scorecardresearch
 

कैसे अपने ही लोगों का कातिल बना हमास! मदद के लिए मिले पैसों से खरीद रहा हथियार

सात अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमले में 1400 इजरायलियों की मौत हुई. बाद में इजरायल की जवाबी कार्रवाई में गाजा और वेस्ट बैंक में लगभग 10 हजार फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हुई. लेकिन 2015 में जब यमन में हूती विद्रोहियों ने वहां की सरकार का तख्तापलट किया था तो गृहयुद्ध छिड़ गया था.

Advertisement
X
इजरायल और हमास युद्ध
इजरायल और हमास युद्ध

हमास के खिलाफ इजरायल की जंग का सोमवार को 31वां दिन है. सात अक्टूबर से लेकर अब तक गाजा और वेस्ट बैंक में मरने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों का आंकड़ा 10 हजार तक पहुंच गया है. इस जंग में इजरायल के 144 सैनिक भी मारे गए हैं. हमास जहां इसे सबसे बड़ा जिहाद बता रहा है. वहीं, फिलिस्तीन के नाम पर उसका समर्थन करने वाले इजरायल को मुसलमानों का सबसे बड़ा हत्यारा बता रहा है. लेकिन मुसलमानों का सबसे बड़ा कातिल और सबसे बड़ा दुश्मन इजरायल नहीं है.

सात अक्टूबर को इजरायल पर हुए हमले में 1400 इजरायलियों की मौत हुई. बाद में इजरायल की जवाबी कार्रवाई में गाजा और वेस्ट बैंक में लगभग 10 हजार फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हुई. लेकिन 2015 में जब यमन में हूती विद्रोहियों ने वहां की सरकार का तख्तापलट किया था तो गृहयुद्ध छिड़ गया था. उस समय सऊदी अरब ने नौ देशों का गठबंधन बनाकर यमन में हस्तक्षेप किया था. उस युद्ध में डेढ़ लाख मुसलमान मारे गए थे जिनमें ज्यादातर नागरिक थे. 

दूसरी तरफ सीरिया में बशर अल असद ने जब अपनी सत्ता कायम की तो विद्रोहियों को कुचलने के लिए अंधाधुंध कार्रवाई की. बताया जाता है कि तब सीरिया में दो लाख मुसलमान मारे गए थे. इसके बावजूद ये मुसलमान देश सीरिया को अपना सबसे बड़ा दुश्मन बताते हैं जबकि ये असल में मुसलमानों के दुश्मन हैं.

Advertisement

मुसलमानों का एक ऐसा ही दुश्मन तुर्किए भी है. पिछले दिनों तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन ने अपनी संसद में कहा था कि हमास आतंकी संगठन नहीं है. हमास मुजाहिदीनों का वो संगठन है, जो अपने देश की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है. अगर ऐसा है तो उन्हीं मुजाहिदीनों ने जब तुर्किए के एयरबेस पर धावा बोला तो उन पर वाटर कैनन से पानी की बौछार क्यों की गई? आंसू गैस के गोले क्यों दागे गए? उनकी आजादी की लड़ाई में एर्दोगन की पुलिस रुकावट क्यों बन गई? असल में एर्दोआन हमास के प्रचारक बनकर अपनी सियासत तो चमका सकते हैं, लेकिन वो भी जानते हैं कि हमास और उसके समर्थक आतंकी ही हैं.

एर्दोआन 2014 के बाद से तुर्की के राष्ट्रपति हैं और अपनी कट्टर इस्लामी छवि को भुनाकर दूसरी बार भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे. लेकिन आतंक की आग देश में ना फैले तभी कुर्सी बची रहेगी. इसलिए जब से हमास का इजरायल पर हमाल हुआ है तब से वो रैलियों में फिलिस्तान के नाम पर तुर्किए में इस्लामी जाप जप रहे हैं. लेकिन रविवार को जब फिलिस्तीन के नाम पर अमेरिकी बेस पर हमला हुआ तो एर्दोआन उसे कुचलने पर उतर आए.

कैसे हमास बना अपनों का दुश्मन?

