ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने तुर्की और ओमान में हुए हालिया हमलों पर चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने साफ कर दिया है कि इन हमलों में न तो ईरान का हाथ है और न ही उसके किसी साथी संगठन का. खामेनेई ने इन घटनाओं को एक झूठा प्रोपेगेंडा करार दिया, जिसका मकसद ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच दुश्मनी पैदा करना है.
ईरानी नए साल 1405 के मौके पर मोजतबा खामेनेई ने अपने खास संदेश में सीधा निशाना 'यहूदी दुश्मन' इजरायल पर साधा. उनका कहना है कि यह हमारे पड़ोसियों से रिश्ते बिगाड़ने की एक गहरी साजिश है, साथ ही आगाह भी किया कि आने वाले दिनों में कुछ और देशों में भी ऐसी नापाक हरकतें देखने को मिल सकती हैं, जिनसे सावधान रहने की जरूरत है.
खामेनेई ने जनता की एकता को बताया असली ताकत
दुनिया भर के मुसलमानों को ईद-उल-फितर की मुबारकबाद देते हुए खामेनेई ने ईरान की सेना की जमकर तारीफ की. उन्होंने बीते साल को 'तीसरा थोपा गया युद्ध' करार दिया. खामेनेई ने दावा किया कि ईरान ने तीन बड़े सैन्य और सुरक्षा संकटों का डटकर सामना किया है. इसमें पिछले साल जून में अमेरिका समर्थित इजरायल के साथ हुआ संघर्ष, इसी साल जनवरी में तख्तापलट की नाकाम कोशिश और अभी चल रही भीषण जंग शामिल है. उनका कहना है कि दुश्मनों ने जनता के मूड को समझने में भारी गलती की. उन्हें लगा था कि हमलों से देश में अशांति फैलेगी, लेकिन इन घटनाओं ने ईरानियों को पहले से कहीं ज्यादा एकजुट कर दिया और विरोधियों को अविश्वसनीय झटका दिया है.
आर्थिक मोर्चे पर खामेनेई ने नए साल के लिए एक नया मंत्र दिया है,'एकजुटता और सुरक्षा के साथ आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था.' उनका मानना है कि ईरान इस वक्त एक बड़े आर्थिक युद्ध का सामना कर रहा है. इसीलिए, पुराने कामकाज के तरीकों को सुधारना और आम जनता की कमाई के रास्ते बेहतर करना अब उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है. साथ ही, उन्होंने देश के मीडिया को भी दोटूक सलाह दी है कि वे अंदरूनी कमियों को बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाएं, क्योंकि इससे दुश्मनों की 'दिमागी जंग' को और बल मिलता है.
आखिर में, खामेनेई ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को और मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे साझा धार्मिक और रणनीतिक हितों के लिए एक-दूसरे का हाथ थामें, क्योंकि आने वाले साल में एकता और क्षेत्रीय कूटनीति ही ईरान की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी.