इजरायल ने बुधवार को अमेरिका के साथ मिलकर दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर जोरदार हमला किया. इस हमले से ईरान बौखला गया है और उसने धमकी दी है कि वो खाड़ी क्षेत्र के तेल और गैस फील्ड्स पर बड़े हमले करेगा. ईरान ने धमकी देते हुए कहा कि वो आने वाले कुछ घंटों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के पांच ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाएगा. हमले और फिर ईरान की धमकी के बाद तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं.
ईरान की न्यूज एजेंसी तस्नीम ने इस खबर की पुष्टि की जिसके बाद तेल की कीमतें उछलकर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं. वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 14:30 GMT के बाद 109.91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो मंगलवार की कीमतों से 5% से अधिक है.
ईरानी न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया कि साउथ पार्स गैस फील्ड पर ईरान के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया गया. यूके का बेंचमार्क गैस प्राइस भी 6% बढ़कर 143.53 पेंस प्रति थर्म तक पहुंच गया, हालांकि बाद में यह 140 पेंस से नीचे आ गया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला ईरान के ऊर्जा क्षेत्र के अहम केंद्र असालुयेह में प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया. शुरुआती खबरों में कई विस्फोटों की बात सामने आई है, हालांकि, हमले से कितना नुकसान हुआ है, यह अभी साफ नहीं है.
माना जा रहा है कि ईरान सऊदी अरब की SAMREF रिफाइनरी और जुबैल पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, यूएई का अल होसन गैस फील्ड, और कतर की रास लाफान रिफाइनरी तथा मेसईद पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले कर सकता है.
साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है जो ईरान के दक्षिणी बुशेहर प्रांत के तट के पास स्थित है. इस गैस फील्ड में कतर की भी साझेदारी है. गैस फील्ड पर हमले को लेकर कतर ने भी इजरायल और अमेरिका के प्रति नाराजगी जाहिर की है.
ईरान की गैस फील्ड पर हमले से दुनिया में बढ़ी चिंता
साउथ पार्स गैस फील्ड में लगी आग ने पहले से ही एनर्जी सप्लाई की दिक्कत से जूझती दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह फील्ड अंतरराष्ट्रीय गैस सप्लाई की रीढ़ मानी जाती है. यह नॉर्थ डोम–साउथ पार्स रिजर्वायर का हिस्सा है, जिसे धरती का सबसे बड़ा ज्ञात गैस भंडार माना जाता है. यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है.
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह फील्ड हर साल अरबों क्यूबिक मीटर गैस का उत्पादन करता है. यह ईरान की घरेलू जरूरतों को पूरा करता है. कतर इसी फील्ड से बड़े पैमाने पर एलएनजी निकालकर दुनिया को निर्यात करता है. दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड आग की चपेट में आया है और इससे सप्लाई चेन पर असर हो सकता है. बाजार फिलहाल इसी पर प्रतिक्रिया दे रहा है जिससे तेल और गैस की कीमतें अचानक से बढ़ गई हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार, फील्ड के प्रमुख प्रोसेसिंग यूनिट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया, जिससे आग लग गई और कई हिस्सों में फैल गई. आपातकालीन टीमें आग पर काबू पाने में जुटी हैं.
फिलहाल तेल की कीमतों में बढ़ोतरी गैस के मुकाबले ज्यादा तेज है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार पहले भू-राजनीतिक जोखिम और सप्लाई की आशंकाओं पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. आमतौर पर संकट के समय तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, जबकि गैस की कीमतें वास्तविक सप्लाई में रुकावट के आधार पर बाद में बढ़ती हैं.
इसके साथ ही, प्राकृतिक गैस की कीमतों में आई बढ़ोतरी यह दिखाती है कि कारोबारी पहले से ही साउथ पार्स गैस फील्ड में आग से जुड़े रिस्क को गैस की कीमतों में शामिल कर रहे हैं.
भारत पर क्या होगा असर?
ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हालिया हमले का भारत में गैस की कीमतों पर सीधा और काफी असर पड़ने की संभावना है. 18 मार्च को अमेरिका-इजरायल हमलों में असालुयेह (बुशहर प्रांत) के प्रोसेसिंग प्लांट्स, पाइपलाइंस और फेज 14 जैसी यूनिट्स को नुकसान पहुंचा, आग लगी और गैस उत्पादन आंशिक रूप से प्रभावित हुआ.
इससे पहले मार्च की शुरुआत में ईरान के ड्रोन हमलों से कतर एनर्जी की रास लाफान और मेसाईड ठिकानों पर हमला हुआ, जिससे दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) उत्पादक ने पूरी तरह उत्पादन रोक दिया. इससे दुनिया की लगभग 20% ग्लोबल LNG सप्लाई प्रभावित हुई है.
भारत LNG की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से कतर पर निर्भर है. कतर का उत्पादन रुकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव से सप्लाई चेन बाधित हो रही है. भारत सालाना LNG का 1.4 करोड़ टन से ज्यादा आयात करता है, और LPG का 80-85% गल्फ (कतर, सऊदी आदि) से आता है.
हमलों के बाद ईरान ने कहा है कि वो सऊदी, यूएई और कतर के पांच तेल ठिकानों पर आने वाले घंटों में हमले करेगा. अगर तेल-गैस ठिकानों पर और हमले होते हैं तो भारत पर तेल-गैस संकट और गहरा सकता है.