हमास के नेता कतर और दूसरे अरब देशों में मजे की जिंदगी जी रहे हैं. हमास का सालाना टर्नओवर एक अरब डॉलर है, लेकिन उसके बावजूद 12 फीसदी बच्चे गाजा में दूषित पानी से दम तोड़ देते हैं. गाजा के लोग जहां बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते हैं, वहीं हमास के नेता मदद के नाम पर मिलने वाला पैसा अपनी जेब में भर लेते हैं. ये गाजा में रहते भी नहीं लेकिन वहां के लोगों पर राज करते हैं. इनके पास इतना पैसा है कि एक नहीं दो-तीन देशों में उन्होंने उसे लगा रखा है. मिस्र और खाड़ी के देशों में उनके बैंक खाते हैं.   

Advertisement

इजरायल के साथ हमास की जंग चल ही रही थी कि फोर्ब्स पत्रिका ने खबर दी कि हमास के नेता खालिद मशाल की कुल संपत्ति बढ़कर पांच अरब डॉलर हो चुकी है. वहीं, इस्माइल हानिया की संपत्ति चार अरब डॉलर है. हमास के एक और नेता अबू मरजूक के पास तीन अरब डॉलर की संपत्ति है. ये आतंकी और इनका परिवार गाजा से दूर रहते हैं और ऐशो-आराम की जिंदगी जीते हैं.

अब सवाल ये है कि हमास के पास इतना पैसा आता कहां से है. हमास की सालान कमाई एक अरब डॉलर है. इसका 70 फीसदी पैसा ईरान देता है. वहीं सुरंगों के जरिए जो सामान स्मगलिंग के जरिए गाजा में आता है, उस पर हमास 20 फीसदी टैक्स लगाता है. इसके अलावा, उसे फिलिस्तीनी प्रवासियों से पैसे मिलते हैं. 2002 में जब से तुर्किए में एर्दोआन सत्ता में आए तब से वो भी हमास की मदद कर रहे हैं. लेकिन इन पैसों से लोगों की सुरक्षा का इंतजाम करने के बजाए हमास अपने लिए सुरंग बनाता है और मानवता के नाम पर मिलने वाली मदद भी हजम कर जाता है. वह इन पैसों से हथियार खरीदने में भी लगा हुआ है.

मुसलमानों की नाक के नीचे यमन में 85 हजार से ज्यादा बच्चों की जान चली गई. ये गाजा में हुई बच्चों की मौत की तुलना में 21 गुना ज्यादा है. वहीं, सीरिया में छिड़ी लड़ाई के दौरान 30 हजार से ज्यादा बच्चे मारे गए थे. ये गाजा में जो हुआ उसका 8 गुना है. लेकिन हैरानी इस बात की है कि इन बच्चों के लिए लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क, सिडनी, टोरंटो में कोई सड़कों पर नहीं निकला. ना ही उनके मुस्लिम इनफ्लुएंसर्स ने #StopGenocideInYemen या #StopGenocideInSyria जैसा कोई ट्रेंड शुरू नहीं किया.

Advertisement

आपको बता दें कि दो देशों की थ्योरी से फिलिस्तीन-इजरायल विवाद के समझौते का समर्थन सऊदी अरब भी करता है. लेकिन सऊदी अरब में फिलिस्तीन के लिए दुआ मांगने पर पाबंदी है और फिलिस्तीनी झंडा लहराया तो पुलिस पकड़ लेगी. 

7 अक्टूबर से जारी है जंग

सात अक्टूबर को हमास ने गाजा पट्टी से इजरायल पर 5 हजार से ज्यादा रॉकेट दागकर हमला कर दिया था. इसके तुरंत बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया था. इन दो हफ्तों की जंग में गाजा पट्टी पूरी तरह से तबाह हो गई है.

इजरायल और हमास जंग में मरने वालों फिलिस्तीनी नागरिकों की संख्या बढ़कर 8306 हो गई है. अब तक गाजा के 23 लाख में से आधे नागरिकों ने अपना घर छोड़ दिचा है. इस जंग में 1400 से अधिक लोग घायल हुए हैं. हमास के लड़ाकों ने 200 से ज्यादा नागरिकों को बंधक बनाकर रखा है. हमास का दावा है कि इजरायली बमबारी में 50 से ज्यादा बंधकों की मौत हो गई है. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement