अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में दूसरे दौर की वार्ता को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है. डोनाल्ड ट्रंप किसी भी कीमत पर ईरान के साथ बातचीत करना चाहते थे लेकिन ईरान इसे लेकर ना-नुकुर कर रहा था. अब खबर है कि अमेरिका ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पाकिस्तान यात्रा को स्थगित कर दिया है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया कि ईरान ने अब तक अमेरिका की बातचीत की शर्तों पर कोई जवाब नहीं दिया है, जिसके चलते अमेरिका ने यह फैसला लिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी डेलिगेशन के पाकिस्तान दौरे को पूरी तरह से रद्द नहीं किया गया है बल्कि स्थगित किया गया है. इसे किसी भी तरह की सकारात्मक स्थिति में फिर से रिवाइव किया जा सकता है.
बता दें कि जेडी वेंस की अगुवाई में अमेरिकी डेलिगेशन के पाकिस्तान पहुंचने की उम्मीद थी, जहां अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होनी थी. लेकिन अब इस यात्रा को होल्ड कर दिया गया है.
वहीं, ईरान ने भी अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि अभी इस्लामाबाद जाने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने इसके पीछे अमेरिका के रवैये को जिम्मेदार ठहराया.
ईरान के मालवाहक जहाज Touska को अमेरिकी नौसेना द्वारा कब्जे में लिए जाने के बाद ईरान ने इस कार्रवाई को समुद्री डकैती करार देते हुए अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर जहाज और उसके चालक दल को तुरंत नहीं छोड़ा गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करना युद्ध की कार्रवाई है और इसलिए यह युद्धविराम का उल्लंघन है. किसी वाणिज्यिक जहाज पर हमला करना और उसके चालक दल को बंधक बनाना इससे भी बड़ा उल्लंघन है. ईरान जानता है कि प्रतिबंधों को कैसे निष्प्रभावी किया जाए. अपने हितों की रक्षा कैसे की जाए और दबाव या धमकियों का सामना कैसे किया जाए.
इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अमेरिका और ईरान से अनुरोध किया था कि सीजफायर को 14 दिनों के लिए और बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि डिप्लोमेसी और बातचीत को एक और मौका दिया जाना चाहिए.
ट्रंप ने साफ कर दिया कि वो सीजफायर को आगे नहीं बढ़ाएंगे. वहीं, ईरान भी फिर से युद्ध की तैयारी किए बैठा है. लेकिन सवाल ये है कि पहले दौर की बातचीत के बाद आखिर ईरान दूसरे दौर की बातचीत को लेकर हामी क्यों नहीं भर रहा.