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ईरानी वार्ताकारों की बढ़ी टेंशन, सबसे अहम मोड़ पर 'नॉट रिचेबल' हुए सुप्रीम लीडर मोजतबा

ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की दो महीने से ज्यादा समय से जनता के सामने नहीं आए हैं. इस स्थिति ने देश में राजनीतिक मतभेद और असमंजस पैदा कर दिया है. सोशल मीडिया पर उनके पोस्टर और संदेश AI से बनाए बताए जा रहे हैं. ईरानी राष्ट्रपति ने हाल ही में उनके साथ बैठक की पुष्टि की है, लेकिन आम जनता और विशेषज्ञ इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं.

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मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी पर सस्पेंस बना हुआ है. (Photo- Reuters)
मोजतबा खामेनेई की मौजूदगी पर सस्पेंस बना हुआ है. (Photo- Reuters)

एक तरफ ईरान की अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत चल रही है, तो दूसरी तरफ देश के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई लापता हैं. जंग शुरू हुए दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन वो न तो जनता के सामने आए हैं और न ही उन्होंने कोई वीडियो या ऑडियो संदेश जारी किया है.

अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों की मानें तो मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को हुए हवाई हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. तब से अब तक वो जनता के सामने नहीं आए हैं. अमेरिका के साथ जारी वार्ता के बीच मोजतबा की 'गुमशदगी' वहां के शासन पर सवाल खड़े कर रही है.

WSJ की एक रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान की सड़कों पर मोजतबा खामेनेई के बड़े-बड़े पोस्टर लगे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उनके अकाउंट से लगातार मैसेज भी पोस्ट किए जा रहे हैं. लेकिन कहा जा रहा है कि ये तस्वीरें और प्रोफाइल पिक्चर AI से बनाई गई हैं.

येल यूनिवर्सिटी के इतिहासकार अरशद अजीजी का कहना है कि मोजतबा खामेनेई की गैर-मौजूदगी उनके कट्टर समर्थकों को परेशान कर रही है. वो शांति वार्ता की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं. समर्थकों को डर है कि मोजतबा की गैर-मौजूदगी में ईरानी अधिकारी अमेरिका को बहुत ज्यादा रियायतें दे रहे हैं.

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मोजतबा खामेनेई की चुप्पी बढ़ा रही सस्पेंस

मोजतबा खामेनेई की चुप्पी ने ईरान की सरकार में भी मतभेद पैदा कर दिए हैं. कट्टरपंथी गुट संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ जैसे उदारवादी नेताओं पर निशाना साध रहे हैं उनका मानना है कि गालिबाफ अमेरिका के सामने घुटने टेक रहे हैं. समर्थकों ने सोशल मीडिया पर मांग की है कि मोजतबा कम से कम एक वॉयस मैसेज जारी करें ताकि लोगों को उनके जिंदा होने और वार्ता करने के समर्थन का यकीन हो सके.

बता दें कि ईरान में सुप्रीम लीडर ही अंतिम फैसला लेता है. 1980 के दशक में अयातुल्ला खुमैनी ने युद्ध खत्म करने के फैसले को 'जहर का प्याला' पीने जैसा बताया था. अली खामेनेई ने भी 2015 के परमाणु समझौते को मंजूरी दी थी. लेकिन मोजतबा की ओर से ऐसी कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है, जो लोगों का शक बढ़ा रही है.

मोजतबा खामेनेई की गैर-मौजूदगी को लेकर सवालों में घिरी ईरानी सरकार ने अब चुप्पी तोड़ी है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दावा किया कि उन्होंने हाल ही में मोजतबा खामेनेई के साथ ढाई घंटे तक बैठक की. इस तरह उन्होंने साफ किया कि मोजतबा जिंदा हैं और देश के अहम फैसले ले रहे हैं.

ईरानी सुरक्षा बलों के विशेषज्ञ सईद गोलकर के मुताबिक, पेजेशकियन जनता और विपक्ष को ये समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि मोजतबा सिर्फ सुरक्षा कारणों से छिपे हैं क्योंकि वो इजरायल की 'किल लिस्ट' में सबसे ऊपर हैं.

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चोटों का पहली बार खुलासा

शुक्रवार देर रात एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने पहली बार मोजतबा की चोटों के बारे में बताया. उन्होंने माना कि हवाई हमले में मोजतबा की रीढ़ की हड्डी और घुटने में चोट आई थी. हालांकि, अब उनकी हालत पहले से बेहतर है. सुप्रीम लीडर के दफ्तर के एक वरिष्ठ अधिकारी मजहर हुसैनी ने एक वीडियो में कहा, 'दुश्मन तरह-तरह के बहाने बनाकर उनका कोई ऑडियो या वीडियो हासिल करने की कोशिश कर रहा है ताकि उसका गलत इस्तेमाल किया जा सके. सही समय आने पर वो खुद आप सभी से बात करेंगे.'

क्या मोजतबा वाकई सक्षम हैं?

सरकारी बयानों के बावजूद तेहरान के आम नागरिक और विशेषज्ञ इस बात से आश्वस्त नहीं हैं. राष्ट्रपति ने ये तो कहा कि बैठक हुई, लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि बैठक कब और कहां हुई. मोजतबा के 'X' अकाउंट से होने वाले पोस्ट में अक्सर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' और विदेशी ताकतों से बदला लेने की बातें होती हैं, लेकिन उनमें वर्तमान वार्ताओं के बारे में कोई ठोस दिशा-निर्देश नहीं होते.

यह भी पढ़ें: 'खाड़ी में आए तो समंदर में ही दफन कर देंगे', मोजतबा खामेनेई की US को सीधी धमकी

मिडिल-ईस्ट संस्थान के विशेषज्ञ एलेक्स वतनका का कहना है कि कई समर्थक सिर्फ मोजतबा खामेनेई के पोस्टर देखकर ही खुश हैं, क्योंकि उनके लिए वो पोस्टर व्यक्ति नहीं बल्कि 'इस्लामिक रिपब्लिक' का प्रतीक है. लेकिन एक राष्ट्र के रूप में ईरान को इस समय एक ऐसे नेता की जरूरत है जो सामने आकर फैसले ले सके. मोजतबा की ये रहस्यमयी अनुपस्थिति ईरान के भविष्य और शांति वार्ताओं पर काले बादल की तरह मंडरा रही है.

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