इजरायल डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) ने लेबनान में हवाई हमलों के साथ-साथ दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर जमीनी आक्रमण शुरू कर दिया है. इस ऑपरेशन के तहत आईडीएफ ने पुलों, बिजली आपूर्ति और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर नष्ट किया जा रहा है. ग्राउंड जीरो पर मौजदू हमारे संवाददाता अशरफ वानी ने टायर शहर के बिजली उत्पादन केंद्र (पावर जनरेशन स्टेशन) से अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में ताजा हालातों की जानकारी दी है.
लेबनान में जारी संघर्ष के बीच इजरायली सेना ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. हवाई हमलों के बाद अब इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में बुनियादी ढ़ांचे जैसे-पुलों और बिजली केंद्रों को निशाना बना रही है, ताकि बड़े पैमाने पर जमीनी घुसपैठ का रास्ता साफ किया जा सके. इस रणनीतिक हमले के बाद आसपास की इमारतें और वाहन भी आग की चपेट में आकर झुलस गए हैं. बताया जा रहा है कि ये कार्रवाई इजरायल की उस नई युद्ध नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह ईरान और लेबनान में दुश्मन के इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह तबाह कर देना चाहता है.
इसी रणनीतिक के तहत दो दिन पहले इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान के टायर शहर में स्थित मुख्य पावर जनरेटर स्टेशन पर मिसाइल हमला किया था. इस हमले के कारण स्टेशन में मौजूद भारी मात्रा में तेल ने आग पकड़ ली, जिससे पूरा परिसर जलकर खाक हो गया और टायर शहर समेत आसपास के इलाकों में बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है.
यहां देखें ग्राउंड रिपोर्ट
उन्होंने आगे कहा कि पहले एरियल स्ट्राइक्स से आस-पास की इमारतें ध्वस्त हो गई थीं. उसके बाद लगी आग ने बचे-खुचे वाहनों, उपकरणों और आस-पास की हर चीज को झुलसा दिया.
रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में हमास के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से हिजबुल्लाह के साथ भी 2023 से 2024 तक करीब एक साल तक संघर्ष चला. नवंबर 2024 में हिजबुल्लाह की ताकत को काफी कमजोर करने के बाद इजरायल ने सीजफायर पर सहमति जताई थी.
इजरायल का दावा था कि हिजबुल्लाह को खत्म कर दिया गया है, लेकिन सीजफायर के बावजूद इजरायल जब चाहता था, दक्षिणी लेबनान में एरियल और सर्जिकल स्ट्राइक्स करता रहता. अब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के बाद इजरायल ने नई रणनीति अपनाई है, जिसमें जमीनी आक्रमण के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर को व्यवस्थित रूप से तबाह किया जा रहा है.