इजरायल और लेबनान के रिश्तों में एक ऐतिहासिक मोड़ आने वाला है. इजरायली मंत्री गिला गामलियेल के गुरुवार को बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन आज सीधी बातचीत करेंगे. ये 30 सालों से ज्यादा वक्त बाद पहली बार है, जब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बीच सीधा संवाद होगा. हालांकि, नेतन्याहू और लेबनान सरकार ने इस बयान पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है.
इजरायल की सुरक्षा कैबिनेट के सदस्य गामलियेल ने गुरुवार सुबह आर्मी रेडियो को बताया, 'आज प्रधानमंत्री कई सालों के बाद पहली बार लेबनान के राष्ट्रपति से बात करेंगे, क्योंकि दोनों देशों के बीच संवाद पूरी तरह से ठप रहा है.'
बुधवार देर रात हुई कैबिनेट बैठक के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि दशकों से बातचीत में जो ठहराव था, उसे खत्म करना दोनों देशों के हित में है.
इजरायल और लेबनान के सीधे बातचीत करने के फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप ने खुशी जताई है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इजरायल और लेबनान के बीच कड़वाहट कम करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने बताया कि 34 साल बाद दोनों देशों के नेता आपस में बात करेंगे.
ट्रंप के अनुसार, ये बातचीत शुक्रवार को होगी. इस कदम को कूटनीतिक नजरिए से एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि 1993 के बाद से दोनों पक्षों के बीच कोई आधिकारिक उच्च स्तरीय संपर्क नहीं हुआ था.
30 सालों बाद सीधी बातचीत
इससे पहले मंगलवार को अमेरिका ने इजरायल और लेबनान के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक की मेजबानी की थी. इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, काउंसलर माइकल नीधम और दोनों देशों के राजदूत शामिल हुए थे. अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य केंद्र सीधी बातचीत शुरू करना और एक स्थायी शांति समझौते की ओर कदम बढ़ाना है. अमेरिका चाहता है कि ये बातचीत 2024 के समझौते से आगे बढ़कर एक पूर्ण शांति समझौते में बदले.
इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका लक्ष्य लेबनान में मौजूद सभी गैर-राज्य सशस्त्र समूहों को निहत्था करना और आतंकी ढांचे को ध्वस्त करना है. इजरायल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लेबनान सरकार के साथ काम करने को तैयार है. दूसरी ओर, लेबनान ने नवंबर 2024 के सीजफायर की घोषणा को पूरी तरह लागू करने और अपनी क्षेत्रीय अखंडता व संप्रभुता की रक्षा पर जोर दिया है. लेबनान इस समय गंभीर मानवीय संकट से भी जूझ रहा है.
अमेरिका ने विश्वास जताया है कि इन वार्ताओं के सफल होने से लेबनान के पुनर्निर्माण के लिए बड़ी सहायता और आर्थिक सुधार के रास्ते खुलेंगे. इससे दोनों देशों में निवेश के अवसर बढ़ेंगे. अमेरिका ने साफ किया है कि कोई भी समझौता केवल दोनों सरकारों के बीच ही होना चाहिए, जिसमें वाशिंगटन मध्यस्थ होगा. ये पहल न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की समृद्धि के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है.