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एक देश से दूसरे देश... बड़ी जंग या शांति की जद्दोजहद? इस्लामाबाद के बाद मॉस्को पहुंचे अराघची

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद, मस्कट और फिर इस्लामाबाद के दौरे के बाद अब मॉस्को पहुंच गए हैं. अमेरिका से सीधे बातचीत के संकेत नहीं हैं, लेकिन बैकचैनल कोशिशें जारी हैं. अपने दौरे के दौरान अराघची ने अमेरिका को संदेश भेजा है, जिसमें उन्होंने ईरान की रेड लाइन्स बताई हैं.

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विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को संदेश भेजा है. (File Photo)
विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को संदेश भेजा है. (File Photo)

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सीजफायर के बीच एक देश से दूसरे देश का दौरा कर रहे हैं. इस्लामाबाद में अहम बैठकों के बाद वह मॉस्को पहुंच गए हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हो सकती है. ऐसे समय में यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है, जब एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियां और बड़े जंग की आहट है तो दूसरी तरफ शांति की कोशिशें भी जारी हैं.

अराघची ने पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान, ओमान और अब रूस का दौरा किया है. वह पहले इस्लामाबाद पहुंचे, फिर ओमान की राजधानी मस्कट गए और दोबारा पाकिस्तान लौटने के बाद अब रूस के लिए रवाना हुए हैं.

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इस पूरे दौरे को अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक कूटनीतिक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि अब तक इस बात के कोई संकेत नहीं मिले हैं कि दोनों देशों के बीच दूसरी बार सीधी बातचीत होगी या नहीं.

इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर का इस्लामाबाद दौरा रद्द कर दिया. पहले उम्मीद थी कि यह दौरा शांति वार्ता को आगे बढ़ा सकता है, लेकिन ट्रंप ने साफ कहा कि "बिना किसी नतीजे की बातचीत का कोई मतलब नहीं है." 

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ईरान ने अमेरिका को बताई अपनी 'रेड लाइन्स'

पर्दे के पीछे कोशिशें अभी भी जारी हैं. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, तेहरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को कुछ लिखित संदेश भेजे हैं. इन संदेशों में ईरान की "रेड लाइन्स" यानी उसकी शर्तों का जिक्र है, जिसमें परमाणु मुद्दा और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं. हालांकि इसे औपचारिक बातचीत का हिस्सा नहीं बताया गया है.

होर्मुज स्ट्रेट पर पाबंदी से पूरी दुनिया पर असर

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन इसके आर्थिक असर पूरी दुनिया में महसूस किए जा रहे हैं. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होरमुज को बंद कर रखा है, जिससे दुनिया के बड़े हिस्से में तेल, गैस और उर्वरक की सप्लाई प्रभावित हुई है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और कई विकासशील देशों में खाद्य संकट का खतरा बढ़ गया है.

अमेरिका में भी महंगाई, ट्रंप के लिए मुश्कल मिडटर्म चुनाव

अमेरिका के भीतर भी इस हालात का असर दिख रहा है. पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से ट्रंप पर घरेलू दबाव बढ़ गया है, खासकर तब जब नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं. ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि "अगर ईरान बात करना चाहता है तो वह हमारे पास आए."

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यह भी पढ़ें: 'पाकिस्तान ट्रंप के आगे झुकता है, भरोसे लायक नहीं...', ईरान ने बताए Trust Issues, मध्यस्थता पर उठाए सवाल

दूसरी तरफ, ईरान का रुख भी सख्त बना हुआ है. आईआरजीसी ने साफ कहा है कि वह स्ट्रेट ऑफ होरमुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा और इसे अपनी रणनीति का अहम हिस्सा मानता है. ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ समुद्री नाकाबंदी जारी रखी तो वह इसका जवाब देगा.

इसी बीच मध्य पूर्व के दूसरे मोर्चों पर भी तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ हमले के आदेश दिए हैं. उनका कहना है कि हिज्बुल्लाह सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है. वहीं हिज्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है.

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