अमेरिका-इजरायल के संयुक्त अभियान "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" ने मिडिल ईस्ट को पूरी तरह से युद्ध की आग में झोंक दिया है. इस अभियान के दौरान ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बनाया गया, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके परिवार के सदस्य जैसे बेटी बोशरा, दामाद, बहू जहरा हद्दाद अदेल समेत IRGC के कमांडर मोहम्मद पकपूर, डिफेंस मिनिस्टर अमीर नासिरजादेह, अली शमखानी, इस्माइल कानी और मोहम्मद बघेरी प्रमुख हैं.
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में मिसाइल हमले किए, लेकिन स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है. वहीं, जंग में न्यूट्रल रहे ओमान पर भी ड्रोन हमला हुआ है, जिसमें दुम्क कमर्शियल पोर्ट को निशाना बनाया गया.
इस हमले से एक विदेशी कामगार घायल हुआ और पोर्ट में आग लग गई. मस्कट स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने स्टाफ और नागरिकों को "शेल्टर इन प्लेस" का आदेश दिया है. ओमान की तटस्थता टूटने से मध्य पूर्व का जंग क्षेत्र और बढ़ गया है.
मध्य पूर्व के कई हिस्सों में जैसे लेबनान, यमन और सीरिया में उथल-पुथल के साथ-साथ व्यापक हिंसा देखी जा रही है. हिजबुल्लाह और हूती विद्रोहियों ने ईरान के समर्थन में सक्रियता बढ़ाई है.
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कराची में अमेरिकी कांसुलेट पर भी हमला हुआ और वहां आगजनी की खबरें आईं. सऊदी अरब और UAE अलर्ट पर हैं.
इस पूरी स्थिति ने यह साफ़ कर दिया है कि पूरे मिडिल ईस्ट में शांति अब खत्म हो चुकी है, युद्ध की आग तेजी से फैल रही है. शिपिंग रूट्स प्रभावित हो रहे हैं और वैश्विक तेल कीमतें बहुत बढ़ गई हैं, जिससे वैश्विक तनाव चरम सीमा पर पहुंच गया है.
तेहरान पर हुए हमले में 40 से ज्यादा उच्चस्तरीय नेता मारे गए, जबकि ईरान की न्यूक्लियर साइट्स और मुख्यालय बुरी तरह तबाह हो गए. इस हमले से ईरानी नेतृत्व में भारी वैक्यूम पैदा हो गया है.