ऐतिहासिक नाम बहाल करने को मंजूरी दे दी थी. इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता PML-N के अध्यक्ष और तीन बार के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और उनकी बेटी, पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ ने की थी.
मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में मीडिया को इस फैसले के बारे में जानकारी दी थी.
नवाज शरीफ जो फरवरी 2024 के आम चुनावों के बाद से अभी राजनीति में सक्रिय नहीं हैं, LAHR के प्रमुख हैं.
लाहौर प्रशासन का यूटर्न
अब लाहौर प्रशासन ने नाम बदलने के इस फैसले पर यू-टर्न ले लिया है; उसका कहना है कि वह अभी भी लाहौर की सड़कों और गलियों के पुराने नाम बहाल करने पर विचार ही कर रही है.
लाहौर के डिप्टी कमिश्नर कैप्टन आर. मुहम्मद अली एजाज़ ने सोमवार को 'डॉन' को बताया, "अभी तक ऐसा कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.
जब उनसे पूछा गया कि शरीफ और मरियम नों ने ही सड़कों और गलियों के पुराने नाम बहाल करने की मंजूरी दी थी और CM कार्यालय ने 20 मार्च को इस संबंध में बाकायदा एक प्रेस नोट भी जारी किया था. तो एजाज़ ने ज़ोर देकर कहा, "अभी तक कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है, क्योंकि यह मामला अभी भी विचाराधीन है."
हालांकि एक अधिकारी ने बताया कि कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने जिनमें व्लॉगर भी शामिल थे, लाहौर की सड़कों और गलियों के बंटवारे से पहले के "हिंदू और सिख" नामों को बहाल करने के लिए मरियम की कड़ी आलोचना की.
उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "चूंकि आलोचकों ने सरकार के इस फैसले को धार्मिक रंग दे दिया इसलिए मरियम नवाज प्रशासन बैकफुट पर आ गया और विरोध से बचने के लिए इस फैसले को टाल दिया."
कट्टरपंथी तत्वों की ओर से हुए विरोध के बाद LHAR ने हाल ही में विद्वानों, इतिहासकारों, आर्किटेक्टों, शहरी योजनाकारों और अन्य प्रमुख व्यक्तियों की एक बैठक बुलाई और पूरे लाहौर की सड़कों, गलियों और मोहल्लों के मूल नामों को बहाल करने के "प्रस्ताव" पर उनके सुझाव मांगे.
"इस फोरम में शहर के पारंपरिक नामों को फिर से शुरू करने के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और नागरिक महत्व पर चर्चा की गई. यह एक बड़े अभियान का हिस्सा था जिसका मकसद लाहौर की समृद्ध विरासत और पहचान को बचाना और बढ़ावा देना है."
बैठक के बाद LHAR ने एक बयान में कहा, 'बैठक में शामिल लोगों ने शहर के अलग-अलग नामों के ऐतिहासिक महत्व, शहर के अतीत के दस्तावेज़ीकरण, और इस तरह के बदलाव का विरासत संरक्षण, पर्यटन और लोगों में जागरूकता पर पड़ने वाले संभावित असर पर अपने विचार साझा किए.'
बैठक इस आम सहमति के साथ खत्म हुई कि लाहौर की ऐतिहासिक पहचान एक अनमोल विरासत है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सोच-समझकर सहेज कर रखना जरूरी है.'ज़्यादातर लोगों ने लाहौर की सड़कों और गलियों के ऐतिहासिक नामों को फिर से बहाल करने के पक्ष में बात की.
लाहौर की जिन ऐतिहासिक सड़कों और गलियों के नाम पिछली सरकारों द्वारा बदले गए हैं उनमें कई ऐतिहासिक सड़क शामिल हैं.
ये सड़के हैं. क्वीन्स रोड (जिसका नाम बदलकर फ़ातिमा जिन्ना रोड कर दिया गया), जेल रोड (अल्लामा इक़बाल रोड), डेविस रोड (सर आगा खान रोड), लॉरेंस रोड (बाग़-ए-जिन्ना रोड), एम्प्रेस रोड (शहराह-ए-अब्दुल हमीद बिन बादीस), कृष्ण नगर (इस्लामपुरा), संत नगर (सुन्नत नगर), धरमपुरा (मुस्तफ़ाबाद), ब्रैंडरेथ रोड (निस्तार रोड), टेम्पल स्ट्रीट (हमीद निज़ामी), लक्ष्मी चौक (मौलाना ज़फ़र अली खान चौक), जैन मंदिर रोड (बाबरी मस्जिद चौक), राम गली (रहमान गली), कुम्हारपुरा (ग़ाज़ीबाद) और आउटफ़ॉल रोड (जिलानी रोड).
इसी तरह, मोहन लाल बाज़ार, सुंदर दास रोड, भगवान पुरा, शांति नगर और कई अन्य सड़कों/गलियों के नाम भी बदले गए.